महिलाओं की भागीदारी पर बोले स्पीकर ओम बिरला - 'वो दिन दूर नहीं जब...'
‘शी इज अ चेंज मेकर’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में स्पीकर ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान मौका और समानता का अधिकार दिया है और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार (7 सितंबर) को कहा कि मौजूद समय में कोई भी ऐसा सेक्टर नहीं है, जहां महिलाएं नेतृत्व न कर रही हों और विकसित भारत बनाने के लिए महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मजबूत होना बहुत जरूरी है. बिरला ने यह भी कहा कि आजादी के आंदोलन से लेकर राष्ट्र निर्माण तक महिलाओं की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है.
राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से फरीदाबाद में आयोजित दो दिवसीय ‘शी इज अ चेंज मेकर’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस दो दिवसीय कार्यशाला में महिला विधायक अपने विचार, दृष्टिकोण और अनुभावों को साझा करें, आपस में सीखें.
उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में संवाद और संवेदना अनिवार्य हैं और महिलाओं की कार्यप्रणाली में ये महत्वपूर्ण विशेषताएं है.' उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोगों की कठिनाइयों को दूर करने और उनकी आकांक्षाओं को साकार करने में महिला नेतृत्व की अहम भूमिका है. स्पीकर ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समान मौका और समानता का अधिकार दिया है और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी प्रावधान किए गए हैं.
उन्होंने कहा, वर्तमान समय में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जो महिला नेतृत्व से अछूता हो. लोगों की कठिनाइयां दूर करने, आकांक्षाएं साकार करने में महिला नेतृत्व की अहम भूमिका है.
'संसद ने महिलाओं को सशक्त किया'
लोकसभा अध्यक्ष ने आगे कहा, आजादी के बाद भारत की संसद ने कई कानूनों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त, आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां राज्य से लेकर केंद्र तक विधायिका में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित हुआ. उन्होंने कहा कि राज्य विधायिका हो या देश की संसद, महिलाएं हमेशा प्रखर रूप से अपने विचार रखती हैं.
VIDEO: BRS MLC की अपमानजनक बयान से भावुक हुए स्पीकर, आंखों में भर आए आंसू
'महिलाओं की कार्यप्रणाली में अधिक संवेदना'
महिलाओं के काम करने के तरीके में अधिक संवेदना होती है, इसीलिए बेहतर क्षमता के साथ कार्य कर पाती हैं. उन्होंने कहा, अखिल भारतीय सेवाओं में एक समय पर 15–20 प्रतिशत महिलाएं नेतृत्व करती थीं, आज 40 प्रतिशत संख्या महिलाओं की होती है. स्पीकर ने कहा इस मंच से कहकर जा रहा हूं कि आने वाले समय में यह संख्या 50 प्रतिशत से ज्यादा होगी. विकसित भारत के संकल्प में महिलाओं का आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक सशक्तिकरण महत्वपूर्ण पहलू है.
गुजरात-मुंबई के दौरे पर जाएंगे PM मोदी, 35,000 करोड़ के प्रोजेक्ट्स की सौगात






















