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Master Stroke: अर्थव्यवस्था पर लोगों का भरोसा घटा, ग्राहकों के खर्च करने की क्षमता में बड़ी गिरावट है सबूत

रिजर्व बैंक का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स यानी CCI के मुताबिक, अर्थव्यवस्था के 5 में से 4 मोर्चों पर लोगों का भरोसा नवंबर 2018 के मुकाबले नवंबर 2019 में कमजोर पड़ा है.

नई दिल्ली: आर्थिक मोर्चे पर विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर है. इस हमले को और अधिक धार तब और मिली जब हाल ही में आईएमएफ-वर्ल्ड बैंक ने भारत के आर्थिक विकास दर की रफ्तार का अनुमान घटा दिया. इसका असर भी भारतीय ग्राहकों पर दिख रहा है. पिछले साल नवंबर में आया रिजर्व बैंक का कंज्यूमर कॉन्फिडेंस इंडेक्स यानी CCI भी इसी ओर इशारा करता है.

-अर्थव्यवस्था के 5 में से 4 मोर्चों पर लोगों का भरोसा नवंबर 2018 के मुकाबले नवंबर 2019 में कमजोर पड़ा है -अर्थव्यवस्था के ये 4 मोर्चे हैं - आर्थिक हालात, रोजगार, कीमतों का स्तर और कम होती आमदनी - नवंबर 2018 में जो आंकड़ा 93.9 था, वो नवंबर 2019 में 85.7 का है

अब सवाल है कि जब ग्राहक का भरोसा ही नहीं होगा और देश की आर्थिक हालत ऐसी होगी तो फिर 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनोमी का सपना कैसे साकार होगा? अगर भारत को 2024 में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनना है तो GDP 10% से भी ज्यादा करनी होगी. लेकिन अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मौजूदा रफ्तार से ऐसा होना असंभव है. अर्थशास्त्री जयती घोष ने कहा कि GDP ज्यादा बताया जा रहा है, लेकिन सबकुछ गिर रहा है, असली जीडीपी तो जीरो होगी.

आम लोगों की खर्च करने की क्षमता कम हो रही है. बिजनेस स्टैंडर्ड ने NSO यानी सांख्यिकी विभाग के अप्रकाशित आंकड़े के हवाले से बताया है कि पिछले 4 दशक में ग्राहकों के खर्च करने की क्षमता में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2011-12 में जहां एक ग्राहक हर महीने 1501 रुपये खर्च करता था, वो 2017-18 में 1446 रुपये हर महीने खर्च करता है. यानी इन 6 सालों में जहां खर्च करने की क्षमता बढ़नी चाहिए थी, वो इसके उलट 3.7% तक कम हो गई है.

अब एक और आकंड़े से ये समझिए कि कैसे जब लोगों ने खर्च करना कम कर दिया और दूसरी तरफ महंगाई की उन पर मार पड़ी तो उनके राशन के थैले का वजन कम हो गया. कंज्यूमर रिसर्च फर्म Kantar World Panel की रिपोर्ट के मुताबिक, एक आम भारतीय का राशन का थैला सितंबर 2018 में 222 किलो का हुआ करता था. जो सितंबर 2019 में 5 किलो घटकर 217 किलो रह गया. रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि सितंबर 2018 में महीने का सामान खरीदने के लिए 14,724 रुपये खर्च करने होते थे. जो सितंबर 2019 में बढ़कर 15015 रुपये हो गया है.

एक तरफ राशन के इस थैले का वजन कम हो गया, और दूसरी तरफ इसी थैले के सामान को खरीदने के लिए आपको ज्यादा पैसे चुकाने पड़े. यानी महंगाई बढ़ गई. दिसंबर 2018 से दिसंबर 2019 की तुलना में सब्जियां 60.5%. दाल 15.44%, मीट और मछली 9.57%, अंडा 8.79%, फल 4.45%, दूध और दुग्ध उत्पाद 4.22% महंगे हो गए हैं.

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