एक्सप्लोरर

कोल्ड वॉर से लेकर अमेरिका के वेनेजुएला पर कब्जे तक, कैसे डीप स्टेट सरकारों से ज्यादा ताकतवर, क्या भारत को खतरा?

नाराजगी को दबाया नहीं जा सकता और बदलाव को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई देशों में हुए तख्तापलट के पीछे किसी बड़ी साजिश को नकारा भी नहीं जा सकता है. फिर कुल मिलाकर एक ही नाम दिमाग में आता है- डीप स्टेट.

इन दिनों दुनियाभर में एक ही नाम सुनाई दे रहा है- डीप स्टेट. 4 जनवरी 2026 को अमेरिका ने वेनेजुएला पर कब्जा किया, जिसे डीप स्टेट की मदद का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है. इन दो लफ्जों की थ्योरी से अमेरिका ने कई देशों में सरकारें गिराईं, जंग करवाने से लेकर जंग रुकवाई भी हैं. लेकिन अब सवाल उठता है कि क्या भारत को इससे सतर्क रहने की जरूरत है?

डीप स्टेट थ्योरी की हकीकत क्या है?

EBSCO की रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, 'डीप स्टेट एक ऐसा गुप्त नेटवर्क है जो सरकारी, कॉर्पोरेट और गैर-सरकारी लोगों से मिलकर बनता है. ये लोग चुनी हुई सरकारों से अलग काम करते हैं और नीतियां बनाने में दखल देते हैं. अमेरिका में इसे इंटेलिजेंस एजेंसियों जैसे CIA, FBI और NSA से जोड़ा जाता है. ये नेटवर्क सरकारों को कमजोर करके अपने हितों को आगे बढ़ाता है. दुनिया के कई देशों में डीप स्टेट को सरकारें गिराने या अस्थिरता फैलाने का जिम्मेदार माना जाता है. यह सिर्फ एक थ्योरी नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी हुई बात है.'

डीप स्टेट की शुरुआत कब हुई और इतिहास क्या है?

डीप स्टेट शब्द की शुरुआत तुर्किये से हुई, जहां 1990 के दशक में एक सड़क हादसे के बाद सरकार, पुलिस और माफिया के गठजोड़ का खुलासा हुआ. इसे तुर्किये में 'डरिन देवेलेट' यानी गहरा राज्य कहा गया. अमेरिका में इसकी जड़ें दूसरे विश्व युद्ध से फैली थीं. 1941 में जापान के पर्ल हार्बर हमले के बाद अमेरिका ने ऑफिस ऑफ स्ट्रैटेजिक सर्विसेज (OSS) बनाई, जो इंटेलिजेंस और गुप्त ऑपरेशनों के लिए जिम्मेदार थी. युद्ध जीतने के लिए OSS को बहुत ताकत दी गई, लेकिन युद्ध के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन ने इसे बंद कर दिया क्योंकि वे इसे अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा मानते थे.

 

वर्ल्ड वॉर 2 में OSS ने अहम भूमिका निभाई थी
वर्ल्ड वॉर 2 में OSS ने अहम भूमिका निभाई थी

फिर भी, शीत युद्ध के दौरान 1947 में सेंट्रल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी CIA की शुरुआत हुई, जो OSS की तरह ही काम करती थी. CIA ने कई देशों में सरकारें गिराईं, जैसे 1953 में ईरान का ऑपरेशन अजाक्स, 1954 में ग्वाटेमाला, 1960 में कांगो, 1973 में चिली और 1981 में इक्वाडोर. यह ऑपरेशन अमेरिकी हितों को बचाने के लिए थे, लेकिन इन्होंने डीप स्टेट की थ्योरी को मजबूत किया.

अमेरिका के लिए खतरा कैसे बना डीप स्टेट?

