Xप्लेन: पिटबुल अटैक में मालिक को मिले कितनी सजा, कुत्तों से कब मिलेगी निजात?
Patiala Pitbull Attack: पटियाला में डॉग बाइट एक हादसा नहीं, बड़ी चेतावनी है. 75 सेकंड में 26 बार काटने वाला पिटबुल जंगली जानवर नहीं, बल्कि पालतू कुत्ता था. क्या मालिक को 6 महीने की कैद काफी होगा.

पंजाब के पटियाला शहर का घूमन नगर इलाका. प्राइवेट बैंक मैनेजर अंकित सभरवाल और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर पत्नी शेफाली सभरवाल एक प्रॉपर्टी डीलर के साथ किराए का घर देखने पहुंचे. घर के बाहर खड़े होकर उन्होंने गेट की घंटी दबाई. कुछ ही पलों में गेट खुला और एक पिटबुल ने झपट्टा मारा. कुत्ता सीधा शेफाली पर टूट पड़ा और अंकित को भी नहीं छोड़ा. पिटबुल ने महज 75 सेकंड में 26 बार काटा. शिफाली का हाथ, जांघ, कमर और अंकित की पीठ बुरी तरह जख्मी हो गई. वीडियो देखकर लोगों का गुस्सा सिर्फ कुत्ते पर नहीं, बल्कि मालिक पर भी है. तो अब सजा क्या मिलेगी और मामला कितना बड़ा...
पिटबुल ने पहले महिला पर ही क्यों हमला किया?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसकी तीन बड़ी वजहें हैं:
- सबसे आगे वाला पहला निशाना: अमेरिकन कॉलेज ऑफ वेटरनरी बिहेवियरिस्ट्स की डॉ. जूलिया अलब्राइट के मुताबिक, कुत्ते अक्सर गेट या दरवाजे के सबसे करीब खड़े व्यक्ति को अपने इलाके में घुसपैठिया समझ लेते हैं. CCTV में साफ दिख रहा है कि जब गेट खुला, तो शिफाली सबसे आगे थीं.
- डर और बॉडी लैंग्वेज का खेल: कुत्ते इंसानों की भावनाओं को बहुत तेजी से भांप लेते हैं. इंस्टिट्यूट फॉर एनवायरनमेंटल रिसर्च की एक स्टडी के मुताबिक, कुत्ते शांत और भरोसेमंद हरकतों को अलग तरह से देखते हैं और अचानक या डरावनी हरकतों पर ज्यादा तेज रिएक्ट सकते हैं. वीडियो में शिफाली कुत्ते को देखकर पीछे हट रही थीं और कुत्तों की दुनिया में पीछे हटना या सीधी आंखों में देखना चुनौती माना जा सकता है.
- तेज आवाज पर उत्तेजना: एक्सपर्ट्स कहते हैं कि तेज या पतली आवाज में चीखने पर कुत्ते और भी आक्रामक हो सकते हैं.
'टेरिटोरियल बाइट' और 'रिडायरेक्टेड एग्रेशन'
जब कुत्ते ने पहली बार शिफाली पर हमला किया, तो एक्सपर्ट्स इसे 'टेरिटोरियल बाइट' कहेंगे यानी कुत्ता अपने इलाके की रक्षा कर रहा था. जब अंकित ने बीच में आकर पत्नी को बचाने की कोशिश की और कुत्ते ने उन्हें भी काटा, तो इसे 'रिडायरेक्टेड एग्रेशन' कहते हैं.
अमेरिकन सोसाइटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स (ASPCA) के मुताबिक, जब कुत्ता पहले से किसी एक टारगेट पर फोकस हो और कोई और उस वक्त बीच में आ जाए, तो वह उस पर भी हमला कर सकता है. इसी महीने ग्रेटर नोएडा में भी एक महिला दो कुत्तों को छुड़ाने गई और उन्होंने उसे काट लिया.
तो फिर अब मालिक को क्या सजा मिलेगी?
इस घटना के बाद पटियाला पुलिस ने कुत्ते के मालिक के खिलाफ FIR दर्ज की. एक हैरान करने वाली बात है कि मालिक की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, क्योंकि पीड़ित मालिक का नाम नहीं बता सके. पुलिस ने घर का नंबर और इलाका नोट कर लिया है और जांच जारी है.
DSP जंगशेर सिंह रंधावा ने बताया, 'हमने पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए हैं और FIR दर्ज कर ली है. जांच के दौरान आरोपी की पहचान की जाएगी.'
किन धाराओं में केस दर्ज हुआ?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की तीन धाराओं के तहत FIR दर्ज की है:
- धारा 291 (पशु के संबंध में लापरवाह आचरण): जो कोई जानबूझकर या लापरवाही से अपने कब्जे में किसी पशु के संबंध में ऐसे उपाय करने से चूक जाता है, जो मानव जीवन के लिए किसी संभावित खतरे या पशु से गंभीर चोट के किसी संभावित खतरे से बचाव के लिए पर्याप्त हों.' इसमें 6 महीने तक की कैद या 5,000 रुपए जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.
- धारा 125A: जानलेवा खतरा पैदा करना
- धारा 125B: गंभीर चोट पहुंचाना
हालांकि, यह सवाल हर किसी के मन में है कि क्या 6 महीने की जेल और 5,000 रुपए जुर्माना उस मालिक के लिए काफी है? एक प्रोफेसर की जान पर बन आई, उसकी सर्जरी हुई, वो अब भी अस्पताल में है और कानून के मुताबिक मालिक को सिर्फ इतनी सी सजा हो सकती है.
कई लोगों का मानना है कि खतरनाक नस्ल के कुत्तों के मामलों में कानून को और सख्त बनाने की जरूरत है.
पीड़ित को मुआवजा कैसे मिलेगा?
पीड़ित को दो तरह से मुआवजा मिल सकता है:
- हेल्थ इंश्योरेंस: अगर किसी को कुत्ता काट ले और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़े, तो ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों में एनिमल बाइट कवर होता है. इसे एक्सीडेंट के तहत रखा जाता है, इसलिए क्लेम किया जा सकता है.
- पेट इंश्योरेंस: कुछ पेट इंश्योरेंस पॉलिसियों में थर्ड-पार्टी लायबिलिटी कवर होता है. यानी अगर किसी का पालतू कुत्ता किसी और को नुकसान पहुंचाए, तो बीमा कंपनी मुआवजा दे सकती है. यह पॉलिसी की शर्तों पर निर्भर करता है.
क्या भारत में पिटबुल पर बैन है?
भारत में पिटबुल, रॉटविलर या किसी भी खतरनाक नस्ल पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई बैन नहीं है. मार्च 2024 में केंद्र सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी विभाग ने 23 आक्रामक नस्लों के आयात, प्रजनन और बिक्री पर रोक लगाने की सिफारिश की थी. लेकिन हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया.
दिल्ली हाईकोर्ट (अप्रैल 2024): सर्कुलर को इसलिए रद्द कर दिया क्योंकि स्टेकहोल्डर्स और वेटरनरी एक्सपर्ट्स से पहले सलाह नहीं ली गई थी.
कर्नाटक हाईकोर्ट: इसी तरह का फैसला सुनाते हुए कहा कि बिना स्टैट्यूटरी बेसिस और कमेटी की सिफारिशों के ब्लैंकेट बैन नहीं लगाया जा सकता.

