तीन साल पर सुषमा का दो टूक- बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते

नई दिल्ली: मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने पर आज विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अपने मंत्रालय का लेखा जोखा पेश किया. सुषमा स्वराज ने तीन साल के कामकाज को बेहतरीन बताते हुए कहा कि हमने विदेश में मुसीबत में फंसे 80 हजार भारतीयों को बचाया. उन्होंने कहा, ''गरीब कल्याण और साहसिक फैसलों के कारण हमारी सरकार की लोकप्रियता बढ़ रही है ठीक वैसे ही भारत की लोकप्रियता और पीएम की लोकप्रियता विदेशो में भी बढ़ रही है.''
पाकिस्तान से नीति समझने के लिए तीन बातें जरूरी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि पाकिस्तान से भारत की विदेश नीति समझने के लिए तीन बातों को समझना बेहद अहम है.
- पहली बात- हम बातचीत से हर मसले को सुलझाना चाहते हैं.
- दूसरी बात- हम बातचीत के लिए किसी की मध्यस्ता स्वीकार नही करेंगे
- तीसरी बात- बातचीत और आतंकवाद फिलहाल एक साथ नही चल सकते
विदेश मंत्री ने कहा, ''पाकिस्तान के साथ पठानकोट पर हमने सहयोग किया उन्होंने कहा कि JET भेजेगे हमने कहा भेजो लेकिन जांच अटकी हुई है. असताना में पाकितान से मुलाकात तय नही है." उन्होंने कहा, ''कतर के साथ हमारे किसी MOU या हितों पर किसी तरह का असर नही पड़ेगा. वो GCCI का आंतरिक मामला है वे पहले भी है ऐसे प्रतिबंध लगा चुके हैं और हटा चुके हैं.''
भारत अमेरिकी के रिश्ते परस्पर लाभ के, पेरिस समझौते पर किसी दबाव में हस्ताक्षर नहीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत अमेरिका रिश्तों पर कह, ''भारत अमेरिका से पारस्परिक लाभ का रिश्ता मान कर चल रहा है. 2004 से 65 हज़ार अमेरिकी वीज़ा बरकरार है. पीएचडी करने वाले छात्रों की संख्या का वीजा 20 हज़ार है और वो भी बरकरार है. बहुत से मुद्दे ऐसे है जिनको बिना कांग्रेस की मंजूरी के बिना पास नही किया जा सकता.
विदेश मंत्री ने कह, ''हम अमेरिकी कांग्रेस के सांसदों के संपर्क में है कि कभी कोई ऐसा संशोधन न हो जाये जो भारत के हितों को नुकसान हो. पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर हमने किसी दवाब में नही किये हैं इस पर हस्ताक्षर हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है. आज भी लोग गाव में पीपल को सींचते हैं नदियों को पूजते हैं.''
चीन पर क्या बोलीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज? चीन के साथ भारत के रिश्तों पर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा, ''चीन कहता है कि हमारा विरोध भारत के खिलाफ नहीं है हमारा विरोध नॉन एनपीटी देशो के खिलाफ है लेकिन जब फ्रांस को शामिल किया गया तो वो भी नॉन एनपीटी देश था. इसलिए हम कहते हैं कि एनपीटी की जगह हमारी भावना और इतिहास देखें. हम चीन के मित्र देशों के साथ इस पर सम्पर्क में हैं. ताकि वे चीन को बताए कि भारत की भूमिका हमेशा सही रहती है.''
दो दुश्मन देशों से भी हमारे अच्छे संबंध विदेश नीति पर सुषमा स्वराज ने प्रधानमंत्री मोदी तारीफ करते हुए कहा, "हमारे पीएम तो ऐसे नेता हैं जिन्होंने एक दूसरे के विरोधी देशो के साथ एक साथ संबंध बनाए हैं. सऊदी अरब और ईरान दोनों से हमारे संबंध है जबकि दोनों देश विरोधी हैं. फिलिस्तीन और इजरायल दोनों देशों से हमारे संबंध है जबकि ये दोनों देश बी एक दूसरे के विरोधी हैं.''
























