लॉकडाउन में मज़दूरों की आमदनी पर SC ने मांगा जवाब, सरकार ने कहा- PIL की दुकान चला रहे हैं कुछ लोग
मास्क और सैनेटाइजर की कालाबाजारी पर सरकार को कार्रवाई के निर्देश. वहीं, एक याचिका में मजदूरों को होटल और रिसोर्ट में ठहराने की मांग की गई.

नई दिल्ली: मज़दूरों और रेहड़ी-पटरी के ज़रिए स्वरोजगार करने वालों को लॉक डाउन की अवधि में उनका वेतन या न्यूनतम आमदनी मुहैया करवाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है. याचिका में कहा गया है कि इन लोगों के पास अभी आमदनी का कोई ज़रिया नहीं. इसलिए सरकार उन्हें न्यूनतम आय दे. मामले की अगली सुनवाई सोमवार, 7 अप्रैल को होगी.
सरकार का कड़ा विरोध
वीडियों कांफ्रेंसिंग के ज़रिए हुई इस सुनवाई में याचिकाकर्ता हर्ष मंदर के लिए वकील प्रशांत भूषण और स्वामी अग्निवेश के लिए कॉलिन गोंजाल्विस पेश हुए. केंद्र की तरफ से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कहा, कुछ लोग एसी कमरों में बैठ कर PIL की दुकान चलाते हैं. जिन्हें सही मायनों में समाजसेवा करनी है वो लोगों के बीच जाकर मदद कर रहे हैं. सरकार खुद मज़दूरों की स्थिति पर चिंतित है. ज़रूरी कदम पर विचार कर रही है. जिन लोगों को जमीनी हकीकत से लेना-देना नहीं है. वो घर बैठे PIL दायर कर सरकार की मुश्किलें बढाने में लगे हैं. इनकी दुकान बंद की जानी चाहिए. कोर्ट याचिका पर विचार न करे.
जजों ने मांगा जवाब
लेकिन घर से सुनवाई कर रहे जस्टिस नागेश्वर राव और दीपक गुप्ता ने कहा, हमें भी प्रवासी मज़दूरों की स्थिति की चिंता है. ये उचित रहेगा कि आप उनके लिए उठाए जा रहे कदमों पर जवाब दाखिल करें. सॉलिसीटर जनरल ने इससे सहमति जताते हुए कहा को वो विस्तृत हलफनामा दाखिल करेंगे.
‘मास्क-सैनेटाइजर की कालाबाज़ारी पर भी कार्रवाई हो’
मास्क और सैनेटाइजर की कालाबाज़ारी के खिलाफ याचिका पर भी आज कोर्ट ने सुनवाई की. याचिका में कहा गया है कि सरकार ने सैनेटाइजर और मास्क की कीमत तय कर दी हैं. लेकिन उस कीमत पर उपलब्धता को लेकर कदम नहीं उठाए. लोग मुंह मांगी कीमत पर सैनेटाइजर और मास्क खरीदने को मजबूर हैं. इस मसले पर आदेश देते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकार इन वस्तुओं की अधिकतम कीमत तय करने वाली अधिसूचना का प्रचार-प्रसार करे. साथ ही ज़्यादा कीमत पर बेच कर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया अधिक कीमत पर बेच रहे लोगों की शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध करवाया जाएगा. कोर्ट ने इससे सहमति जताई.
महंगी कोरोना जांच पर मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आज प्राइवेट लैब को 4,500 रुपये में कोरोना जांच की इजाज़त देने वाली अधिसूचना पर भी संज्ञान लिया. कोर्ट ने इसके खिलाफ दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है. मामले में याचिका दाखिल करने वाले वकील शशांक देव सुधि की दलील थी, ‘लॉक डाउन के दौरान लोगों के सामने आर्थिक संकट है. महंगी जांच से लोग बचेंगे. इससे बीमारी फैल सकती है. इस वक्त ये सरकार की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है कि बीमारी न फैले. इसलिए, जांच मुफ्त होनी चाहिए.’
मज़दूरों को होटल में ठहराने की मांग खारिज
कोरोना की इर्दगिर्द रही आज की सुनवाई में कुछ अजीब सी मांगें भी कोर्ट में रखी गईं. एक याचिका में पलायन कर रहे मज़दूरों को ठहराने के लिए होटल, रिसॉर्ट के इस्तेमाल की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि लोगों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए उन्हें ठीक से रखा जाना जरूरी है. छोटी सरकारी इमारतों में लोग भीड़ में रह रहे हैं. ये नुकसानदेह हो सकता है.
इसका जवाब देते हुए सॉलिसीटर जनरल ने कहा, ‘लोगों को सरकारी इमारतों में उचित मेडिकल सुविधा के साथ ठहराया गया है. राज्य सरकारें ध्यान रख रही हैं.’ जजों को भी याचिका विचार के लायक नहीं लगी. बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस राव ने कहा, ‘लाखों लोग, लाखों आइडिया दे रहे हैं. हम सबको नहीं सुन सकते. बेहतर हो सरकार को उसका काम करने दिया जाए.’























