'मंदिर में दिया जलता रहे...', मद्रास HC से तमिलनाडु सरकार को झटका, जानें दीपम विवाद का पूरा अपडेट
Madras High Court: मद्रास हाई कोर्ट की बेंच पीठ ने कहा कि चूंकि यह पहाड़ी एक संरक्षित स्मारक है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी गतिविधि को संबंधित कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा.

मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ ने मंगलवार (6 जनवरी, 2026) को तमिलनाडु के थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी मंदिर परिसर में दीपथून (कृतिकै दीपम) के मौके पर पारंपरिक दीप जलाने की अनुमति देने वाले न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है.
अदालत ने कहा कि जिला प्रशासन को इस मामले को टकराव की बजाय मध्यस्थता के अवसर के रूप में देखना चाहिए था. पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि चूंकि यह पहाड़ी एक संरक्षित स्मारक है, इसलिए यहां होने वाली किसी भी गतिविधि को संबंधित कानून के प्रावधानों का सख्ती से पालन करना होगा.
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने यह साफ किया कि दीप प्रज्ज्वलन किया जा सकता है और इसमें शामिल होने वाले लोगों की संख्या भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से परामर्श कर तय की जा सकती है.
VIDEO | Madurai, Tamil Nadu: Thirupparankundram lamp lighting row - Madras HC's Madurai Bench upholds single judge's ruling allowing lighting of lamp on 'Deepathoon'. Advocate Arun Swaminathan speaks on the verdict:#Madurai #TamilNaduNews
— Press Trust of India (@PTI_News) January 6, 2026
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दरगाह और राज्य सरकार नहीं दिखा पाए सबूत- मद्रास हाई कोर्ट
मद्रास हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति केके रामकृष्णन की मदुरै बेंच ने इस मामले में आदेश सुनाते हुए कहा, ‘मामले में अपीलकर्ता राज्य सरकार और हजरत सुल्तान सिकंदर बादशाह अवुलिया दरगाह यह दिखाने के लिए ठोस सबूत पेश नहीं कर पाए कि आगम शास्त्र उस स्थान पर दीपक जलाने से रोकता है.’
कोर्ट ने कहा, ‘कानून और व्यवस्था की आशंका राज्य अधिकारियों की ओर से अपनी सुविधा के लिए एक सुमदाय को दूसरे के खिलाफ संदेह के घेरे में डालने के लिए गढ़ा गया एक काल्पनिक भूत था. जिला प्रशासन को इस मुद्दे को मध्यस्थता के माध्यम से समुदायों के बीच खाई पाटने के मौके की तरह लेना चाहिए था.’
क्या है पूरा विवाद?
इस मामले को लेकर पहले जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की एकल बेंच ने फैसला सुनाया था. कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए राज्य के अधिकारियों को निर्देश दिया था कि पहाड़ी की चोटी पर पवित्र दीप का प्रज्जवलन सुनिश्चित किया जाए. वहीं, तमिलनाडु सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर आशंकाओं का हवाला देते हुए इस आदेश को चुनौती दी थी.
वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस मामले में फैसला सुनाने वाले जस्टिस जीआर स्वामीनाथन का हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव दिया गया था. कांग्रेस, डीएमके, सपा समेत विपक्षी गठबंधन के 100 से ज्यादा सांसदों ने जस्टिस के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए हस्ताक्षर कर लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला को प्रस्ताव दिया था.
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