अमेरिका में डीप स्टेट को चुनी हुई सरकार से ज्यादा ताकतवर माना जाता है. यह इंटेलिजेंस एजेंसियों का नेटवर्क है जो गुप्त तरीके से काम करता है. उदाहरण के तौर पर, 1962 के क्यूबन मिसाइल क्राइसिस में राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने डीप स्टेट से जुड़े लोगों से सलाह ली और हमले की बजाय नाकाबंदी की. CIA ने दुनिया भर में चुनावों में दखल दिया. 1945 से 1975 तक CIA ने प्रोजेक्ट सेमरॉक चलाया, जिसमें अपने ही नागरिकों की जासूसी की. डीप स्टेट को अमेरिकी लोकतंत्र के लिए खतरा माना जाता है क्योंकि यह अनचुने लोग बहुत खुफिया जानकारी रखते हैं और कांग्रेस सदस्यों को ब्लैकमेल कर सकते हैं.

डीप स्टेट पर डोनाल्ड ट्रंप की क्या राय है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार डीप स्टेट को अमेरिका और दुनिया के लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हैं. उन्होंने चुनाव प्रचार में कहा कि डीप स्टेट उनके देश को खोखला कर रहा है और वे इसे खत्म करेंगे. ट्रंप पर हुए हमले में भी डीप स्टेट की भूमिका बताई गई. ट्रंप की विदेश नीति में 'मोनरो डॉक्ट्रिन' का जिक्र है, जो अमेरिका को लैटिन अमेरिका में दखल देने की इजाजत देता है. वे कहते हैं कि डीप स्टेट सरकार के फैसलों को बदल सकता है. एलन मस्क भी डीप स्टेट को खतरा मानते हैं. हालांकि, ट्रंप की नीतियां वेनेजुएला जैसे दूसरे देशों में लागू हो रही हैं.

क्या वेनेजुएला पर कब्जा करना डीप स्टेट का हिस्सा है?

वेनेजुएला में अमेरिका ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की सरकार गिरा दी. ट्रंप ने इसे अपनी जीत बताया, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये अमेरिका की रणनीतिक हार हो सकती है. अमेरिका ने 'डी-लेजिटिमाइजेशन' रणनीति अपनाई, यानी वेनेजुएला की सरकार को अवैध बताकर दखल दिया. वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड, क्यूबा और कोलंबिया पर भी संकट मंडरा रहा है. ट्रंप की 'हिट लिस्ट' में कई देश हैं, जहां अमेरिका घुसकर सत्ता बदल सकता है. ये डीप स्टेट की थ्योरी से जुड़ा है, जहां अमेरिका अपने हितों के लिए सरकारें गिराता है. बावजूद इसके डीप स्टेट से खुद अमेरिकी सरकार को भी खतरा है.

नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों में डीप स्टेट की थ्योरी क्या है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, डीप स्टेट आस्तीन में छिपे सांप जैसा है. जिसे सरकारें खुद पालती हैं, लेकिन वक्त आने पर शिकार हो जाती हैं. डीप स्टेट की कोई एक शक्ल नहीं है. नेपाल में 2025 में Gen-Z प्रदर्शन हुए, जहां भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया बैन और राजशाही बहाली के मुद्दे पर युवा सड़कों पर उतरे. कुछ लोग इसे अमेरिकी या चीनी डीप स्टेट की साजिश मानते हैं. अमेरिका USAID और MCC के जरिए निवेश करता है, जबकि चीन BRI परियोजनाओं से प्रभाव बढ़ाता है.

बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिरने को भी डीप स्टेट से जोड़ा गया. लेकिन कई एक्सपर्ट्स इसे कॉन्सपिरेसी थ्योरी कहते हैं, क्योंकि इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला. अमेरिका भारत को मजबूत बनाना चाहता है ताकि चीन का मुकाबला हो, इसलिए भारत को कमजोर करने की साजिश बेमानी है. नेपाल और बांग्लादेश की समस्याएं घरेलू हैं, जैसे भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट.

