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कर्नाटक विधानसभा चुनाव: जानें 222 सीटों पर हुए चुनाव से जुड़ी हर एक बात
तीन महीने से ज्यादा समय तक चली कर्नाटक में चुनाव सरगर्मी के बाद आज कर्नाटक में किसकी बनेगी सरकार ये फैसला हो जाएगा. अब से चंद मिनटों के बाद कर्नाटक विधानसभा के चुनावी नतीजे आने शुरू हो जाएंगे.

बेंगलुरूः तीन महीने से ज्यादा समय तक चली कर्नाटक में चुनाव सरगर्मी के बाद आज कर्नाटक में किसकी बनेगी सरकार ये फैसला हो जाएगा. अब से चंद मिनटों के बाद कर्नाटक विधानसभा के चुनावी नतीजे आने शुरू हो जाएंगे. त्रिकोणीय मुकाबले में नई विधानसभा चुनने के लिए मतदान हुआ है. राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा की 222 सीटों के लिए हुई वोटिंग में मतदाताओं की किस्मत आज खुलेगी. एक सीट पर मतदान बीजेपी प्रत्याशी और वर्तमान विधायक बी एन विजयकुमार के निधन के चलते स्थगित कर दिया गया है, जबकि एक और सीट पर मतदान 10 हजार फर्जी वोटर आईडी कार्ड मिलने के बाद चुनाव आयोग ने रद्द किया. ज्यादातर सर्वेक्षणों और ओपिनियन पोल के मुताबिक सत्तारुढ़ कांग्रेस और बीजेपी सत्ता के दो प्रबल दावेदार हैं जबकि पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा का जनता दल सेकुलर किंगमेकर की भूमिका निभा सकता है. राज्य में 4.98 करोड़ से ज्यादा मतदाता राज्य में 4.98 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं जिन्होंने 2600 से ज्यादा उम्मीदवारों के बीच से अपने प्रतिनिधियों का फैसला इवीएम मशीन में कैद कर दिया है. इन मतदाताओं में 2.52 करोड़ से ज्यादा पुरुष, करीब 2.44 महिलाएं और 4552 ट्रांसजेंडर हैं. 55,600 से ज्यादा मतदान केंद्रों पर कैद हुई उम्मीदवारों की किस्मत: चुनाव कार्यालय ने बताया कि राज्य में 55,600 से ज्यादा मतदान केंद्र बनाये गये. कुछ सहायक मतदान केंद्र भी बनाए गए. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए 3.5 लाख से ज्यादा कर्मी चुनाव ड्यूटी पर तैनात रहे. जनजातीय क्षेत्रों में कुछ मतदान केंद्र संबंधित स्थान के पारंपरिक रुप में नजर आए. पहली बार कुछ चुनिंदा मतदान केंद्रों पर दिव्यांग कर्मचारी भी ड्यूटी पर रहे. इस बार कर्नाटक चुनाव में मतदाताओं ने मोबाइल एप्प के अनुसार मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की कतार की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली. वैसे 1985 के बाद से कर्नाटक में कोई भी दल लगातार दूसरी बार सत्ता में नहीं आ पाया है. उस साल रामकृष्ण हेगड़े की अगुवाई में जनता दल फिर सत्ता पर काबिज हुआ था. बीजेपी कर्नाटक में अपनी सरकार बनाने के लिए जुटी: कांग्रेस, पंजाब के बाद एकमात्र बड़े राज्य पर काबिज रहने के लक्ष्य पर केंद्रित है जबकि बीजेपी कर्नाटक में अपनी सरकार बनाने के लिए जुटी हुई है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि कर्नाटक पार्टी के लिए दूसरी बार दक्षिण में कदम रखने का द्वार होगा. वैसे बीजेपी ने सिर्फ एक बार 2008 से 2013 के बीच कर्नाटक में शासन किया था लेकिन उसका कार्यकाल पार्टी की अंदरुनी कलह और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा रहा था. उसके तीन मुख्यमंत्रियों में से एक और फिलहाल मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बी एस येद्दयुरप्पा भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में थे. जनता दल सेकुलर के अध्यक्ष एच डी कुमारस्वामी ने मानना है कि उनकी पार्टी के लिए यह जीवन-मरण का सवाल है. जेडीएस फिलहाल एक दशक से सत्ता से बाहर है. लगातार सत्ता में नहीं आने के चलन को तोड़ेगी कांग्रेस: कांग्रेस को विश्वास है कि वह लगातार सत्ता में नहीं आने के चलन को तोड़ेगी और सिद्धरमैया ने कहा कि उनकी पार्टी इतिहास रचेगी. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मुझसे अक्सर कहा जाता है कि इतिहास मेरे विरुद्ध है क्योंकि लंबे समय से कर्नाटक में किसी सरकार का पुनर्निर्वाचन नहीं हुआ. लेकिन हम यहां इतिहास रचने के लिए हैं, न कि उसे मानने के लिए.’’ कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने चुनाव परिणाम से ठीक पहले ये भी कहा है कि 'वो दलित सीएम के लिए अपना पद छोड़ सकते हैं.' उधर कांग्रेस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बीजेपी ने यह सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी कि इतिहास फिर दोहराया ना जाए. वैसे बीजेपी ने ‘मिशन 150 सीट’ के साथ अपना अभियान शुरु किया था लेकिन शाह ने इसके बाद कहा कि पार्टी 130 से ज्यादा सीटें जीतेंगी. 2013 के विपरीत बीजेपी इस बार एकजुट है. 2013 में वह येद्दियुरप्पा की केजीपी, बी श्रीरामुलू की बीएसआर कांग्रेस जैसे धड़ों में बंटी थी. चार वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्रियों की किस्मत कैद: सिद्धरमैया समेत चार वर्तमान एवं पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव मैदान में हैं. येद्दियुरप्पा शिकारीपुरा से, कुमारस्वामी चेन्नापटना और रमनगारा से और बीजेपी के जगदीश शेट्टार हुब्बली धारवाड़ से चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं.
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Source: IOCL























