CBI के झगड़े में सरकार की हार, आलोक वर्मा 'पावरलेस' CBI डायरेक्टर के तौर पर बहाल
CBI vs CBI: मोदी सरकार ने अक्टूबर में सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था.

CBI Vs CBI: मोदी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने आज सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के अधिकार वापस लेने के केन्द्र के फैसले को रद्द कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कहा कि आलोक वर्मा कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं. कोई नई जांच शुरू नहीं करवा सकते हैं. आलोक वर्मा का कार्यकाल जनवरी में खत्म होगा.
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस के.एम. जोसेफ की पीठ ने वर्मा को पद पर बहाल करते हुए कहा कि मामला सिलेक्शन कमेटी के पास जाएगा जो इस मुद्दे पर गौर करेगी. सीजेआई गोगोई की ओर से फैसला सुनाते हुए जस्टिस कौल ने कहा कि सिलेक्शन कमेटी मंगलवार से सात दिनों के भीतर बैठक करेगी और तब तक वर्मा किसी भी तरह के नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे.
वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने फैसले के बाद कहा, ''आलोक वर्मा को बहाल कर दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति समिति (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्षी दल के नेता और चीफ जस्टिस) एक सप्ताह के भीतर उनके नीतिगत कामों पर फैसला लें.''
सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा और एनजीओ कॉमन कॉज की याचिका पर फैसला सुनाया है. आलोक वर्मा की याचिका में केंद्र के 23 अक्टूबर के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत सरकार ने वर्मा को देश की प्रमुख एजेंसी के निदेशक पद के अधिकारों से वंचित कर दिया था.
सरकार ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच भ्रष्टाचार के आरोप-प्रत्यारोपों को लेकर वर्मा और अस्थाना को छुट्टी पर भेज दिया था. सरकार ने उनकी जगह नागेश्वर राव अंतरिम चीफ नियुक्त किया था.






















