By: एबीपी न्यूज़/एजेंसी | Updated at : 09 Nov 2016 10:32 PM (IST)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने केन्द्र सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपए के नोट की वैधता अचानक खत्म किये जाने पर सवाल खड़े करते हुए इसे जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया. उन्होंने आज आशंका जतायी कि हो सकता है कि प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि केन्द्र सरकार ने जिस तरह से 500 और 1000 रुपए के नोटों का चलन बंद किया है, उससे लोगों को अभूतपूर्व संकट का सामना करना पड़ रहा है.

500 और 1000 रुपए के नोट बंद करना स्थायी समाधान नहीं
अखिलेश यादव ने कहा, ‘‘केन्द्र सरकार ने जल्दबाजी में फैसला लिया है. प्रधानमंत्री इस कदम को उठाने से पहले संसद में इस पर चर्चा कर सकते थे.’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हम भी काले धन के खिलाफ हैं. यह (500 और हजार के नोटों का चलन बंद करना) कोई स्थायी समाधान नहीं है. हो सकता है कि यह उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को देखकर ऐसा किया गया हो. उनकी (बीजेपी) तैयारी पूरी है नहीं. लोकसभा का सत्र भी होने वाला है.’’
अखिलेश ने कहा, ‘‘पॉल्यूशन, करप्शन और कालाधन में जब तक जनता का सहयोग नहीं मिलेगा तब तक कुछ नहीं होगा.’’ इसके पूर्व, अखिलेश ने एक ‘ट्वीट’ में भी कहा था कि इन दिनों शादियों का मौसम है. ऐसे में बड़ी नोट की वैधता खत्म किये जाने से लोगों पर मुसीबत आन पड़ी है, लिहाजा केन्द्र सरकार को विवाह के खर्च के लिये 500 और 1000 के नोट के चलन को मंजूरी देनी चाहिये.
गठबंधन किया तो जीत सकते हैं 300 सीटें: अखिलेश यादव
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए ‘महागठबंधन’ बनाने को लेकर ‘जनता परिवार’ के नेताओं में बातचीत के बीच मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज कहा कि सत्ताधारी एसपी अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है, लेकिन गठबंधन करने से 300 सीटें हासिल हो सकती हैं.
अखिलेश ने हालांकि कहा कि गठबंधन बनाना आसान नहीं है. ‘‘नेताजी का अनुभव लंबा है. जो लोग गठबंधन से जुड़ना चाहते हैं वे नेताजी से दूर भी रहे हैं और पास भी रहे हैं.’’ कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (पीके) के साथ मुलाकात के बारे में अखिलेश ने कहा कि पीके ने उनसे मिलने का समय मांगा था. उन्हें समय दे दिया ताकि कोई यह ना कहने पाये कि उनसे मिला नहीं. बैठक बढिया रही.
मुलायम इस समय दिल्ली में हैं. आरएलडी नेता अजित सिंह और जेडीयू नेता शरद यादव के साथ उनकी अलग अलग मुलाकात हुई. इस दौरान मुलायम के छोटे भाई प्रदेश एसपी अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव भी मौजूद रहे. राजद प्रमुख लालू प्रसाद भी राष्ट्रीय राजधानी में हैं. जनता परिवार के सभी नेता पांच नवंबर को एसपी के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए थे. ये एकजुटता दिखाने का प्रयास भी था. एकजुटता इस बात पर निर्भर करेगी कि 403 सदस्यीय उत्तर प्रदेश विधानसभा की कितनी सीटें रालोद जैसे दलों को देने पर मुलायम राजी होंगे.

पहले मुलायम के बाद अखिलेश से मिले प्रशांत किशोर
एसपी मुखिया मुलायम सिंह यादव के साथ मैराथन बैठक के एक दिन बाद कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने सोमवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ अकेले मुलाकात की. अटकलें हैं कि जनता परिवार से जुड़ी पार्टियों और कांग्रेस का महागठबंधन बनाया जाएगा ताकि बीजेपी को सत्ता में आने से रोका जा सके. पीके ने अखिलेश से कई घंटे बातचीत की. समझा जाता है कि राज्य के अगले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक हालात पर चर्चा हुई. उम्मीद है कि टिकट वितरण में मुख्यमंत्री की बात प्रमुखता से मानी जाएगी. ऐसे में पीके की उनसे बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
‘‘मैं पार्टी के प्लेटफार्म पर ही अपने सुझाव दूंगा.’’
अखिलेश ने हालांकि कहा कि गठबंधन होने की स्थिति में कौन जीतेगा और कौन हारेगा, इन बातों पर विचार करना होगा. इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से कुछ कहने से बचते हुए अखिलेश ने संवाददाताओं से कहा कि इस बारे में फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष करेंगे. ‘‘मैं पार्टी के प्लेटफार्म पर ही अपने सुझाव दूंगा.’’ एसपी क्या कांग्रेस से गठबंधन करेगी, इस सवाल पर सीधा जवाब नहीं दिया और अखिलेश बोले, ‘‘यदि एसपी और कांग्रेस गठबंधन चाहते हैं तो क्या आप (मीडिया) इसे रोक लोगे?’’मुलायम से पीके की दो दौर की बैठक पर अखिलेश ने कुछ नहीं कहा.
मुलायम और अखिलेश से पीके की मुलाकात ऐसे समय हुई है जब एसपी ने अपने रजत जयंती समारोह में जनता परिवार के दिग्गज नेताओं के साथ मंच साझा किया था. छह दिन में दूसरी बार पीके मुलायम से मिले. मुलायम समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं. पीके एक नवंबर को मुलायम से दिल्ली में मिले थे.

गठबंधन को लेकर कोई पहल नहीं: राज बब्बर
कांग्रेस ने भी गठबंधन की संभावनाओं को लेकर अपने दरवाजे बंद नहीं किये हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राज बब्बर ने कहा कि उनकी पार्टी या किसी अन्य पार्टी की ओर से गठबंधन को लेकर कोई पहल नहीं की गयी है.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हालांकि राज्य की जनता के फायदे के लिए किसी ऐसी संभावना को लेकर दरवाजे बंद नहीं किये हैं. उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की संभावना पर एसपी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जब ऐसा होगा तो बता दिया जाएगा.
बिहार में महागठबंधन का प्रयोग हो चुका है हालांकि एसपी इससे बाहर हो गयी थी. जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन ने बिहार में बडी चुनावी जीत दर्ज की थी और बीजेपी के नेतृत्व वाले राजग को हराया था.
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