विंग कमांडर अभिनंदन की वापसी: महज एक दिन के भीतर भारत ने पाक से कैसे जीती कूटनीतिक लड़ाई?
भारत की तरफ से लगातार बनाए जा रहे दबाव के बाद पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एलान किया कि वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को कल रिहा किया जाएगा.

नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान के ऊपर जबरदस्त कूटनीतिक जीत दर्ज की है. भारत की तरफ से लगातार बनाए जा रहे दबाव के बाद पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने एलान किया कि वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन को कल भारत को सौंपा जाएगा. सूत्रों के मुताबिक कल वाघा बार्डर के रास्ते विंग कमांडर को भारत लाया जाएगा.
भारत लगातार आतंक के खिलाफ कार्रवाई करने को लेकर पाकिस्तान पर दबाव बनाता रहा है. लेकिन 14 फरवरी को हुए पुलवामा हमले के बाद अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देश भारत के साथ खड़े हो गए. सबने मिलकर एक सुर में पाकिस्तान को कहा कि वो अपनी जमीन पर मौजूद आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करे. इतना ही नहीं जब भारत ने पुलवामा का बदला लेते हुए बालाकोट में मौजूद आतंकियों के ठिकाने पर एयर स्ट्राइक की तो इसका भी कई देशों ने समर्थन किया. उन्होंने माना कि आतंक के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
हालांकि पाकिस्तान इसके बावजूद भी नहीं माना और उसके विमानों ने एयर स्ट्राइक के अगले दिन जम्मू-कश्मीर के पुंछ और राजौरी सेक्टर में भारतीय वायु सीमा का उल्लंघन किया. इसका भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया. इस जवाबी कार्रवाई में भारत ने एक पाकिस्तानी विमान को गिरा दिया. इस संघर्ष में भारतीय वायुसेना का भी एक मिग-21 क्रैश हुआ और वायुसेना के पायलट अभिनंदन को पाकिस्तान ने अपने कब्जे में ले लिया. इसकी पुष्टि होते ही भारत ने पाकिस्तान से सीधे शब्दों में कहा कि पायलट को सही सलामत वापस लौटाया जाए. भारत ने पाकिस्तान के उप-उच्चायुक्त को समन जारी किया था और विंग कमांडर की तस्वीर दिखाए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की थी.
ऐसे में एक तरफ भारत की तरफ से लगातार बनाए जा रहे दबाव और उसे दूसरे देशों के मिल रहे समर्थन को देखते हुए आखिरकार पायलट को कब्जे में लेने के महज एक दिन के भीतर पाकिस्तान को झुकना पड़ा. दरअसल दुनिया में पाकिस्तान के सामने अपनी दागदार छवि को सुधारने की भी एक अप्रत्यक्ष चुनौती रही है. लिहाजा इस फैसले के साथ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि वे भारत के साथ बातचीत के पक्ष में हैं.
हालांकि माना जा रहा है कि अगर पाकिस्तान जल्द ही भारतीय वायुसेना के पायलट अभिनंदन को नहीं छोड़ता तो उसे वैसे भी जेनेवा कन्वेंशन के तहत विंग कमांडर को छोड़ना पड़ता. लिहाजा पाकिस्तान ने पहले ही अपनी तरफ से पायलट को छोड़ने का एलान कर दिया जिससे दुनिया में उसकी सकारात्मक छवि बन सके. भारत-पाक के बीच जारी तनाव को देखते हुए ये एक अच्छी खबर कही जा सकती है.
क्या कहता है जेनेवा कन्वेंशन- नियमों के मुताबिक, जंगी कैदी का संरक्षण का दर्जा अंतरराष्ट्रीय सशस्त्र संघर्षों में ही लागू होता है.
- इसके मुताबिक, उनकी हिरासत सज़ा के तौर पर नहीं होती है बल्कि इसका मकसद संघर्ष में उन्हें फिर से हिस्सा लेने से रोकना होता है.
- युद्ध खत्म होने के बाद उन्हें रिहा किया जाना चाहिए और बिना किसी देरी के वतन वापस भेजना चाहिए.
- हिरासत में लेने वाली शक्ति उनके खिलाफ संभावित युद्ध अपराध के लिए मुकदमा चला सकती है लेकिन हिंसा की कार्रवाई के लिए नहीं जो अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के तहत विधिपूर्ण है.
- नियम साफतौर पर कहते हैं कि जंगी कैदियों के साथ हर परिस्थिति में मानवीय तरीके से सलूक किया जाना चाहिए.
- जिनेवा संधि कहती है कि वह हिंसा की किसी भी कार्रवाई के साथ-साथ डराने, अपमानित करने और सार्वजनिक नुमाइश से पूरी तरह से सरंक्षित हैं. इसलिए जेनेवा कन्वेंशन के नियमों के मुताबिक पाकिस्तान को विंग कमांडर की रक्षा करनी होगी.
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