कोई भी सरकार या अवतार केवल अपने बूते देश को बड़ा नहीं बना सकता: मोहन भागवत
संघ प्रमुख ने कहा कि देश को संपन्न और विश्व गुरु बनाने के लिए समाज के आचरण और नजरिए में बदलाव लाना होगा. किसी भी आधार पर भेदभाव का विचार दिल से निकाल देना पड़ेगा और निजी स्वार्थों का त्याग करना होगा.

इंदौर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विकास के लिए हरदम सरकार का मुंह ताकने के बजाय लोगों से खुद कदम उठाने की अपील की. मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि सकारात्मक बदलावों के लिए पूरे समाज को तैयार किए जाने की जरूरत है. भागवत ने स्थानीय कॉलेज में पढ़ने वाले संघ स्वयंसेवकों के कार्यक्रम में कहा, "देश को बड़ा बनाना किसी अकेले नेता, नीति, पार्टी, अवतार और सरकार के अपने बूते का काम नहीं है. यह परिवर्तन का मामला है और हमें इसके लिए पूरे समाज को तैयार करना होगा."
मोहन भागवत ने कहा, "पुराने जमाने में लोग विकास के लिए भगवान की ओर देखते थे. लेकिन कलयुग में लोग विकास के मामले में सरकार को देखते हैं. लेकिन वास्तव में कोई भी सरकार उतनी ही चलती है, जितनी समाज की दौड़ होती है." संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा, "समाज, सरकार का बाप है. सरकार, समाज की सेवा जरूर कर सकती है. लेकिन समाज में परिवर्तन नहीं ला सकती. समाज जब खुद में परिवर्तन लाता है, तो यही परिवर्तन सरकार और व्यवस्थाओं में प्रतिबिंबित होता है."
संघ प्रमुख ने कहा कि देश को संपन्न और विश्व गुरु बनाने के लिए समाज के आचरण और नजरिए में बदलाव लाना होगा. किसी भी आधार पर भेदभाव का विचार दिल से निकाल देना पड़ेगा और निजी स्वार्थों का त्याग करना होगा. उन्होंने कहा कि तमाम विविधताओं के बावजूद देश में एकता की प्राचीन संस्कृति बरकरार है, जो सभी मनुष्यों को अपना परिवार मानती है.
मोहन भागवत ने कहा, "जर्मनी किन लोगों का देश है..जर्मन लोगों का देश है. ब्रिटेन ब्रितानियों का देश है. अमेरिका अमेरिकियों का देश है. इसी तरह हिंदुस्तान हिंदुओं का देश है. इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हिंदुस्तान दूसरे लोगों का देश नहीं है." भागवत ने कहा, "हिंदू की परिभाषा में वे सब लोग आते हैं जो भारत माता के पुत्र हैं, भारतीय पूर्वजों के वंशज हैं और भारतीय संस्कृति के मुताबिक चलते हैं."
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