भारत में डीप स्टेट की थ्योरी क्या कहती है ?

भारत में भी डीप स्टेट की बात होती है. 2024 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया था. उन्होंने सदन में खड़े होकर कहा था, 'We cannot allow the largest democracy to be made dysfunctional by deep state anywhere else. यानी हम किसी भी कीमत पर भारत के लोकतंत्र को डीप स्टेट के हाथों खत्म होने नहीं देंगे.'

भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने  जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन को विदेशी शक्तियां कहा था. इस पर भारत में अस्थिरता फैलाने के आरोप हैं. 2020 के किसान आंदोलन और इमरजेंसी के दौरान गैर-निर्वाचित लोगों के दखल की बात हुई. भारत के चुनावों में विदेशी दखल के आरोप लगते हैं. पाकिस्तान, बांग्लादेश और सीरिया में सरकारें गिरने को डीप स्टेट से जोड़ा जाता है, लेकिन पुख्ता सबूत नहीं हैं.

वेनेजुएला के बाद भारत को सतर्क क्यों रहना चाहिए?

डिफेंस एक्सर्ट और रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, 'वेनेजुएला में अमेरिकी दखल से साफ है कि डीप स्टेट बड़े देशों को भी निशाना बना सकता है. ट्रंप की 'हिट लिस्ट' में भारत का नाम आने की चर्चा है, क्योंकि अमेरिका अपनी नीतियों से भारत को प्रभावित कर सकता है. नेपाल और बांग्लादेश की अस्थिरता भारत की सीमाओं को प्रभावित करती है. चीन BRI से नेपाल में प्रभाव बढ़ा रहा है, जबकि अमेरिका NGOs के जरिए दखल दे सकता है. भारत क्षेत्रीय ताकत है, लेकिन पड़ोसी देशों में उथल-पुथल से चुनौतियां बढ़ती हैं. डीप स्टेट थ्योरी से सतर्क रहना जरूरी है, क्योंकि विदेशी शक्तियां चुनावों और आंदोलनों में दखल दे सकती हैं.'

संजय कुलकर्णी ने कहा, 'भारत अब 4.18 ट्रिलियन डॉलर के साथ दुनिया की चौथी बड़ी इकोनॉमी है. भारत को अब अमेरिका और चीन जैसे देशों के बारे में विस्तार से सोचना होगा. बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों से भारत आसानी से निपट सकता है.'

क्या डीप स्टेट कॉन्सपिरेसी थ्योरी है या हकीकत?

कई एक्सपर्ट्स डीप स्टेट को कॉन्सपिरेसी थ्योरी मानते हैं, क्योंकि इसका कोई ठोस आधार नहीं है. अमेरिका और चीन दोनों को दोष देना बेमानी है. नेपाल और बांग्लादेश की समस्याएं घरेलू हैं, जैसे भ्रष्टाचार और कुशासन. लेकिन ऐतिहासिक घटनाएं जैसे ईरान और चिली में CIA के दखल से ये थ्योरी मजबूत होती है. सरकारें अपनी नाकामियां छिपाने के लिए इसे इस्तेमाल करती हैं. भारत जैसे देशों को सतर्क रहना चाहिए, लेकिन बिना सबूत के आरोप नहीं लगाने चाहिए.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें 8 साल से ज्यादा का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

CM नहीं सिद्धारमैया, फिर भी डीके शिवकुमार से ज्यादा पावरफुल कैसे ? कर्नाटक में जलवा बरकरार, इनसाइड स्टोरी
CM नहीं सिद्धारमैया, फिर भी डीके शिवकुमार से ज्यादा पावरफुल कैसे ? कर्नाटक में जलवा बरकरार, इनसाइड स्टोरी
INDIA गठबंधन में बढ़ी दरार! लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठेगी डीएमके, संसद तक पहुंची सियासी नाराजगी
INDIA गठबंधन में बढ़ी दरार! लोकसभा में कांग्रेस से अलग बैठेगी डीएमके, संसद तक पहुंची सियासी नाराजगी
Aaj Ka Mausam: 19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
TMC में अब महासंग्राम! महुआ मोइत्रा का बागियों पर तगड़ा हमला, बोलीं- 'ममता बनर्जी के नाम पर...'
TMC में अब महासंग्राम! महुआ मोइत्रा का बागियों पर तगड़ा हमला, बोलीं- 'ममता बनर्जी के नाम पर...'

