भारत ने किया ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ब्रह्मोस मिसाइल का नई टेक्नॉलजी के साथ आज सफल परीक्षण करने के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और टीम ब्रह्मोस को बधाई दी.

बालेश्वर: भारत ने ओडिशा के तट पर स्थित परीक्षण रेंज से भारत रूस के संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का आज सफल परीक्षण किया. यह परीक्षण इस मिसाइल की कुछ नई विशेषताओं की पुष्टि करने के लिए किया गया है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अधिकारियों ने बताया कि यहां नजदीक में चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) के प्रक्षेपण पेड 3 पर मोबाइल लॉन्चर से सुबह 10 बजकर 40 मिनट पर मिसाइल को लॉन्च किया गया.
आईटीआर के एक अधिकारी ने बताया कि यह परीक्षण डीआरडीओ और टीम ब्रह्मोस द्वारा पहली बार भारत में विकसित ‘जीवन विस्तार’ प्रोद्योगिकियों की पुष्टि करने के लिए किया गया था. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने ब्रह्मोस मिसाइल का नई टेक्नॉलजी के साथ आज सफल परीक्षण करने के लिए डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और टीम ब्रह्मोस को बधाई दी.
निर्मला सीतारमरण के ऑफिस ने ट्विटर पर पोस्ट किया, ‘‘निर्मला सीतारमण ब्रह्मोस मिसाइल के जीवन विस्तार की पुष्टि करने के लिए बालेश्वर के आईटीआर से 21 मई 2018 को सुबह 10 बजकर 40 पर सफल परीक्षण के लिए टीम ब्रह्मोस और डीआरडीओ को बधाई देती हैं. इन प्रौद्योगिकियों को पहली बार भारत में विकसित किया गया है.’’
Smt @nsitharaman congratulates Team Brahmos & @DRDO_India for successful flight test carried out at 1040 hrs on 21 May 2018 from ITR, Balasore to validate BRAHMOS missile life extension technologies developed for the first time in India. 1/2
— Raksha Mantri (@DefenceMinIndia) May 21, 2018
इसने कहा कि सफल परीक्षण के नतीजतन भारतीय सशस्त्र बलों के भंडार में रखी मिसाइलों की जगह दूसरी मिसाइलें लाने पर आने वाली लागत में भारी बचत होगी.The successful test will result in huge savings of replacement cost of missiles held in the inventory of Indian Armed Forces. 2/2
— Raksha Mantri (@DefenceMinIndia) May 21, 2018
डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने कहा कि दो चरणों वाली मिसाइल को पहले ही थल सेना और नौसेना में शामिल किया जा चुका है. इसके साथ ही वायु सेना के संस्करण का भी सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है. इन दो चरणों वाली मिसाइलों में पहली ठोस है जबकि दूसरी रैमजेट तरल प्रणोदक है. उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस के संस्करणों को भूमि, वायु, समुद्र और जल के अंदर से दागा जा सकता है. भारत ने पहली बार नवंबर 2017 में बंगाल की खाड़ी में सुखोई -30 एमकेआई लड़ाकू विमान से दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था.
Source: IOCL























