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राजस्थान: सीएम अशोक गहलोत ने कहा- कामयाब नहीं हुए बीजेपी के मंसूबे, खुले खेल में खा गई मात

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि बीजेपी के मंसूबे पूरे नहीं हुए, उन्होंने कर्नाटक, मध्यप्रदेश में जो खेल खेला था. राजस्थान में भी वो लोग वही करना चाहते थे. खुला खेल था पर वो लोग मात खा गए.

नई दिल्ली: राजस्थान कांग्रेस में जारी सियासी उठापटक के बीच अशोक गहलोत ने बीजेपी पर निशाना साधा है. गहलोत ने कहा कि बीजेपी ने कर्नाटक और मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान में खुला खेल खेला लेकिन मात खा गई. गहलोत पहले भी कह चुके हैं कि बीजेपी सरकार को गिराने की साजिश रच रही है.

गहलोत ने ट्वीट कर कहा, ''सरकार को गुड गवर्नेंस देनी है, जो हमने वादे किये हैं जनता से उनको निभाना है. कोविड महामारी के समय में हम लोगों ने जान लगा दी है, ऐसे वक्त में सरकार गिराने की किसी की हिम्मत होना आप सोचिए दुर्भाग्यपूर्ण है कि नहीं है?''

अशोक गहलोत ने कहा- सरकार स्थिर है, स्थिर रहेगी और पांच साल चलेगी राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बीजेपी नेता राज्य में उनकी निर्वाचित सरकार को गिराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सरकार स्थिर है, स्थिर रहेगी और पांच साल चलेगी. गहलोत ने यह भी कहा कि बीजेपी के स्थानीय नेता अपने केंद्रीय नेतृत्व के इशारे पर राजस्थान में सरकार को अस्थिर करने का षडयंत्र रच रहे हैं.

गहलोत ने कहा था, ‘‘कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ने के लिए मैंने सबको साथ लेकर चलने की कोशिश की. लेकिन बीजेपी के नेताओं ने मानवता और इंसानियत की सारी हदें तोड़ दी हैं. एक तरफ तो हम जीवन और आजीविका बचाने में लगे हैं तो दूसरी ओर ये लोग सरकार गिराने में लगे हैं.’’

हमारा कोरोना पर और बीजेपी का सरकार गिराने पर ध्यान केंद्रित- गहलोत

अशोक गहलोत ने कहा,‘‘हम लोग जहां महामारी से लड़ाई पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं वहीं ये (बीजेपी नेता) लोग सरकार कैसे गिरे, किस प्रकार से तोड़ फोड़ करें, खरीद फरोख्त करें इन तमाम काम में लगे हैं.’’ गहलोत ने कहा,‘‘राजस्थान में सरकार स्थिर है, स्थिर रहेगी, पांच साल चलेगी और अगला चुनाव जीतने की तैयारी में हम लग गए हैं.’’ गहलोत ने अपने संबोधन में बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का नाम लिया.

सचिन पायलट समेत विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी राज्य कैबिनेट से हटाया गया

अशोक गहलोत सरकार के खिलाफ बगावती रुख अपनाने वाले पायलट और उनके साथी नेताओं के खिलाफ कांग्रेस ने कड़ी कार्रवाई की. पायलट को उपमुख्यमंत्री पद के साथ-साथ पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया.

इसके साथ ही पार्टी ने पायलट खेमे में गए सरकार के दो मंत्रियों विश्वेंद्र सिंह एवं रमेश मीणा को भी उनके पदों से तत्काल हटा दिया. ये फैसला पार्टी विधायक दल की बैठक में लिया गया. सचिन पायलट और उनके समर्थक लगातार दूसरे दिन विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे थे.

टोंक में लक्ष्मण सिंह गाता सहित 59 पदाधिकारियों ने दिया इस्तीफा इस बीच, पायलट के निर्वाचन क्षेत्र टोंक में लक्ष्मण सिंह गाता सहित 59 पदाधिकारियों ने भी अपने नेता पर कार्रवाई के खिलाफ इस्तीफा दे दिया है. पाली जिला कांग्रेस अध्यक्ष चुन्नीलाल चादवास ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

गहलोत ने कहा- हाईकमान को यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा कि हाईकमान को यह फैसला लेने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि लंबे समय से बीजेपी साजिश रच रही थी और खरीद-फरोख्त का सहारा ले रही थी. हमें पता था कि यह एक बड़ी साजिश थी. हमारे कुछ दोस्त इसकी वजह से भटक गए और दिल्ली चले गए. अशोक गहलोत ने आगे कहा कि उनका रुख ऐसा था जैसे आ बैल मुझे मार. कोई भी इस फैसले से खुश नहीं है.

