डॉक्टर्स की हड़ताल: बंगाल के RG कर मेडिकल कॉलेज के 126 डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, मरीजों की हालत खराब
डॉक्टर्स के प्रदर्शन का असर दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, तिरुवनंतपुरम, जयपुर, रायपुर के अस्पतालों में दिखा. हर तरफ मरीजों को और अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा.

कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में पिछले चार दिनों से हड़ताल कर रहे जूनियर डॉक्टर्स को देशभर के डॉक्टर्स का साथ मिला है. इसके साथ ही बंगाल के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के 126 प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों ने अपना सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया है. नॉर्थ बंगाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के 27 डॉक्टर्स ने भी अपना इस्तीफा दे दिया है. सभी का कहना है कि मौजूदा स्थिति की प्रतिक्रिया के रूप में हम सेवा देने में असमर्थ हैं, हम इस्तीफा देना चाहते हैं.
दूसरी तरफ डाक्टर्स के प्रदर्शन और हड़ताल के कारण दिल्ली के एम्स, सफदरजंग समेत देश के कई हिस्सों में अस्पतालों में मरीज परेशान दिखे. AIIMS के रेजिडेंट डॉक्टर्स ने एक दिन का सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया. इसी वजह से आज रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी और रूटीन सेवा ठप कर दी. इसके अलावा सर पर पटी बांध कर AIIMS अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया.
इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की हड़ताल से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बंगाल सरकार को सात दिन का समय दिया है. कोर्ट ने सरकार से पूछा कि गतिरोध खत्म करने के लिए क्या कदम उठाए गए. कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य को इस पर विराम लगाना होगा और इसका हल ढूंढना होगा.

पश्चिम बंगाल में डॉक्टर्स की हड़ताल के समर्थन में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने आज ‘अखिल भारतीय विरोध दिवस’ घोषित किया है. इसका असर देशभर में देखा गया. दिल्ली में डॉक्टर्स ने कहीं हेलमेट पहनकर तो कहीं काली पट्टी बांधकर मरीजों के इलाज किए. कुछ डॉक्टर्स ने एक जगह इकट्ठे होकर नारेबाजी की. बिहार की राजधानी पटना और कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में डॉक्टर्स का समूह सड़कों पर उतरा और इंसाफ की मांग की.
Delhi: Members of Resident Doctors' Association of All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) continue to work wearing helmets, as a mark of protest against "worsening of violence against medical doctors in West Bengal." pic.twitter.com/6vAlBdFfPd
— ANI (@ANI) June 14, 2019
केरल के तिरुवनंतपुरम में 'डॉक्टर के खिलाफ हिंसा बंद हो' की तख्ती लिए डॉक्टर्स ने प्रदर्शन किए. जयपुर में जयपुरिया अस्पताल में डॉक्टर्स ने बांह में काली पट्टी लगाकर मरीजों के इलाज किए. छत्तीसगढ़ के रायपुर में भी इसी तरह का नजारा दिखा. नागपुर में भी जूनियर डॉक्टर्स सड़कों पर दिखे और व्हील चेयर पर बैठकर खुद को असहाय दिखाया. इन डॉक्टर्स ने सिर पर घाव की पट्टी भी बांधी.
Karnataka: Doctors hold protest in Bengaluru over violence against doctors in West Bengal. pic.twitter.com/NWdQrK6Dr0
— ANI (@ANI) June 14, 2019
प्रदर्शन के बीच हर्षवर्धन से मुलाकात दिल्ली में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने जूनियर डॉक्टर्स के एसोसिएशन के प्रतिधिमंडल से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि मैं डॉक्टर्स से अपील करता हूं कि वे सांकेतिक प्रदर्शन करें और काम करते रहें. साथ ही हर्षवर्धन ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि वे हड़ताल के मुद्दे को प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाएं. उन्होंने डॉक्टर्स को अल्टीमेटम दिया जिससे डॉक्टर्स में गुस्सा बढ़ा और वे हड़ताल पर गए.
I feel very sad that doctors across India had to strike work in protest against atrocities on doctors in W Bengal & consequently patients across India are suffering.I appeal to @Mamtaofficial to withdraw her ultimatum to the medical community & not make this a prestige issue. pic.twitter.com/bSIkVFkrLs
— Dr Harsh Vardhan (@drharshvardhan) June 14, 2019
क्यों हड़ताल पर हैं डॉक्टर्स? कोलकाता के सरकारी एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में सोमवार की रात एक मृत मरीज के परिवार के सदस्यों ने दो जूनियर चिकित्सकों पर हमला कर दिया था जिसके खिलाफ चिकित्सक प्रदर्शन कर रहे हैं और सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा फिर से सेवा शुरू नहीं करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दिये जाने के बावजूद जूनियर डॉक्टरों ने अपनी हड़ताल जारी रखी है. पश्चिम बंगाल में सरकारी मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों और कई निजी मेडिकल संस्थानों में ओपीडी और अन्य विभागों में सेवाएं पूरी तरह बाधित है.
जूनियर डॉक्टरों के संयुक्त फोरम के प्रवक्ता डॉक्टर अरिंदम दत्ता ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने जिस तरीके से जूनियर डॉक्टरों को धमकी दी है वह अप्रत्याशित है...यह हमारे समुदाय का अपमान है. हम इसकी भी निंदा करते हैं.. उन्होंने कल जो कहा इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए.’’

राज्य के कई हिस्सों में चिकित्सा सेवाओं के बाधित होने के मद्देनजर गुरुरवार को राजकीय एसएसकेएम अस्पताल का दौरा करने वाली बनर्जी ने डॉक्टरों को चेतावनी दी कि अगर वे काम पर नहीं आएंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. जिसकी वजह से डॉक्टर्स में और अधिक नाराजगी बढ़ी.
Source: IOCL

























