सबरीमाला मंदिर में महिलाओं की एंट्री का चौतरफा स्वागत, मंदिर प्रशासन नाराज
Sabarimala temple: केरल के सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अय्यप्पा स्वामी मंदिर के पुजारी कंडारारू राजीवारू ने कहा है कि सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ‘‘निराशजनक’’ है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया है. अब सभी आयु वर्ग की महिलाएं मंदिर में पूजा के लिए जा सकती हैं. इससे पहले 10-50 साल तक की उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने की अनुमति नहीं थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर प्रशासन ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी.
मंदिर का पुजारी नाराज सबरीमाला के प्रमुख पुजारी कंडारारू राजीवारू ने कहा कि सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश को अनुमति देने वाला सुप्रीम कोर्ट का फैसला ‘‘निराशजनक’’ है लेकिन मंदिर बोर्ड इसे स्वीकार करेगा.
त्रावणकोर देवोस्वोम बोर्ड के अध्यक्ष ए पद्मकुमार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई के बारे में निर्णय लिया जाएगा.
सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हर उम्र की महिलाओं के लिए खोले दरवाजे
अयप्पा धर्म सेना के अध्यक्ष राहुल ईश्वर ने कहा कि वे पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे. ईश्वर सबरीमाला के पुजारी दिवंगत कंडारारू महेश्वरारू के पोते हैं. महेश्वरारू का इस साल मई में निधन हो गया था.
स्वामी ने फैसले का किया स्वागत बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है. स्वामी ने ट्वीट में लिखा, ''मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला में पूजा करने में लैंगिक समनता को माना है. मैं इसी की वकालत कर रहा था.''
I am happy that SC has decided that gender equality in worship is to be followed in Sabarimalai. This what I had been advocating
— Subramanian Swamy (@Swamy39) September 28, 2018
वहीं कांग्रेस पार्टी ने ट्वीट कर कहा कि हम सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का स्वागत करते हैं.
तृप्ति देसाई बोलीं- मानसिकता बदलने की जरूरतWe welcome the historic Supreme Court judgement allowing entry of women of all ages into the #SabarimalaTemple #SabarimalaVerdict
— Congress (@INCIndia) September 28, 2018
मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश के लिए आवाज उठाने वाली तृप्ति देसाई ने भी फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा, ''आज संविधान की जीत हुई है. महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं मिलना हो या सबरीमाला मंदिर का मामला हो यह एक खराब मानसिकता है. लेकिन कोर्ट ने फैसला दिया है यह बड़ी जीत है. मानसिकता बदलने की जरूरत है. यह समानता के अधिकार से जुड़ा मामला है.''
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने जस्टिस एम.एम. खानविलकर की ओर से फैसला पढ़ते हुए कहा, "शारीरिक संरचना के आधार पर महिलाओं के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता है." मिश्रा ने कहा, "सभी भक्त बराबर हैं और लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं हो सकता."
मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की इजाजत क्यों नहीं थी? सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश करने पर रोक लगी थी क्योंकि इस उम्र में महिलाओं को पीरियड्स आते हैं. हिंदू धर्म के एक वर्ग का मानना है कि पीरियड्स के दौरान महिलाएं अपवित्र होती हैं. इसलिए उन्हें मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जा सकती है. मंदिर की इस परंपरा के खिलाफ एक वकील ने 2006 में याचिका दाखिल की थी.






















