पहलगाम हमले का बदला! सुरक्षाबलों ने पाकिस्तानी आतंकी को किया ढेर
लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को जम्मू-कश्मीर के बडगाम में सुरक्षाबलों ने मार गिराया है. पाकिस्तानी आतंकी मूसा पहलगाम आतंकी हमले में वांछित था.

मध्य कश्मीर के यूसमर्ग इलाके में मंगलवार देर रात से चल रही मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर मारा गया है. वह पहलगाम हमले में वांछित आतंकी था. सुरक्षा बलों के मुताबिक, मारे गए आतंकी की पहचान मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के रूप में हुई है. स्थानीय स्तर पर उसे सुलेमान शाह उर्फ फौजी मूसा के नाम से भी पहचाने जाने की बात सामने आई है.
बुधवार सुबह पालमेदान इलाके में तलाशी के दौरान उसका शव और युद्ध जैसी सामग्री बरामद की गई. सुरक्षा बलों को इलाके में तीन और आतंकियों के छिपे होने की आशंका है. पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान जारी है.
खुफिया सूचना पर शुरू हुआ ऑपरेशन
सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मंगलवार देर रात यूसमर्ग के कोरग इलाके में खुफिया सूचना के आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया. अभियान के दौरान सुरक्षा बलों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी. जवानों ने जब आतंकियों को चुनौती दी तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी. इसके बाद सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच भीषण गोलीबारी हुई, जिसमें मूसा मारा गया.
श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने भी मूसा के मारे जाने की पुष्टि की. चिनार कोर के मुताबिक, बुधवार सुबह पालमेदान इलाके में तलाशी के दौरान पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा का शव युद्ध जैसी सामग्री के साथ बरामद हुआ.
घने जंगलों में पूरी रात चला अभियान
सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है. घने जंगल और पहाड़ी भूभाग को देखते हुए जवान बेहद सतर्कता के साथ अभियान आगे बढ़ा रहे हैं. सुरक्षा बलों की कोशिश आतंकियों के संभावित भागने के रास्तों को बंद करने की है. तीन अन्य आतंकियों की मौजूदगी की आशंका के चलते तलाशी अभियान जारी है और बुधवार सुबह इसे और तेज किए जाने की तैयारी है.
खूंखार आतंकी था मूसा, 2022 में की थी घुसपैठ
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, मूसा वर्ष 2022 में घुसपैठ के जरिए कश्मीर घाटी में दाखिल हुआ था. इसके बाद वह इलाके में अपना नेटवर्क सक्रिय करने में जुटा था. उसके पीर पंजाल के दोनों ओर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने और युवाओं को आतंकी संगठनों में भर्ती करने में भूमिका की जानकारी भी सामने आई थी. लश्कर-ए-तैयबा में शामिल होने से पहले उसके पाकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में कमांडो के तौर पर काम करने की बात भी सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने कही है.
पहलगाम हमले में भी वांछित था हाशिम मूसा
हाशिम मूसा का नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख संदिग्धों में शामिल था. इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी. हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पाकिस्तान के नागरिकों और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों आदिल हुसैन ठोकर, अली भाई और हाशिम मूसा की गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना के लिए 20 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की थी.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में सात आरोपियों के खिलाफ 1,597 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी. इसमें पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा और उसके दूसरे नाम द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को भी आरोपी बनाया गया था. दोनों प्रतिबंधित आतंकी संगठन हैं. NIA ने चार्जशीट में हमले की साजिश, उसकी तैयारी और उसे अंजाम देने में पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क की भूमिका का उल्लेख किया था. पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट को भी मामले में आरोपी बनाया गया है.
जम्मू-कश्मीर के बडगाम में चिनार कोर की कार्रवाई में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा पाकिस्तान सेना का पूर्व एसएसजी कमांडो था. सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वह पाकिस्तानी सेना में करीब 23 साल तक सेवा दे चुका था. उसके बारे में दावा किया गया है कि वह रिटायरमेंट के बाद 2023 में जम्मू-कश्मीर में घुसा और लश्कर-ए-तैयबा का प्रमुख कमांडर बन गया.
23 साल तक पाकिस्तानी सेना में रहा
सामने आई जानकारी के अनुसार, मोहम्मद आसिफ का पाकिस्तानी सेना से जुड़ा सर्विस नंबर PA-3106947 था. वह सेना की 4th Yalghar Battalion में तैनात रहा था और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप यानी SSG कमांडो के तौर पर काम कर चुका था. दावा है कि उसकी करीब 23 साल की सैन्य सेवा रही. उसके पास पाकिस्तान का आधिकारिक पहचान पत्र यानी CNIC भी था, जिसका नंबर 37105-9228244-5 बताया गया है. यह पहचान पत्र पाकिस्तान की राष्ट्रीय डेटाबेस और पंजीकरण प्राधिकरण (NADRA) की ओर से जारी किया गया था और इसकी वैधता 2030 तक बताई गई है.
मुशर्रफ की सुरक्षा में भी तैनात रहा
जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद आसिफ ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की सुरक्षा में भी काम किया था. दावा है कि वह वर्ष 2006 से 2008 के बीच मुशर्रफ की सुरक्षा टीम का हिस्सा रहा.
रिटायरमेंट के बाद बना लश्कर कमांडर
दावे के अनुसार, पाकिस्तानी सेना से रिटायर होने के बाद मोहम्मद आसिफ वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर आया. इसके बाद उसने लश्कर-ए-तैयबा के साथ मिलकर आतंकी गतिविधियों को अंजाम देना शुरू किया और संगठन का प्रमुख कमांडर बन गया. उस पर जम्मू-कश्मीर में कई आतंकी हमलों से जुड़े होने का आरोप है. इनमें पुंछ में भारतीय वायुसेना के काफिले पर हमला, गुलमर्ग आतंकी हमला और डेरा की गली में हुआ हमला शामिल बताए जा रहे हैं.
यूसमर्ग में पहले भी मारा गया था लश्कर आतंकी
यूसमर्ग इलाके में सुरक्षा बलों ने इससे पहले 4-5 सितंबर को हुई मुठभेड़ में लश्कर के पाकिस्तानी आतंकी यासिर को मार गिराया था. उस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों को उसके एक साथी के जंगल में छिपे होने की आशंका थी. रिपोर्ट के अनुसार, उस साथी की पहचान आसिफ फौजी उर्फ मूसा के तौर पर हुई थी. इसके बाद यूसमर्ग के ऊंचाई वाले जंगलों में उसकी तलाश के लिए व्यापक अभियान चलाया गया.
पीर पंजाल में आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज
सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले दो महीनों से पीर पंजाल के घने जंगलों में सक्रिय विदेशी आतंकियों के खिलाफ अभियान तेज किया है. 4-5 सितंबर की मुठभेड़ में मारा गया यासिर वर्ष 2021 से 2024 के बीच पुंछ में सुरक्षा बलों पर हुए हमलों से जुड़ा बताया गया था. सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, यासिर और उसके साथियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी. लगातार अभियानों के बाद उनके पीर पंजाल के जंगलों की ओर जाने की जानकारी सामने आई थी.
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