पद्मनाभस्वामी मंदिर पर शाही परिवार के अधिकार को SC ने मान्यता दी, छठे तहखाने को खोलने का फैसला नई कमेटी पर छोड़ा
मामले की सुनवाई के दौरान राज परिवार और मंदिर को सरकार के नियंत्रण में देने का विरोध कर रहे लोगों ने कोर्ट से मंदिर की व्यवस्था देखने के लिए नई प्रशासनिक कमेटी बनाने की मांग की थी.

नई दिल्ली: लोगों के लिए रहस्य बना केरल के पद्मनाभस्वामी मंदिर का छठा तहखाना खुलेगा या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने इसका फैसला वहां की प्रशासनिक कमेटी पर छोड़ दिया है. जल्द ही कोर्ट के आदेश के मुताबिक नई प्रशासनिक कमेटी का गठन होगा. आज इस मसले पर दिए फैसले में मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट ने त्रावणकोर के राजपरिवार के अधिकार को मान्यता दी है. 5 सदस्यीय नई कमेटी में भी राज परिवार की तरफ से नियुक्त एक सदस्य होगा.
क्या है मामला करोड़ों लोगों की आस्था के केंद्र तिरुअनंतपुरम के पद्मनाभस्वामी मंदिर का प्रबंधन सैकड़ों सालों से त्रावणकोर के राजपरिवार के पास रहा था. 1949 में वहां के तत्कालीन राजा ने अपनी रियासत का भारत में विलय कर लिया. विलय की शर्तों के मुताबिक राजा मंदिर के मुख्य कर्ताधर्ता बने रहे. 1991 में राजा का निधन हो गया. इसके बाद राजपरिवार के नए मुखिया ने वही भूमिका निभाई. 2007 में कुछ लोगों ने मंदिर का प्रबंधन राजपरिवार से लेकर राज्य सरकार को देने की मांग करते हुए केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी. आखिरकार 2011 में कोर्ट ने इसका आदेश दे दिया.
इसके खिलाफ राज परिवार के मौजूदा मुखिया श्री मार्तंड वर्मा सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उन्होंने दलील दी कि मंदिर को राज्य सरकार के नियंत्रण में नहीं दिया जा सकता है. हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने वालों ने चूंकि मंदिर में श्रद्धालुओं की तरफ से सैकड़ों सालों तक चढ़ाई गई बहुमूल्य चीजों के गायब होने का अंदेशा जताया था. इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के छह तहखानों में रखी संपत्ति के मूल्यांकन का आदेश दिया. पांच तहखाने खोले गए. जिनमें करीब 1 लाख करोड रुपये की बहुमूल्य चीज़ें निकलीं. राज परिवार ने वाल्ट B कहे जाने वाले छठे तहखाने को खोलने का विरोध किया. उसने कोर्ट को बताया कि सदियों से यह मान्यता है कि उस तहखाने को खोलने से भारी दुर्भाग्य हो सकता है. वहां मौजूद खजाने की रक्षा कई नाग करते हैं, जो वॉल्ट को खोलने की स्थिति में बहुत आक्रामक हो सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने तब मामले में अंतिम आदेश आने तक वॉल्ट B को खोलने पर रोक लगा दी थी.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आज दिए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने त्रावणकोर के राज परिवार को मंदिर का सेवादार माना. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज परिवार के वर्तमान मुखिया का मंदिर से जुड़े मामलों में वही दर्जा माना जाएगा, जो भारत के साथ विलय पत्र पर दस्तखत करने वाले राजा का था. यानी वह मंदिर के ट्रस्टी होंगे. अहम मसलों पर उनकी सहमति ज़रूरी होगी.
मामले की सुनवाई के दौरान राज परिवार और मंदिर को सरकार के नियंत्रण में देने का विरोध कर रहे लोगों ने कोर्ट से मंदिर की व्यवस्था देखने के लिए नई प्रशासनिक कमेटी बनाने की मांग की थी. राज परिवार ने सुझाव दिया था कि रिटायर्ड आईएएस की अध्यक्षता में कमेटी बनाई जाए. इस कमेटी में राज्य सरकार और ट्रस्टी (राज परिवार के वर्तमान मुखिया) की तरफ से नियुक्त प्रतिनिधि रखे जाएं. साथ ही, केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रतिनिधि और मंदिर के मुख्य पुजारी को भी कमेटी में जगह दी जाए. सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव को मान लिया है.
इसके अलावा कोर्ट ने 3 सदस्यीय सलाहकार समिति के भी गठन का आदेश दिया है, जो मंदिर के प्रबंधन से जुड़ी नीतियों को तय करेगी. इस कमेटी के मुखिया हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे. कमेटी के बाकी 2 सदस्य ट्रस्टी की सहमति से ही रखे जाएंगे. मंदिर की प्रशासनिक कमेटी को एक तय सीमा से ज्यादा खर्च करने या मंदिर की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले ट्रस्टी की अनुमति लेनी होगी.
छठे तहखाने पर फैसला कमेटी लेगी हालांकि, यह मामला धार्मिक महत्व का है. लेकिन देश के ज्यादातर लोगों का ध्यान इसकी तरफ मंदिर में सदियों से पड़े अकूत खजाने की वजह से गया था. 5 तहखानों में मिले एक लाख करोड़ रुपये के खजाने के बाद छठा तहखाना लोगों की भारी दिलचस्पी की वजह बना था. उस तहखाने से जुड़े रहस्य पर भी काफी चर्चा हुई थी. कोर्ट ने आज साफ कर दिया कि कल्लार B यानी छठे तहखाने को खोला जाएगा या नहीं, इसका फैसला नई प्रशासनिक कमेटी करेगी. इस वाल्ट को खोलने का ट्रस्टी यानी राज परिवार के मुखिया ने विरोध किया था. कोर्ट के फैसले में राज परिवार की जिस तरह की महत्वपूर्ण भूमिका मंदिर के प्रबंधन में रखी गई है, उसके मद्देनजर यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वाकई नई कमेटी इस वाल्ट को खोलने का फैसला लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया है की मंदिर में मिले खजाने की रक्षा और देखरेख का जिम्मा नई कमेटी के पास होगा.
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