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अबकी बार 'बेनामी' पर वार, प्रॉपर्टी छिपाई तो बच नहीं पाएंगे

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ये बयान दे रहे हैं कि कालेधन के खिलाफ उनका अगला कदम बेनामी संपत्ति के खिलाफ होगा. इसी साल सरकार बेनामी संपत्ति के खिलाफ कड़ा कानून लेकर आई है. अब सवाल है कि इस कानून से अलग आखिर सरकार ऐसा कौन सा कदम उठाएगी.  आखिर संशोधित बेनामी संपत्ति कानून में क्या है?

प्रधानमंत्री मोदी ये बात पहले से ही जानते थे कि सिर्फ नोटबंदी से ही काले धन का खुलासा नहीं होने वाला. इसीलिए नोटबंदी से पहले ही बेनामी संपत्ति कानून में बड़ा बदलाव कर उसे पहले के मुकाबले और सख्त बना दिया. 1 नवंबर से ये कानून अमल में भी आ चुका है. पहली बार 1988 में बेनामी प्रॉपर्टी प्रोहिबिशन एक्ट लागू हुआ था, लेकिन उसका असर कभी दिखा नहीं. शायद इसीलिए सरकार को पुराने कानून में संशोधन करना पड़ा. संशोधन के बाद इसे बेनामी प्रॉपर्टी प्रोहिबिशन अमेंडमेंट 2016 का नाम दिया गया.

प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन किसी और के नाम पर होता है और पैसे का भुगतान कोई और करता है. ऐसी प्रॉपर्टी पत्नी, बच्चों या किसी रिश्तेदार के नाम पर खरीदी जाती है. कई बार ये भी सामने आया है कि लोगों ने अपने नौकरों, ड्राइवरों और माली के नाम से भी प्रॉपर्टी खरीदी है. इस तरह के लेन-देन में जो व्यक्ति प्रॉपर्टी के लिए भुगतान करता है वो इसे अपने नाम से नहीं खरीदता.

इतना ही नहीं यदि आपके पास कोई ज्वाइंट प्रॉपर्टी है. मतलब, एक प्रॉपर्टी जिसमें आपका नाम तो है, लेकिन आपने इस खर्च का जिक्र अपने इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं किया है तो उसे भी बेनामी माना जाएगा.

आपने प्रॉपर्टी अपने बेटे, बेटी, पत्नी या के नाम पर खरीदी है और उसे अपनी डिक्लेयर इनकम से खरीदी है और अपने इनकम टैक्स रिटर्न में दिखाया है तो उस प्रॉपर्टी को बेनामी नहीं माना जाएगा.

1988 के कानून और 2016 के कानून में फर्क है सजा का. 2016 के कानून में मोदी सरकार ने सजा के प्रावधान को पहले से ज्यादा सख्त बना दिया है. पुराने कानून में अधिकतम तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान था, लेकिन एक नंवबर से लागू नए कानून में सजा की अधिकतम सीमा 7 साल होने के साथ संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान जुड़ गया है.

बेनामी लेनदेन का दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल और अधिकतम 7 साल की सज़ा और प्रॉपर्टी के मार्केट वैल्यू का 25 फ़ीसदी तक जुर्माना होगा. जानबूझकर ग़लत जानकारी देने पर कम से कम 6 महीने और अधिकतम 5 साल की सजा और संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 10 फ़ीसदी तक का जुर्माना होगा. जुर्माना और सजा दोनों साथ-साथ दी जा सकती है.

एक्ट में प्रावधान है कि सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी को लगता है कि आपके कब्जे की प्रॉपर्टी बेनामी है तो वह आपको नोटिस जारी कर आपसे प्रॉपर्टी के कागजात तलब कर सकता है. नोटिस के मिलने के बाद आपको 90 दिन के भीतर अपनी प्रॉपर्टी के कागजात अधिकारी को दिखाने होंगे. जिसके बाद वो प्रॉपर्टी के बेनामी होने या न होने का फैसला करेगा. इन प्रावधानों के बावजूद लोगों में कई तरह का कंफ्यूजन बना हुआ है. उसमें सबसे बड़ा कंफ्यूजन ये है कि जब सरकार ने कानून पहले ही लागू कर दिया है तो अगला कौन सा कदम उठाने जा रही है, कानून के नियमों को लेकर भी लोगों में कंफ्यूजन है . ऐसे में सरकार को लोगों के मन में उठ रहे सवालों के जवाब देने होंगे. जिससे ईमानदार लोगों में बेवजह का डर खत्म हो.

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