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पालघर: बुलेट ट्रेन की तेज रफ्तार में भूकंप बन सकता है बड़ा रोड़ा, जानें सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम हो सकते हैं

मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलाई जाने वाली बुलेट ट्रेन में भूकंप बड़ी आफत बन सकता है. बुलेट ट्रेन मुंबई के पालघर इलाके से होकर गुजरने वाली है, वहां बीते सालभर में सौ से ज्यादा भूकंप के झटके आ चुके हैं.

मुंबई: पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलाई जाने वाली बुलेट ट्रेन के लिये भूकंप से निपटने की एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. महाराष्ट्र के जिस पालघर इलाके से होकर ये बुलेट ट्रेन गुजरने वाली है वहां बीते सालभर में सौ से ज्यादा भूकंप के झटके आ चुके हैं. कुछ झटके तो रिक्टर स्केल पर 4.5 की तीव्रता के भी रहे, जिनके मकान ढहे और लोगों की मौतें हुई. ऐसे में सवाल ये उठता है कि बुलेट ट्रेन से सफर करने वाले मुसाफिर कितने सुरक्षित रह सकेंगे.

2011 में जब जापान में भूकंप आया था तो तब बुलेट ट्रेन का सिस्टम भी तहस नहस हो गया था, लेकिन जापान सरकार की ओर से किये गये पूर्व इंतजामों की वजह से एक भी बुलेट ट्रेन मुसाफिर की मौत नहीं हुई. क्या वैसे ही इंतजाम National High Speed Rail Corporation भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिये करेगी? मुंबई से 130 किलोमीटर के फासले पर है पालघर

पालघर अपने मीठे चीकुओं के लिये मशहूर है लेकिन इन दिनों यहां के लोगों को अनुभव कड़वा रहा है. यहां जमीन कभी भी हिल जाती है, मकान डगमगाने लगते हैं और पूरा इलाका कुछ देर के लिये खौफजदा हो जाता है. पालघर के लोगों ने बीते सालभर में भूकंप के इतने झटके झेले हैं कि ऐसे खौफ में जीने के लोग आदी हो चुके हैं. इसी जमीन से होकर गुजरने वाली है भारत की पहली बुलेट ट्रेन.

पालघर जिले के हलड़पाड़ा गांव में रहने वाली ढाई साल की वैभवी भुयाल इस साल इलाके में आ रहे भूकंप के झटकों की वजह से जान गवाने वाली पहली शख्स थीं. 1 फरवरी की दोपहर जब वो घर के बाहर खेल रही थी तब इलाके में भूकंप के दहला देने वाले झटके आये जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 थी. नन्ही वैभवी जान बचाने के लिए अपनी मां की ओर भागी जो कि उस वक्त घर में ही मौजूद थीं, लेकिन बाहर पड़े पत्थर से टकराकर उसकी मौत हो गयी.

बीते साल नवंबर से लेकर अब तक इस इलाके में भूकंप के सैकड़ों झटके आ चुके हैं जिनकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर ढाई से लेकर के 4.5 तक रही है. इन झटकों की वजह से अब तक 2 लोगों की मौत हो चुकी है और कई मकानों का नुकसान हो चुका है. इलाके के लोग इस आशंका के साथ जी रहे हैं कि कभी भी यहां ज्यादा तीव्रता वाला भूकंप आ सकता है और भारी तबाही मच सकती है.

बुलेट ट्रेन के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम ज़रूरी

IIT-Bombay के प्रोफेसर रवि सिन्हा ने एबीपी न्यूज को बताया कि पालघर सेसमिक जोन 3 में आता है जिसे देखते हुए बुलेट ट्रेन की खातिर विशेष सुरक्षा इंतजाम ज़रूरी हैं. भारत में 4 सेसमिक जोन आते हैं. सेसमिक जोन एक में भूकंप आने की संभावना बिलकुल बेहद कम रहती है जो भारत पर लागू नहीं होता. सेसमिक जोन 2 से 5 भारत पर लागू होते हैं. सेसमिक जोन 2 में जो इलाके आते हैं वहां भूकंप की आशंका कम होती है और सेसमिक जोन 5 में जो इलाके आते हैं वहां बडे भूकंप की आशंका सबसे ज्यादा रहती है. बुलेट ट्रेन का रूट मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबा होगा, लेकिन पहली बुलेट ट्रेन इन 2 शहरों के बीच नहीं दौडेगी. साल 2022 में पहली बुलेट ट्रेन गुजरात के सूरत और बिलिमोरिया शहरों के बीच दौड़ेगी. ये दोनों स्टेशन बुलेट ट्रेन के मुख्य रूट के बीच में आते हैं. उनके बीच 48 किलोमीटर की दूरी है जो कि 15 मिनट में पूरी की जायेगी. इसके अगले साल ही यानि 2023 में ही मुंबई से अहमदाबाद के बीच पूरे रूट पर बुलेट ट्रेनों का चलना शुरू हो पायेगा.

