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जानिए- अगर देश में एक साथ लोकसभा-विधानसभा के चुनाव हों तो क्या होंगे नफा-नुकसान

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज अपने अभिभाषण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने पर जोर दिया है. जिसके बाद इस मामले पर बहस और तेज हो गई है.

नई दिल्ली: क्या देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं? ये बहस देश में पिछले कई सालों से चल रही है. साल 2014 के बाद से जब से बीजेपी सत्ता में वापस लौटी है, तब से इस सवाल पर बहस और तेज हुई है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी एक साथ चुनाव कराए जाने की वकालत करते आए हैं और आज ससंद भवन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी अपने अभिभाषण में एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया.

आर्थिक मामलों के जानकार प्रोफेसर आनंद प्रधान की राय-

आनंद प्रधान ने बताया, ‘’ इस संबंध में नीति आयोग ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराए जाने पर अपनी रिपोर्ट दी थी. नीति आयोग के मुताबिक, इस फॉर्मूले को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए कुछ राज्यों की विधानसभाओं के कार्यकाल में बढ़ोतरी और कुछ के कार्यकाल में कटौती करनी होगी. लेकिन ये इतना आसान नहीं है.

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हमेशा देखा गया है कि कई राज्यों में कार्यकाल पूरा होने से पहले ही सरकार गिर जाती है और वहां कुछ महीनों के अंदर ही चुनाव कराने पड़ते हैं. ऐसे में अगर एक साथ चुनाव करा भी लिया गया तो इस बात की गारंटी नहीं है कि पांच साल के कार्यकाल के बीच वहां फिर से चुनाव नहीं हो सकते.

एक साथ चुनाव कराने के लिए देश के सभी राज्यों की सहमति लेनी होगी. लेकिन एक राष्ट्रीय पार्टी और क्षेत्रीय पार्टी की विचारधारा उनकी राजनीति अलग होती है, ऐसे में जरुरी नहीं है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टी इसपर सहमत हो.’’

राष्ट्रपति का अभिभाषण: एक साथ लोकसभा-विधानसभा चुनाव कराने पर बने सहमति

अक्सर देखा गया है कि जिस राज्य में लोकसभा चुनाव के साथ ही विधानसभा चुनाव कराया गया है वहां हमेशा राष्ट्रीय पार्टी को फायदा पहुंचा है और क्षेत्रीय पार्टियों को नुकसाना उठाना पड़ा है. क्योंकि उस स्थिति में वोटर अगर अपना सांसद चुनने के लिए एबीसीडी पार्टी को वोट देता औऱ तो वह विधायक चुनने के लिए भी उसी पार्टी को वोट दे देता है.’’

एक साथ चुनाव कराने के लिए सरकार को संविधान के कई अनुच्छेदों में संशोधन कराना होगा और संशोधन प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में पारित कराना होगा. वहीं, मौजूदा समय में देश के किसी न किसी हिस्से में चुनाव प्रक्रिया चलती रहती है. सरकार को अगर एक साथ चुनाव कराना है तो फिर लोकसभा और विधानसभा चुनाव के साथ-साथ उपचुनावों पर भी गौर करना होगा.’’

राष्ट्रपति ने भी एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी आज अपने अभिभाषण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ कराने पर जोर दिया है. रामनाथ कोविंद ने कहा, ‘’गवर्नेंस के प्रति सजग लोगों में, देश के किसी न किसी हिस्से में लगातार हो रहे चुनाव से, पड़ने वाले विपरीत प्रभाव को लेकर चिंता है. बार-बार चुनाव होने से मानव संसाधन पर बोझ तो बढ़ता ही है, आचार संहिता लागू होने से देश की विकास प्रक्रिया भी बाधित होती है. इसलिए एक साथ चुनाव कराने के विषय पर चर्चा और संवाद बढ़ना चाहिए और सभी राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाई जानी चाहिए.’’

इस साल कहां-कहां हैं विधानसभा के चुनाव

बता दें कि इस साल छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव होने हैं. इन राज्यों में से तीन बड़े राज्यों छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी की सरकार है. ऐसे में सरकार चाहेगी कि इन तीन-तीन राज्यों के साथ ही लोकसभा चुनाव भी करा लिया जाए.

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