एक्सप्लोरर
दिल्ली: जहरीली हवा के कारण सांस लेना मुश्किल, लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलने की सलाह
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में रविवार सुबह वायु की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में आ गई है. इस कारण लोगों को घर की खिड़कियों को बंद रखने के अलावा बाहर निकलने पर मास्क पहनने की सलाह दी गई है.

नई दिल्ली: दिल्ली में वायु प्रदूषण की हालत चिंता जनक होती जा रही है. रविवार को पूरी दिल्ली के आसमान पर मोटी धुंध की चादर छाई रही. इसके कारण दिल्ली में रविवार को वायु की सबसे खराब गुणवत्ता दर्ज की गई. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण के लिए पड़ोसी राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) बढ़ती प्रदूषण के कारण दिल्ली के लोगों, विशेषकर ह्रदय, फेफड़ों के रोग से प्रभावित बुजुर्गों और बच्चों को लंबे समय तक अधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में नहीं ठहरने की सलाह दी है. लोगों को घर की खिड़कियों को बंद रखने के अलावा बाहर निकलने पर मास्क पहनने की सलाह दी गई है. केजरीवाल ने कहा कि हर साल दिल्ली को हरियाणा, केंद्र और पंजाब की बीजेपी और कांग्रेस सरकारों की वजह से दम घोंटने वाले प्रदूषण को झेलना पड़ता है. उन्होंने कहा कि हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद पड़ोसी राज्यों की सरकार कुछ करने को तैयार नहीं है. केजरीवाल ने कहा कि इन राज्यों के किसान भी अपनी सरकारों से परेशान हैं. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी में रविवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 381 दर्ज किया गया जो बेहद खराब की श्रेणी में आता है. इस मौसम में खराब वायु गुणवत्ता का यह सबसे अधिक सूचकांक है जो प्रदूषण के गंभीर स्तर से कुछ ही नीचे है. एनसीआर क्षेत्र में गाजियाबाद और गुड़गांव में प्रदूषण का स्तर 'गंभीर' रिकॉर्ड किया गया.
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में भी वायु की गुणवत्ता बहुत खराब रही. अधिकारियों ने हवा की गुणवत्ता में आई इस गिरावट के पीछे निर्माण कार्य से उड़ने वाली धूल, वाहनों से होने वाले प्रदूषण जैसे स्थानीय कारकों के अलावा पंजाब और हरियाणा से पराली जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण को जिम्मेदार ठहराया. अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में धुएं के कारण धुंध की एक मोटी चादर छाई रही और इस कारण यहां वायु की गुणवत्ता सबसे खराब दर्ज की गई. केंद्र सरकार के सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (सफर) ने कहा कि प्रदूषण के बहुत खराब से ऊपरी स्तर तक बढ़ने की आशंका है लेकिन यह अगले तीन दिन में ‘गंभीर’ स्तर पर नहीं जाएगा. सीपीसीबी की अगुवाई वाले कार्य बल ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण को 1 से 10 नवंबर तक कड़े उपाय करने की सिफारिश की है. प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए बोर्ड कोयले और बायोमास से चलने वाली फैक्ट्रियों को बंद करना, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच में तेजी और एक से 10 नवंबर के बीच दिल्ली-एनसीआर में यातायात जाम को नियंत्रित करने आदि विचारों पर गौर कर सकती है. सीपीसीबी की कार्यबल ने दीवाली से पहले दिल्ली में वायु गुणवत्ता और खराब होने की आशंका जताई है. कार्य बल ने जनता को सलाह दी कि वे बाहरी गतिविधियों से बचें और निजी वाहनों के उपयोग को कम करें. इसने यह भी चेतावनी दी है कि नवंबर की शुरूआत से स्थिति और खराब हो सकती है. यह भी पढ़ें- थरूर ने पीएम मोदी को बताया 'शिवलिंग पर बैठा बिच्छू', ये पहला मौका नहीं जब बयान पर हो रहा विवाद जापान: भारतीय समुदाय के बीच पीएम मोदी ने गिनाईं उपलब्धियां, कहा- जमीन से अंतरिक्ष तक हो रहे कई बदलाव देखें वीडियो-पूरा साल दिल्ली में प्रदूषण ठीक रहा।
पर इस वक़्त हर साल दिल्ली को हरियाणा, केंद्र और पंजाब की भाजपा और कांग्रेस सरकारों की वजह से दम घोंटने वाले प्रदूषण को झेलना पड़ता है। हमारी तमाम कोशिशों के बावजूद ये कुछ करने को तैयार नहीं। इन राज्यों के किसान भी अपनी सरकारों से परेशान हैं https://t.co/wIanlvcuzb — Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) October 29, 2018
और पढ़ें
Source: IOCL


