सचिन पायलट की प्रतिक्रिया

सचिन पायलट ने उपमुख्यमंत्री के पद से हटाए जाने पर पहली प्रतिक्रिया दी. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ''सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं.'' साथ ही सचिन पायलट ने अपने ट्विटर का बायो भी बदल दिया है. सचिन पायलट ने बायो में अब टोंक से विधायक, पूर्व केंद्रीय आईटी मंत्री लिखा है.

सचिन पायलट के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई क्यों? सचिन पायलट को राजस्थान में कांग्रेस का बहुत बड़ा चेहरा माना जाता है. पिछले विधानसभा चुनाव में सचिन पायलट ने बीजेपी लहर के बीच कांग्रेस को सत्ता दिलवाई. हालांकि समय समय पर सचिन पायलट अपने बयानों से अपनी ही सरकार को मुश्किल में डालते रहे. सचिन पायलट इशारों में अशोक गहलोत की ओर से नजरअंदाज किए जाने की बात भी कहते रहे.

सचिन पायलट के लिए ताबूत में कील एसओजी का देशद्रोह की धारा में पूछताछ के लिए दिया गया नोटिस साबित हुआ. सचिन पायलट इस नोटिस के बाद सचिन पायलट सीधे दिल्ली में आला कमान से मिलने पहंचे. यहां उन्होंने आलाकमान से बात करने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी. इसी बीच पायलट की मध्यप्रदेश के बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात हुई और कयास लगाए जाने लगे कि पायलट बीजेपी के जहाज में सवार हो सकते हैं. हालांकि सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों की बात करते रहे लेकिन बीजेपी में जाने से इनकार करते रहे.

सचिन पायलट की नाराजगी भांपकर कांग्रेस की ओर से दिल्ली से तीन बड़े नेताओं रणदीप सिंह सुरजेवाला, अजय माकन और अविनाश पांडे को जयपुर भेजा गया. इसके साथ ही खबर आई कि खुद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी सचिन पायलट को मनाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं.

कांग्रेस की ओर से कई कोशिशों के बाद भी सचिन पायलट नहीं माने. जयपुर में अशोक गहलोत ने विधायक दल की बाठक बुलाई थी. सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों के इंतजार में यह बैठक काफी देरी से शुरू हुई. आखिरकार जब इस बैठक में सचिन पायलट नहीं पहुंचे तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव पास कर दिया गया. जिसकी जानकारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने दी.

गहलोत ने दिखाई ताकत, 100 विधायकों के समर्थन का दावा राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के यह दावा करने के एक दिन बाद कि राज्य में अशोक गहलोत सरकार कुछ विधायकों के उनके साथ जाने के बाद अल्पमत सरकार में बदल गई है, मुख्यमंत्री गहलोत ने सोमवार को विधायक दल की बैठक में ताकत दिखाई और मीडिया के सामने लगभग 100 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया. गहलोत ने मीडिया के सामने सभी विधायकों की परेड करवाई.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया को स्पष्ट रूप से कहा, "कांग्रेस पार्टी में व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा के लिए कोई गुंजाइश नहीं है."

हालांकि, उन्होंने कहा कि पार्टी ने पायलट और उनके विधायकों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे हैं. सुरजेवाला ने कहा, "अगर परिवार में कोई नाराज होता है, तो परिवार का मुखिया इस मुद्दे को हल करने की कोशिश करता है. तो, मैं यहां हमारी नेता सोनिया गांधी की ओर से यह सुनिश्चित करने के लिए हूं कि हमारी पार्टी एकजुट रहे."

कांग्रेस के विधायक मुख्यमंत्री के आवास पर जुटे और विश्वास जताया कि उनकी सरकार सुरक्षित हाथों में है. मीडिया के सामने नारे लगाए गए और विक्ट्री साइन दिखाए गए. गहलोत के साथ अन्य मंत्री भी एकजुट होकर जोर से बोले, "हम साथ हैं."

राजस्थान में कांग्रेस ने जनता का विशवास खो दिया है- बीजेपी

कांग्रेस के भीतर चल रहे इस सत्ता संघर्ष पर बीजेपी की राजस्थान इकाई ने कहा है कि यहां की कांग्रेस सरकार की अब विदाई हो जानी चाहिए क्योंकि इसने जनता का विश्वास खो दिया है. प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनिया से जयपुर में जब उन अटकलों के बारे में पूछा गया कि क्या बीजेपी पायलट खेमे का बाहर से समर्थन कर सकती है तो उन्होंने कहा कि ‘‘हमारे लिए सभी विकल्प खुले हैं.’’

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस बारे में कोई भी निर्णय उस समय की परिस्थिति के अनुरूप और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के आधार पर लिया जाएगा.

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