चुने हुए प्रतिनिधि क्यों लेते हैं शपथ, क्या हैं पद की शपथ लेने को लेकर संविधान में नियम, जानिए
चुने हुए प्रतिनिधि पद की शपथ क्यों लेते हैं. क्या कहता है हमारा संविधान शपथ लेने को लेकर, जानिए सबकुछ...

नई दिल्ली: लंबी खीचतान के बाद आज महाराष्ट्र को आखिरकार नया मुख्यमंत्री मिल जाएगा. राज्य में शिवसेना, NCP और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी है. महाराष्ट्र को पहली बार आज शिवसेना से कोई मुख्यंत्री मिलेगा. शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे आज शाम 6 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. उनके शपथग्रहण की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. शपथग्रहण को लेकर शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना में लिखा है कि आज नया सूर्योदय हुआ है. सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं आज पूरे देश में 15 अगस्त 1947 यानी आजादी के दिन जैसा जश्न देखने को मिल रहा है.
अब, जब शाम में उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे तो ऐसे में आइए जानते हैं कि जब भी कोई नई सरकार बनती है या पद पर कोई काबिज होता है तो शपथ क्यों लेता है. हमारे देश के संविधान में शपथ को लेकर क्या लिखा हुआ है.
दरअसल संविधान के अनुच्छेद 75 (4), 99, 124(6), 148(2), 164(3), और 219 में अलग-अलग लोगों के लिए शपथ लेने का जिक्र है. एक-एक कर के आइए जानते हैं क्या लिखा है इन अनुच्छेदों में..
अनुच्छेद 75 (4) में संघ के मंत्री के लिए पद की शपथ के प्ररूप की बात कही गई है.
अनुच्छेद 99 कहता है कि संसद के प्रत्येक सदन का प्रत्येक सदस्य अपना स्थान ग्रहण करने से पहले, राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची के इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्रारूप के अनुसार, शपथ लेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा.
अनुच्छेद 124(6) के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति या उसके द्वारा नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ लेंगे.
148(2) के मुताबिक प्रत्येक व्यक्ति, जो भारत का नियंत्रक-महालेखापरीक्षक नियुक्त किया जाता है, वह अपना पद ग्रहण करने से पहले, राष्ट्रपति या उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त व्यक्ति के समक्ष, तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्ररूप के अनुसार, शपथ लेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा.
वहीं अनुच्छेद 164(3) कहता है कि किसी मंत्री द्वारा अपना पद ग्रहण करने से पहले, राज्यपाल तीसरी अनुसूची में इस प्रयोजन के लिए दिए गए प्रारूपों के अनुसार उसको पद की और गोपनीयता की शपथ दिलाएगा.
भारतीय सरकार के वेबसाइट के मुताबिक सभी सरकारी सेवकों को संविधान या भारत के प्रति निष्ठा की शपथ निर्धारित रूप में लेनी होती है. वह शपथ-पत्र अंग्रेजी या हिंदी या किसी भी आधिकारिक क्षेत्रीय भाषा में पढ़ सकता है.पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी जो विदेशी नागरिक हैं, उन्हें भी शपथ लेना आवश्यक है.
सरकार की वेबसाइट के मुताबिक शपथ लेने को सरकारी सेवा में व्यक्तियों की नियुक्ति की शर्तों में से एक है. शपथ ग्रहण समारोह में चुने हुए प्रतिनिधि शपथ लेते हैं कि वह अपने पद की गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और वे सभी परिस्थितियों में देश की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखेंगे.
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