...तो SCO बैठक के लिए इस साल इमरान खान को न्योता भेजेगा भारत?
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत मेज़बानी कर रहा है तो सदस्य देश होने के नाते पाकिस्तान को भी निमंत्रण भेजा जाएगा. शासन प्रमुखों की बैठक के लिए न्योता तकनीकी तौर पर पीएम इमरान खान को भेजना होगा.

नई दिल्लीः शंघाई सहयोग संगठन की पूर्ण सदस्यता हासिल करने के दो साल में ही भारत को इसकी एक अहम बैठक की मेजबानी का मौका मिल गया है. भारत को इस साल एससीओ के शासन-प्रमुखों की बैठक आयोजित करना है. हालांकि इस अंतरराष्ट्रीय मेज़बान ने भारत और पाकिस्तान के लिए एक कूटनीतिक पसोपेश में भी खड़ा कर दिया है. क्योंकि इस बैठक में शिरकत करने का न्योता पाकिस्तान के पीएम इमरान खान को भी भेजा जाएगा.
भारत के दौरे पर आए शंघाई सहयोग संगठन के महासचिव व्लादिमीर नोरोव ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि रूस, भारत और चीन इस समूह को रफ्तार देने वाले इंजन साबित हो सकते हैं.
क्या पाकिस्तान को भी भेजा जाएगा निमंत्रण?
रूस इस साल एससीओ शिखर बैठक का जुलाई 2020 में आयोजन करेगा. वहीं शासन प्रमुखों की बैठक के सहारे भारत को अपनी सम्भावनाएं पूरे समूह के आगे रखने का मौका मिलेगा.
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक भारत मेज़बानी कर रहा है तो सदस्य देश होने के नाते पाकिस्तान को भी निमंत्रण भेजा जाएगा. शासन प्रमुखों की बैठक के लिए न्योता तकनीकी तौर पर पीएम इमरान खान को भेजना होगा जो पाक सरकार के मुखिया हैं. अब यह पाक पीएम पर निर्भर करेगा कि वो किस तरह आपने देश का प्रतिनिधित्व तय करते हैं. ध्यान रहे कि SCO की बैठकें सिरिलिक लिपि के वर्णाक्षरों से तय होती हैं. लिहाज़ा भारत का नाम पहले आ गया.
बिश्केक में पीएम मोदी इमरान का हुआ था आमना सामना
हालांकि, शासन पर प्रमुखों की पिछली बैठकों की परंपराएं देखें तो भारत और पाकिस्तान दोनों ही प्रधानमंत्री की बजाए अपने अन्य नेताओं को भेजते रहे हैं. नवंबर 2019 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ताशकंद गए थे. वहीं 2018 में शासन प्रमुखों की बैठक के दौरान भारत का प्रतिनिधित्व तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने किया था. वहीं पाकिस्तान की नुमाईंदगी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी न की थी.
महत्वपूर्ण है कि पीएम मोदी और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का पिछली बार आमना-सामना भी शंघाई सहयोग संगठन की बिश्केक में हुई बैठक के दौरान हुआ था. मगर किर्गीज़स्तान में जून 2019 को हुई इस शिखर बैठक के दौरान दोनों नेताओं की इस सामाजिक मुलाकात सामान्य शिष्टाचार संवाद से ज़्यादा पारवान नहीं चढ़ पाई. इस बैठक के दौरान दोनों प्रधामंत्री दावत की मेज से लेकर संस्कृतिक संध्या और औपचारिक शिखर वार्ता सत्र के दौरान कई बार साथ थे.
'आर्टिकल 370 हटाने के बाद रिश्तों में खिंचाव'
वहीं अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के भरतीय फैसले के बाद रिश्तों में खिंचाव और बढ़ा ही. भारतीय संसद के इस फैसले के बाद सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए करीब 5 दिनों तक दोनों नेताओं के एक साथ न्यूयार्क में रहने पर भी रूबरू तक नहीं आए. खान ने यूएन में अपने 50 मिनट से ज़्यादा के अपने भाषण में ज़्यादातर वक्त भारत के खिलाफ ही ज़हर उगला.
भारत और पाकिस्तान दोनों ही देश जून 2017 में शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य बनाए गए. आठ देशों की सदस्यता वाले इस संगठन में रूस और चीन के अलावा मध्य एशिया के उज़्बेकिस्तान, कजाखिस्तान समेत अन्य मुल्क शामिल हैं.
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