असम: एनआरसी लिस्ट में नाम नहीं होने पर 74 साल के रिटायर्ड शिक्षक ने खुदकुशी की
पुलिस ने बताया कि सुसाइड नोट में दास ने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और पांच लोगों के नाम बताए हैं जिनसे उन्होंने 1200 रुपये लिए थे. दास ने अपने परिवार को उन्हें रुपये लौटाने के लिए कहा है.

नई दिल्ली: असम के मंगलदोई में NRC की लिस्ट में नाम नहीं आने की बाद रिटायर्ड शिक्षक ने खुदकुशी कर ली. रिटायर्ड शिक्षक निरोद कुमार दास की मौत के साथ 30 जुलाई को NRC की नई लिस्ट आने के बाद असम में आत्महत्या की ये तीसरी घटना है.
74 साल के निरोद कुमार दास शिक्षक की नौकरी छोड़ने के बाद वकालत की प्रैक्टिस करते थे. परिवार का कहना है कि 34 साल तक शिक्षक की नौकरी करने के बाद भी NRC की लिस्ट में नाम न देखकर निरोद कुमार दास काफी आहत थे.
पुलिस अधीक्षक श्रीजीत टी ने बताया कि निरोद कुमार दास अपने कमरे में फंदे से लटके पाए. वह रविवार को सुबह की सैर करने के बाद लौटे और आत्महत्या कर ली. उनके परिवार के सदस्यों ने उनका शव देखा. मंगलदोई जिला असम की राजधानी गुवाहाटी से करीब 100 किलोमीटर दूर है.
उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि सुसाइड नोट में 74 वर्षीय दास ने कहा कि वह एनआरसी प्रक्रिया के बाद एक विदेशी के तौर पर पहचाने जाने के अपमान से बचने के लिए यह कदम उठा रहे हैं. परिवार और पुलिस ने बताया कि सुसाइड नोट में दास ने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और पांच लोगों के नाम बताए हैं जिनसे उन्होंने 1200 रुपये लिए थे. दास ने अपने परिवार को उन्हें रुपये लौटाने के लिए कहा है.
इस बीच असम में 40 संगठनों ने नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करने के लिए आज बंद भी बुलाया है. सोमवार को बंद के दौरान बाजार, दुकानें, शैक्षिक संस्थान, निजी कार्यालय और बैंक बंद रहे वहीं सड़कों से वाहन नदारद रहे.
क्या कहता है एनआरसी का फाइनल ड्राफ्ट? असम में सोमवार को नेशनल रजिस्टर फॉर सिटीजन की दूसरी ड्राफ्ट लिस्ट का प्रकाशन कर दिया गया. जिसके मुताबिक कुल तीन करोड़ 29 लाख आवेदन में से दो करोड़ नवासी लाख लोगों को नागरिकता के योग्य पाया गया है, वहीं करीब चालीस लाख लोगों के नाम इससे बाहर रखे गए हैं. NRC का पहला मसौदा 1 जनवरी को जारी किया गया था, जिसमें 1.9 करोड़ लोगों के नाम थे. दूसरे ड्राफ्ट में पहली लिस्ट से भी काफी नाम हटाए गए हैं.
नए ड्राफ्ट में असम में बसे सभी भारतीय नागरिकों के नाम पते और फोटो हैं. इस ड्राफ्ट से असम में अवैध रूप से रह रहे लोगों को बारे में जानकारी मिल सकेगी. असम के असली नागरिकों की पहचान के लिए 24 मार्च 1971 की समय सीमा मानी गई है यानी इससे पहले से रहने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है.
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