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अमरनाथ यात्रा को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, बख्तरबंद गाड़ियों से लेकर जैमर तक लगाए गए

पूरी यात्रा को इतना सुरक्षित बनाने की कोशिश हुई है कि कोई परिंदा भी पर नहीं मार सके. 2017 में अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा पर हमला हुआ था जिसकी वजह से इस यात्रा को अति-संवेदनशील माना जा रहा है. रास्ते में जवानों की तैनाती है. जैमर भी लगाए गए हैं.

श्रीनगर: शिव भक्तों के लिए वो वक्त आ गया है जिसका वो सालभर इंतजार करते हैं. अमरनाथ यात्रा शुरू हुए आज 10 दिन हो चुके हैं और पूरे देश से शिव भक्तों का जम्मू कश्मीर आना अनवरत जारी है. कश्मीर में सुरक्षा की तमाम दिक्कतों को लेकर रोज खबरें सामने आने के बावजूद भक्त अपने आराध्य का दर्शन करने पूरे जोश में आ रहे हैं. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी तरह की चूक नहीं होने देना चाहतीं. एक भी नकारात्मक घटना पूरी यात्रा को प्रभावित कर सकती है.

यही वजह है कि पूरी यात्रा को इतना सुरक्षित बनाने की कोशिश हुई है कि कोई परिंदा भी पर न मार सके. जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन है. ऐसे में केंद्र की मोदी सरकार को पता है कि अमरनाथ यात्रा में आने वाले हर यात्री की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी उनकी है. इसलिए यात्रा का सकुशल संपन्न होना और यात्रियों की सुरक्षा के साथ-साथ मोदी सरकार की छवि के लिए भी बेहद ज़रूरी है. बता दें कि साल 2017 में अनंतनाग में अमरनाथ यात्रा पर हमला हुआ था, जिसकी वजह से यात्रा को अति-संवेदनशील माना जा रहा है और सुरक्षा के बेहद कड़े उपाय किये गए हैं.

यात्रियों का जत्था कैसे पहुंचता है

बाबा बर्फानी का दर्शन करने के लिए देशभर से यात्री आते हैं. विमान से सीधा श्रीनगर आकर यात्रा करने वाले यात्रियों को छोड़ दें तो ज़्यादातर यात्रियों की यात्रा जम्मू से शुरू होती है. यात्रा के लिए जम्मू से निकलने वाला जत्था कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना होता है.

बाबा अमरनाथ की गुफा तक जाने के दो रास्ते हैं. पहला पहलगाम से और दूसरा बालटाल से. हालांकि दोनों ही रास्ते श्रीनगर से होकर गुजरते हैं. ऐसे में जम्मू से लेकर पहलगाम हो या बालटाल, दोनों ही रास्तों पर सुरक्षा के ऐसे चाक चौबंद इंतज़ाम किये गए हैं, जहां कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता. एबीपी न्यूज़ ने श्रीनगर से पहलगाम और बालटाल दोनों ही रास्तों पर सुरक्षा की पड़ताल की. इस पड़ताल में पाया गया कि यात्रियों के जत्थे को हर स्तर पर सुरक्षित रखने के कई स्तरीय इंतजाम किये गए हैं.

रास्ते में कैसे हैं सुरक्षा के इंतेजाम

जम्मू से लेकर पहलगाम और बालटाल तक हर कदम पर हथियारबद्ध जवान मौजूद हैं. धूप हो या बारिश, ये जवान पूरी मुस्तैदी से अपने काम पर लगे रहते हैं. सड़क पर जवानों की तैनाती के अलावा जत्थे के काफ़िले में बख़्तरबंद गाड़ियों के अलावा जैमर तक लगाए गए हैं.

श्रीनगर से लेकर पहलगाम तक का रास्ता क़रीब 100 किलोमीटर का है. इस रास्ते में पुलवामा ज़िले का पम्पोर और अनंतनाग जैसा ज़िला आता है, जो सुरक्षा के लिहाज़ से बेहद संवेदनशील हैं. इन जगहों पर सूनी सड़क हो या बाज़ार, किसी भी जगह को ख़ाली नहीं छोड़ा गया है. हर जगह जवानों की तैनाती है.

यात्री बेसकैंप में भी कड़े इंतजाम 

श्रीनगर के बाद पहलगाम में भी सुरक्षा के अभेद्य इंतज़ाम किये गए हैं. कैम्प के बाहर सुरक्षा जांच के लिए जहां चेक प्वाइंट बनाया गया है वहीं अंदर बैरक बनाकर जवानों को तैनात किया गया है. साथ ही कैंप में सीसीटीवी भी लगाया गया है ताक़ि हर किसी पर नज़र रखी जा सके. जवान 24 घंटे पूरे रास्ते की निगरानी कर रहे हैं.

कैम्प के अंदर कोलकाता से आये कुछ लोगों ने कहा कि जिस तरह के सुरक्षा के इंतज़ाम रास्ते में और कैम्प में है, इसे देखकर वो पूरी तरह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं. यात्रियों ने कहा कि हर जगह जवानों की तैनाती है और भोले बाबा की कृपा से उन्हें किसी तरह की दिक्कत भी नहीं हो रही.

स्थानीय व्यापारी हैं थोड़े मायूस

अमरनाथ यात्रा चल रही है लेकिन कश्मीर के व्यापारी थोड़े मायूस हैं. अनंतनाग में अब्दुल रशीद नाम के ढाबा चलाने वाले एक व्यापारी ने कहा कि पहले यात्रियों को कहीं भी रुकने की अनुमति थी. ऐसे में तमाम लोग उनके यहां खाने पीने रुकते थे लेकिन इस बार जत्थे को कॉन्वॉय बनाकर ले जाया जा रहा है. इससे यात्रियों को अपनी मर्ज़ी से रुकने की अनुमति नहीं है. इसलिए हर साल यात्रा के दौरान उन्हें जो कमाई होती थी, वो नहीं हो पा रही.

एबीपी न्यूज़ ने अब्दुल रशीद से जब इसका कारण पूछा तो उनका मानना है कि स्थानीय स्तर की राजनीति ने माहौल ख़राब करने का काम किया है. इसकी वजह से 2017 में जो हमला यात्रा पर हुआ, उसने यात्रा के तौर तरीक़े को पूरी तरह बदलकर रख दिया.

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