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Raghuram Rajan: नौकरी के संकट से ध्यान भटकाने के लिए अल्पसंख्यकों को टारगेट करना खतरनाक- रघुराम राजन ने जताई चिंता

Raghuram Rajan On Job Crisis: रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने चिंता जताई है और कहा है कि नौकरी की समस्या से ध्यान भटकाने के लिए अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा है, जो खतरनाक है

Raghuram Rajan Warns: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन (Raghuram Rajan)ने शनिवार को नौकरी के संकट (Unemployment In India) को लेकर चिंता जताई और कहा कि इस संकट से ध्यान भटकाने के लिए अल्पसंख्यकों (Minorities) को टारगेट करना खतरनाक हो सकता है. उन्होंने बहुसंख्यकवाद (Majoritarianism) के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि श्रीलंका (Sri Lanka Crisis) इस बात का उदाहरण है कि क्या होता है, जब किसी देश के नेता नौकरी के संकट से ध्यान भटकाने के लिए अल्पसंख्यकों को लक्षित करते हैं.

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि अल्पसंख्यकों को ‘‘सेकेंड सिटीजन’’ में तब्दील करने का कोई भी प्रयास देश के लिए खतरनाक साबित होगा और ये देश को विभाजित करेगा. इसके साथ ही चेतावनी के लहजे में उन्होंने कहा कि देश शिक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं कर रहा है, जिसके ठीक परिणाम नहीं होंगे.

देश के विकास के लिए उदार लोकतंत्र जरूरी

राजन ने कहा, ‘‘...इस देश में उदार लोकतंत्र के साथ क्या हो रहा है और क्या यह वास्तव में भारतीय विकास के लिए आवश्यक है?..ये देखना चाहिए और हमें इसे  मजबूत करना चाहिए. आज भारत में कुछ वर्गों में यह भावना घर करती जा रही है कि उदार लोकतंत्र से भारत पिछड़ सकता है. लेकिन ‘‘मेरा मानना ​​है कि यह तर्क पूरी तरह से गलत है कि उदार लोकतंत्र देश के विकास के पुराने मॉडल पर आधारित है, जो वस्तुओं और पूंजी पर जोर देता है, न कि लोगों और विचारों पर.’’ उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के मामले में देश का खराब प्रदर्शन ‘‘उस रास्ते को इंगित करता है, जिस पर हमें पुनर्विचार करने की जरूरत है.’’

आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा, ‘‘हमारा भविष्य हमारे उदार लोकतंत्र और उसके संस्थानों को मजबूत करने में है, न कि उन्हें कमजोर करने में और यह वास्तव में हमारे विकास के लिए आवश्यक है.’’ ....भारत के लिए मजबूत, यहां तक ​​कि निरंकुश नेतृत्व भी चलेगा, जिसमें कुछ नियंत्रण और संतुलन हो और ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हम इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.’’

अल्पसंख्यकों को सेकेंड सिटीजन बनाना बड़ी भूल होगी

राजन ने कहा कि ’’ अल्पसंख्यकों के एक बड़े वर्ग को दूसरी श्रेणी का नागरिक बनाने का कोई भी प्रयास देश को विभाजित करेगा और आंतरिक असंतोष पैदा करेगा और  इससे देश में विदेशी दखल की आशंका भी बनेगी.’’ 

श्रीलंका में जारी संकट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस बात का नतीजा साफ दिख रहा है कि, जब देश के नेता रोजगार उत्पन्न करने में असमर्थता से ध्यान हटाने की कोशिश में अल्पसंख्यकों पर निशाना साधते रहे.

भारत की धीमी वृद्धि दर का कारण है-नौकरी का संकट 

राजन ने दावा किया कि भारत की धीमी वृद्धि दर सिर्फ कोविड​​​​-19 महामारी के कारण नहीं है, बल्कि अर्थव्यस्था में नरमी पहले से ही थी. उन्होंने कहा कि ‘‘वास्तव में लगभग एक दशक के लिए, शायद वैश्विक वित्तीय संकट की शुरुआत के बाद से, हम उतना अच्छा नहीं कर रहे हैं, जितना हम कर सकते थे. इस खराब प्रदर्शन का प्रमुख कारण हमारे युवाओं के लिए अच्छी नौकरियां पैदा करने में असमर्थता है.’’

महिला श्रम शक्ति में पिछड़ा है भारत

केंद्र की अग्निवीर सैन्य भर्ती योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन पर राजन ने कहा कि इससे पता चलता है कि युवा नौकरियों के लिए कितने आकांक्षी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘अभी कुछ समय पहले आपने रेलवे की 35,000 नौकरियों के लिए 1.25 करोड़ आवेदकों को देखा है. यह विशेष रूप से चिंताजनक है, जब भारत में नौकरियों की कमी है, जबकि इतनी सारी महिलाएं अपने घरों से बाहर काम नहीं कर रही हैं. भारत की महिला श्रम शक्ति भागीदारी 2019 में 20.3 प्रतिशत है जो जी-20 में सबसे कम है.’’

आत्मनिर्भर भारत एक अच्छी सोच है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार की 'विकास की दृष्टि' के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह 'आत्मनिर्भर' शब्द के इर्द-गिर्द केंद्रित है. उन्होंने कहा, ‘‘अब, यह बेहतर सम्पर्क, बेहतर रसद, बेहतर सड़कों पर जोर देती है और इसके लिए अधिक संसाधन समर्पित करती है, किसी तरह से यह (आत्मनिर्भर दृष्टि) पिछले दशकों के सुधार की निरंतरता प्रतीत होती है और यह अच्छा है.’’

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