इन सवालों के जवाब तलाशना जरूरी

मुंबई से अहमदाबाद की ओर सफर करने पर पालघर जिले में चौथा स्टेशन होगा. ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किलोमीटर प्रतिघंटा होगी. सवाल ये उठता है कि अगर इस इलाके में बडा भूकंप आ गया तो क्या तेज रफ्तार से चल रही बुलेट ट्रेन पटरी से नहीं उतरेगी? क्या ट्रेन को बिजली सप्लाई करने वाले खंभे नहीं उखडेंगे? क्या स्टेशनों की इमारत को नुकसान नहीं पहुंचेगा? भूकंप आने की सूरत में मुसाफिरों की जान कैसे बचाई जायेगी. इसके लिये हमें अबसे 9 साल पहले 11 मार्च 2011 को जापान में आये भूकंप की ओर देखना होगा. उस भूकंप ने वहां के बुलेट ट्रेन नेटवर्क जिसे कि शिंकानसेन कहते हैं को तहस नहस कर दिया था, लेकिन एक भी मुसाफिर की जान नहीं गई.

11 मार्च 2011 को उत्तर पूर्वी जापान में रिक्टर स्केल पर 8.9 की तीव्रता का भूकंप आया जिससे उस देश में भयानक तबाही मची और लाखों लोग मारे गये, लेकिन बुलेट ट्रेन में सवार एक भी शख्स की मौत नहीं नहीं हुई. इसके पीछे कारण था बुलेट ट्रेन चलाने वाली कंपनी जापान रेल का भूकंप सतर्कता सिस्टम. जैसे ही भूकंप आया जापान के किनजान नाम की जगह पर लगाये गये सेसमोमीटर ने सभी ट्रेनों को रूकने का ऑटोमैटिक सिग्नल भेजा. उस वक्त 33 बुलेट ट्रेनें पटरियों पर थीं, लेकिन एक भी ट्रेन का मुसाफिर हताहता नहीं हुआ.

उस भूकंप की वजह से 2590 ठिकानों पर जापान रेल की पटरियों को नुकसान पहुंचा और 1150 बिजली के खंभे उखड़ गये, लेकिन मुसाफिरों को ले जा रही कोई ट्रेन पटरी से उतरी. सेंदई जहां भूकंप ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई वहां सिर्फ एक खाली ट्रेन पटरी से उतर गई.

NHSRC मैनेजिंग डाईरेक्टर बताई रूप रेखा

पालघर से गुजरने वाली भारतीय बुलेट ट्रेन के लिये भी क्या ऐसा ही कोई सिस्टम तैयार किया जायेगा? ये जानने के लिये हमने National High Speed Rail Corporation के मैनेजिंग डाईरेक्टर अचल खरे से बात की. अचल खरे ने बताया कि भारतीय बुलेट ट्रेन में भी कुछ वैसी ही तकनीक इस्तेमाल होगी. भूकंप के शुरुआती झटके आने के साथ ही बुलेट ट्रेन की बिजली सप्लाई बंद हो जाएगी और सारी बुलेट ट्रेन्स रुक जाएंगी.

खरे के मुताबिक पालघर को लेकर उन्हें चिंता नही है क्योंकि भूकंप के झटकों का बार बार आना मायने नही रखता. नुकसान उनकी तीव्रता से होता है जिसके लिए जगह जगह सेसमो मीटर लगाए जाएंगे. भले ही National High Speed Rail Corporation ने भूकंप से निपटने के इंतजाम कर लिए हों, उसके लिए एक बड़ी चुनौती से निपटना अभी बाकी है. ये चुनौती है बुलेट ट्रेन के लिए जमीन हासिल करना जिसका पालघर में विरोध हो रहा है.

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