कौन हैं अशोक गहलोत: राजस्थान के मुख्यमंत्री के तौर पर ली शपथ, जादूगर के बेटे हैं
अशोक गहलोत ने राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली है. वहीं सचिन पायलट को डेप्युटी सीएम के पद मिला है. अशोक गहलोत ने इस बार सरदारपुरा सीट से जीत दर्ज की है.

जयपुर: अशोक गहलोत ने राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली है. वहीं सचिन पायलट को डेप्युटी सीएम के पद मिला है. अशोक गहलोत ने इस बार सरदारपुरा सीट से जीत दर्ज की है. उनके सामने बीजेपी ने शंभूसिंह खेतासर को चुनावी मैदान में उतारा था. सरदारपुरा में ही उनका पुश्तैनी घर भी है. यह विधानसभा क्षेत्र जोधपुर में आता है. यहीं के पुश्तैनी घर में साल 1951 में उनका जन्म भी हुआ. यहीं के जैन वर्धमान स्कूल में उन्होंने पांचवीं तक पढ़ाई की थी. 1962 में उन्होंने छठी में सुमेर स्कूल में दाखिला लिया.
कॉलेज के समय से ही वह छात्र राजनीति में रहे. पहले वह डॉक्टर बनना चाहते थे लेकिन किस्मत राजनीति में ले आई. डॉक्टर बनने की चाह लिए उन्होंने जोधपुर विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. उन्हें कामयाबी नहीं मिली और केवल बीएससी की डिग्री से संतोष करना पड़ा. उनकी कॉलेज की जिंदगी और छात्र राजनीति साथ-साथ चलती रही.
अशोक गहलोत की कुल संपत्ति
अशोक गहलोत के कुल संपत्ति की जानकारी कीबात करें तो चुनाव आयोग को दी गई जानकारी के मुताबिक उनके पास कुल 65370312 रुपये यानी कुल 6.5 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति है.
कितने पढ़े लिखे हैं अशोक गहलोत
अशोक गहलोत ने विज्ञान औक कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है. अर्थशात्र में स्नाकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है.
अशोक गहलोत के पिता थे जादूगर
अशोक गहलोत के पिता बड़े जादूगर थे और अशोक गहलोत ने भी पिता से जादू सीखा था. वह उस समय दिल्ली में जब इंद्रिरा गांधी और फिर राहुल गांधी से मिलने आया करते थे तो कभी-कभी लंबा इंतजार करना पड़ता था. तब प्रियंका और राहुल गांधी छोटे हुआ करते थे. गहलोत दोनों को ताश के पत्तों के साथ जादू दिखाते थे. गहलोत के करीबी बताते हैं कि जादू दोनों को इतना पसंद आता था कि गहलोत को देखते ही राहुल और प्रियंका जादू दिखाने की फरमाइश कर बैठते थे. अशोक गहलोत का नया नाम पड़ा.जादूगर अंकल. बाद में अशोक गहलोत ने बड़े बड़े कांग्रेस नेताओं को पछाड़ते हुए राजस्थान की राजनीति में अपना नाम पैदा किया और दो दो बार मुख्यमंत्री बने. उनका जादू सर चढ़कर बोला.
कैसा रहा अशोक गहलोत का राजनीतिक सफर
वह 1973 से लेकर 1979 तक राजस्थान NSUI के अध्यक्ष रहे. जब देश में आपालकाल के बाद कोई भी नेता कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने को तैयार नहीं था. उस वक्त अशोक गहलोत ने चुनाव लड़ने का ऑफर स्वीकार किया. 1980 में वह पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए. गहलोत जोधपुर संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित हुए. उस दौर में वह लोकसभा के लिए चुने गए सबसे युवा सांसद थे.
1984 में गहलोत राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सबसे युवा अध्यक्ष बना दिए गए. राजस्थान में गहलोत ने पार्टी में जान फूंकने के लिए जमीनी स्तर पर काफी काम किया.अशोक गहलोत पहली बार साल 1998 में राजस्थान के मुख्यमंत्री और फिर उसके बाद 2008 में भी मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला. उन्होंने जोधपुर संसदीय क्षेत्र का 8वीं लोकसभा (1984-1989), 10वीं लोकसभा (1991-96), 11वीं लोकसभा (1996-98) तथा 12वीं लोकसभा (1998-1999) में प्रतिनिधित्व किया.
इंदिरा गांधी के बाद गहलोत राजीव गांधी के भी काफी करीब थे. हालांकि राहुल गांधी के समय में सीपी जोशी को तवज्जो दिए जाने के बाद उनके मन में कुछ नाराजगी जरूर आई. लेकिन इसके बाद भी वह पार्टी को आगे बढ़ाने का काम करते रहे.
तीसरी बार बने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं. इसके अलावा वह राज्य में तीसरी बार सीएम बनने वाले चौथे नेता हैं. गहलोत से पहले भैंरोसिंह शेखावत और हरिदेव जोशी भी तीन-तीन बार सीएम बने थे. हालांकि, मोहन लाल सुखाड़िया सबसे अधिक चार बार इस पद पर रहे हैं. इससे पहले गहलोत साल 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने थे. तब उनका कार्यकाल 2003 तक रहा था. फिर वह साल 2008 से 2013 तक दूसरा कार्यकाल पूरा करने में सफल रहे थे. गहलोत से पहले हरिदेव जोशी 1973-77, 1985-88 और साल 1989-90 तक मुख्यमंत्री रहे जबकि, भैरोंसिंह शेखावत 1977-80, 1990-92 और 1993-98 के कार्यकाल में तीन बार मुख्यमंत्री रहे.
Source: IOCL

