वीडियोज

Breaking | Malviya Nagar Fire Update: होटल जला तो पता चला, सब मिले हैं जी! | Delhi News | Fire
Malviya Nagar Fire | Janhit: 'करप्शन' की 'आग' में पूरा परिवार खत्म! | Delhi News | Chitra Tripathi
Delhi Malviya Nagar Fire | Bharat Ki Baat: 1 परिवार, 8 जिंदगी...'सिस्टम' ने छीन ली! | Fire Accident
Sandeep Chaudhary: 'FLOP SYSTEM' की पोल-खेल Analysis! | Lavkesh Bajaj | Malviya Fire News | Delhi
Malviya Nagar Fire News | Mahadangal: कागजों मे ही कायदे कानूनहकीकत में तबाही और मौत? | Breaking

फोटो गैलरी

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
CM नहीं सिद्धारमैया, फिर भी डीके शिवकुमार से ज्यादा पावरफुल कैसे ? कर्नाटक में जलवा बरकरार, इनसाइड स्टोरी
CM नहीं सिद्धारमैया, फिर भी डीके शिवकुमार से ज्यादा पावरफुल कैसे ? कर्नाटक में जलवा बरकरार, इनसाइड स्टोरी
54 साल के हुए योगी आदित्यनाथ: 22 की उम्र में संन्यास, फिर महंत से मुख्यमंत्री तक का सफर, ऐसे हैं अजय सिंह बिष्ट
54 साल के हुए योगी आदित्यनाथ: 22 की उम्र में संन्यास, फिर महंत से मुख्यमंत्री तक का सफर
Aaj Ka Mausam: 19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
19 राज्यों में आंधी-बारिश, 80 KMPH की रफ्तार से तूफानी हवाएं, देश में मानसून की एंट्री के बाद IMD की नई चेतावनी
मार्क बाउचर की टेस्ट वर्ल्ड XI में 3 भारतीय, कोहली-रोहित किसी को जगह नहीं, कप्तान किसे बनाया जानिए
मार्क बाउचर की टेस्ट वर्ल्ड XI में 3 भारतीय, कोहली-रोहित किसी को जगह नहीं, कप्तान किसे बनाया जानिए
HJTIHH BO Day 1 Prediction: 'है जवानी तो इश्क होना है' क्या बन पाएगी साल की 5वीं सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म? जानें- बॉक्स ऑफिस प्रीडिक्शन
'है जवानी तो इश्क होना है' क्या बन पाएगी साल की 5वीं सबसे बड़ी ओपनिंग फिल्म? जानें- प्रीडिक्शन
Rotten Mangoes: सावधान! मार्केट में बिक रहा सड़े और कीड़ों वाले आम का जूस, हो सकती है ये गंभीर बीमारी
सावधान! मार्केट में बिक रहा सड़े और कीड़ों वाले आम का जूस, हो सकती है ये गंभीर बीमारी
EV की वजह से इस कंपनी को तगड़ा नुकसान, 70 साल में पहली बार हुआ ऐसा
EV की वजह से इस कंपनी को तगड़ा नुकसान, 70 साल में पहली बार हुआ ऐसा
अमरूद के बाग से होगी बंपर कमाई, मॉनसून से पहले करें यह जरूरी उपाय, हाथों-हाथ बिकेगा फल
अमरूद के बाग से होगी बंपर कमाई, मॉनसून से पहले करें यह जरूरी उपाय, हाथों-हाथ बिकेगा फल
Embed widget