Tripura Election 2023: त्रिपुरा में टीएमसी अकेले लड़ेगी चुनाव, 7 फरवरी को रोडशो कर सकती हैं सीएम ममता बनर्जी
TMC on Tripura Election: टीएमसी ने त्रिपुरा चुनाव के लिए पूरी रूपरेखा तय कर ली है. पार्टी ने 'एकला चलो' की नीति पर अकेले ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है.

Tripura Assembly Election 2023: त्रिपुरा विधानसभा चुनाव का ऐलान हो गया है. 16 फरवरी को वोट पड़ने वाले हैं और 2 मार्च को नतीजे आएंगे. इस बार पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी भी त्रिपुरा में पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है. टीएमसी ने ऐलान किया है कि वह राज्य की सभी 60 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी.
त्रिपुरा के टीएमसी अध्यक्ष पीयूष कांति बिस्वास ने कहा, "पार्टी 'एकला चलो' की नीति पर विश्वास करती है और पश्चिम बंगाल की तरह त्रिपुरा में भी अकेले ही चुनाव लड़ेगी." त्रिपुरा के लिए पार्टी पर्यवेक्षक राजीव बनर्जी ने भी अकेले चुनाव लड़ने की बात कही है. जानकारी के मुताबिक, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने कैमैक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है.
हर सीट के लिए दो उम्मीदवार तैयार
तृणमूल नेता राजीव बनर्जी ने कहा, "बैठक में प्रत्येक सीट पर चर्चा की गई. बैठक में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी मौजूद रहें." टीएमसी इस बार पूरी ताकत के साथ त्रिपुरा में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. जानकारी के मुताबिक, पार्टी ने राज्य की सभी 60 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर लिए हैं. हर सीट के लिए दो नाम तय किए गए हैं. इनमें से जिसके जीतने की संभावना ज्यादा होगी, उसे ही टिकट दिया जाएगा.
7 फरवरी को रोडशो करेंगी ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ताबड़तोड़ रैलियां करेंगे. चुनाव प्रचार की पूरी रूपरेखा तय हो चुकी है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 7 फरवरी को त्रिपुरा में रोड शो करेंगी. इससे पहले वह त्रिपुरेश्वरी मंदिर में पूजा अर्चना करेंगी. त्रिपुरा विधानसभा चुनाव को लेकर अभिषेक बनर्जी ने शुक्रवार (20 जनवरी) की शाम एक बैठक की थी, जिसमें पार्टी की त्रिपुरा इकाई के प्रमुख पीयूष कांति बिस्वास, राज्य प्रभारी राजीब बनर्जी और सांसद सुष्मिता देव ने भाग लिया था.
इस बार कैसे हैं समीकरण?
त्रिपुरा में बीजेपी ने कुछ महीने पहले ही मुख्यमंत्री की कुर्सी से बिप्लब कुमार देब को हटाकर मणिक साहा को बिठाया है. इससे बीजेपी ने संदेश दिया कि जो काम नहीं करेगा, उसे कुर्सी से उतार दिया जाएगा. वहीं, पिछले पांच दशक के राजनीतिक इतिहास में एक-दूसरे के धुर-विरोधी रहे कांग्रेस और सीपीएम में गठबंधन हो गया है. टीएमसी के अलावा त्रिपुरा राजपरिवार के वंशज प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मन की पार्टी टिपोरा मोथा ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
पिछले चुनाव का परिणाम
त्रिपुरा की 60 सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी को 36 सीटें मिली थीं. सीपीएम को 16 और आईपीएफटी को 8 सीटें मिली थीं. वहीं, कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था. कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली थी. पिछले चुनाव में त्रिपुरा में बीजेपी को 44 प्रतिशत वोट मिले थे. बीजेपी चुनाव में अकेले बहुमत तो लाई थी लेकिन उसका वोट प्रतिशत लेफ्ट पार्टियों से मामूली अंतर से आगे था. सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट को भी 44 प्रतिशत वोट मिले थे. आईपीएफटी को 7 प्रतिशत जबकि 5 प्रतिशत वोट अन्य को मिले थे.
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