अब पटियाला में क्या होगा?
इस घटना के बाद पटियाला के मेयर कुंदन गोगिया ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि शहर में आक्रामक नस्लों को पालतू रखने पर बैन लगाया जाएगा और नगर निगम हाउस में इस पर विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा.
नगर निगम कमिश्नर पूजा ग्रेवाल ने कहा, 'हम पहले ही नोटिफिकेशन जारी कर चुके हैं और खतरनाक नस्लों को पालतू रखना सख्त मना है. हम पेट डॉग रजिस्ट्रेशन तेज करेंगे और नियमों का पालन सुनिश्चित करेंगे.'
एक बड़ा सवाल है कि जब पटियाला नगर निगम का कहना है कि पिटबुल रखना पहले से ही बैन है, तो यह पिटबुल वहां कैसे रह रहा था? यह सवाल नियमों के अमल पर बड़ा सवाल खड़ा करता है.
डॉग बाइट पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने एक अखबार की रिपोर्ट पर खुद संज्ञान लिया. इसमें एक 6 साल की बच्ची की आवारा कुत्ते के हमले में मौत की खबर थी. कोर्ट ने दिल्ली और NCR से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया. लेकिन इस आदेश के खिलाफ पांच इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन दाखिल हुईं. इसमें कहा गया कि इतने बड़े पैमाने पर कुत्तों को शेल्टर में रखने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है.
7 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्कूलों, हॉस्पिटलों, कॉलेजों, बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों जैसी जगहों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए. कोर्ट ने कहा, 'नागरिकों को डॉग बाइट के डर के बिना जीने का अधिकार है.'
19 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अपने 7 नवंबर 2025 के आदेश को बरकरार रखा और नए निर्देश जारी किए:
- हर जिले में कम से कम एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर बने.
- रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता हो.
- बीमार, रेबीज ग्रस्त या खतरनाक कुत्तों को इच्छामृत्यु (यूथनेसिया) देने की इजाजत.
- डॉग-कंट्रोल ऑपरेशन करने वाले अधिकारियों के खिलाफ रूटीन FIR पर रोक.

कुत्तों के काटने से बचने का रास्ता क्या है?
- कानून में सख्ती: BNS की धारा 291 को गंभीर चोट या मौत के मामलों में बढ़ाने की जरूरत है.
- राष्ट्रीय स्तर पर नियमन: फिलहाल कोई राष्ट्रीय बैन नहीं है, लेकिन नए दिशानिर्देश जारी होने चाहिए. इसमें वैज्ञानिक, वेटरनरी एक्सपर्ट्स, केनेल क्लब और स्टेकहोल्डर्स सभी को शामिल किया जाए, ताकि हाईकोर्ट फिर से सर्कुलर को रद्द न कर दे.
- ब्रीड-स्पेसिफिक कानून (BSL): पिटबुल और रॉटविलर जैसी नस्लों के पालन, प्रजनन और बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाने चाहिए.


















