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काम की खबर: देश में टमाटर और प्याज महंगा, जानें क्या हैं दाम बढ़ने की वजह?

प्याज की महंगाई, सरकारी फैसलों की अदूरदर्शिता का परिणाम है, जो आम आदमी को रोने पर मजबूर करती हैं.

नई दिल्ली: देश में महंगाई ने एक बार फिर जनता की कमर तोड़ दी है. बढ़ते सब्जियों के दाम से जनता त्रस्त है. इन दिनों टमाटर का रेट आसमान छू रहा है. देश के ज्यादातर राज्यों में टमाटर पिछले साल नवंबर के मुकाबले कई सौ फीसदी महंगा हो गया है. कई राज्यों में फिलहाल टमाटर 80 से 100 रुपए किलो और प्याज 50 से 60 रुपए प्रतिकिलो बिक रहा है. देश के ऐसे छह राज्य हैं, जहां टमाटर की सबसे ज्यादा पैदावार होती है. ये राज्य हैं, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक,तेलंगना,महाराष्ट्र, गुजरात और छत्तीसगढ़. लेकिन यहां भी टमाटर लाल हो रहा है. टमाटर की कीमतों में कहां कितना उछाल आया? आंध्रप्रदेश- 662 फीसदी, कर्नाटक- 579 फीसदी, तेलंगना- 529 फीसदी, महाराष्ट्र- 425 फीसदी, केरल- 286 फीसदी, दिल्ली- 264 फीसदी, गुजरात- 244 फीसदी, छत्तीसगढ़- 234 फीसदी, पंजाब- 168 फीसदी और उत्तर प्रदेश में पिछले साल नवंबर के मुकाबले टमाटर की कीमतों में 162 फीसदी की उछाल है. नवंबर में टमाटर के महंगे होने के पीछे क्या गणित है? देश में सबसे ज्यादा टमाटर की पैदावार कर्नाटक, महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में होती है. महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश की वजह से टमाटर की फसल को नुकसान पहुंचा है. वहीं, खराब रास्तों की वजह से टमाटर मंडियों में देरी से पहुंच रहा है. इन्हीं वजहों से टमाटर के भाव 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. आपको बता दें कि साल में दो बार देश में टमाटर का उत्पादन होता है. टमाटर की एक फसल फरवरी के आसपास बोई जाती है, वहीं दूसरी फसल अगस्त तक बोई जाती है, जो नवंबर में तैयार होती है. इससे साफ है कि जब तक टमाटर की जाड़े की फसल बाजार में नहीं आएगी, टमाटर महंगा होता रहेगा. प्याज की कीमतों में कहां कितना उछाल आया? वहीं अगर प्याज कीमतों की बात करें तो आंध्रप्रदेश में 415 फीसदी, तेलंगाना में 284 फीसदी, मध्यरप्रदेश में 261 फीसदी, चुनावी दौर से गुजर रहे गुजरात में 235 फीसदी, कर्नाटक में 205 फीसदी और महाराष्ट्र में 192 फीसदी की उछाल है. इन छह राज्यों में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना को छोड़कर बाकि चार राज्य ऐसे हैं, जहां प्याज की पैदावर देश भर में सबसे ज्यादा होती है. बता दें कि  प्याज की बड़ी मात्रा में जमाखोरी करने की वजह से दाम बढते हैं. इन्हीं वजहों से प्याज की कीमत 50 से 60 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. प्याज की नई फसल बाजार तक दिसंबर महीने तक पहुंचने लगेंगी. टमाटर की तरह ही प्याज का उत्पादन भी साल में दो बार होता है. प्याज की पहली पैदावार जनवरी से मई महीने के बीच होती है तो दूसरी पैदावार नवंबर के शुरुआती दिनों में शुरु होती है. ऐसे में दिसंबर तक प्याज की नई फसल बाजार में आ जाती है. दिसंबर से पहले हर साल टमाटर और प्याज की कीमतें क्यों बढ जाती हैं? भारत सरकार की आयात और निर्यात नीतियों को के मुताबिक, भारत ने पिछले साल 7.88 लाख टन प्याज निर्यात किया जो इस साल बढ़कर 12.3 लाख टन हो गया. मतलब ये कि पिछले साल के मुकाबले इस साल भारत ने 56 फीसदी ज्यादा प्याज निर्यात किया है. वो भी तब जबकि उत्पादन में कमी का अंदेशा था. जब निर्यात पूरा हो गया तो बढ़ते प्याज के दामों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने निजी क्षेत्र के जरिए चीन और मिस्र से 11400 टन प्याज आयात किया है. अब एक साथ दोनों आंकड़े जानिए, पहले 12.3 लाख टन निर्यात किया और फिर अबतक 11 हजार 400 टन आयात किया. इससे साफ हो जाता है कि प्याज की महंगाई, सरकारी फैसलों की अदूरदर्शिता का परिणाम है, जो आम आदमी को रोने पर मजबूर करती है और जब नयी फसल आती है तभी जनता को महंगाई से राहत मिलती है.
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