कोरोना संकट के चलते पहले से कितना बदल जाएगा दिल्ली मेट्रो में सफर, पढ़ें पूरी जानकारी
अब थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही लोग स्टेशन के अंदर जा सकेंगे ताकि मेट्रो स्टेशन पर भीड़ कम होहर एक यात्री के फोन में आरोग्य सेतु एप होना भी जरूरी होगा तभी एंट्री की इजाजत मिलेगी

नई दिल्ली: कोरोना काल से गुजर रहे देश में काफी कुछ बदल रहा है. खासतौर पर घर से बाहर निकलने के बाद अब तस्वीरें पहले से बिल्कुल अलग होंगी. खास तौर पर बात की जाए सार्वजनिक परिवहन की यानी कि हवाई यात्रा, रेल यात्रा, बस यात्रा, टैक्सी यात्रा या मेट्रो यात्रा की. पिछले करीब 55 दिनों से दिल्ली मेट्रो भी पूरी तरीके से थम गई है. लेकिन अब जब उसको एक बार फिर से चलाने की तैयारी शुरू हो रही है. पहले की तुलना में अब दिल्ली मेट्रो में सफर करना बदल जाएगा.
अंदर दाखिल होने से पहले होगी थर्मल स्क्रीनिंग
सबसे पहले मेट्रो स्टेशन के अंदर दाखिल होने के लिए पहले कहीं कोई चेकिंग नहीं होती थी हालांकि सुरक्षाकर्मी तैनात जरूर होते थे लेकिन वह किसी आने जाने वाले को रोककर उसे पहचान पत्र या उसकी जांच नहीं करते थे. लेकिन अब अगर किसी मेट्रो यात्री को मेट्रो स्टेशन के अंदर भी जाना होगा तो पहले मुख्य द्वार के पास ही एक कर्मी तैनात होगा जो हर अंदर आने वाले यात्री की थर्मल स्कैनिंग करेगा, स्कैनिंग रिपोर्ट सही आने के बाद भी यात्री को अंदर स्टेशन के लिए जाने की अनुमति मिलेगी. लेकिन इस दौरान यह भी ध्यान रखा जाएगा कि जो भी यात्री मेट्रो स्टेशन के अंदर जा रहा है वह मास्क लगाए हुए हैं या नहीं, क्योंकि मास्क लगाना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही हर एक यात्री के फोन में आरोग्य सेतु एप होना भी जरूरी होगा. यह सब सुनिश्चित करने के बाद ही किसी यात्री को स्टेशन परिसर में अंदर जाने की अनुमति मिलेगी.
अंदर जाते समय भी सोशल डिस्टेंसिंग का करना होगा पालन
स्टेशन के अंदर जाने के लिए भी ऐसा नहीं है कि पहले की तरह लोग एक साथ अंदर जा सकेंगे. थर्मल स्क्रीनिंग के बाद एक-एक कर लोगों को अंदर जाने की अनुमति होगी जिससे कि लोग भीड़-भाड़ का हिस्सा ना बने और अंदर जाते समय भीड़ ना हो. जबकि पहले ऐसा नहीं होता था पहले हर यात्री बिना किसी रोक-टोक के अंदर आ जा सकता था.
स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल कर यात्रा करने पर दिया जाएगा जोर
रेलवे स्टेशन की तरफ अंदर पहुंचने पर जो यात्री टोकन से यात्रा करते थे अब उनको मुश्किल पेश आ सकती है क्योंकि फिलहाल शुरुआती चरण में मेट्रो कोशिश कर रहा है कि टोकन का इस्तेमाल ना किया जाए तो बेहतर होगा. इस वजह से प्राथमिकता उन लोगों को मिलेगी जो लोग स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल कर रहे होंगे. मेट्रो की कोशिश यही है कि कुछ जगहों पर सेंसर मशीन वाले सैनिटाइजर भी लगाए जाएं जिससे कि यात्री बिना किसी चीज को छुए अपने हाथ में सैनिटाइजर लेकर खुद को सैनिटाइज कर सकें.
जांच के दौरान ही सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन
अंदर पहुंचने के बाद जहां पर सुरक्षा जांच होती है वहां पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाया जाएगा. यानी कि सुरक्षाकर्मी जो डिटेक्टर से यात्री की जांच करते हैं उन तक पहुंचने के लिए भी मेट्रो प्रशासन ने दूर-दूर मार्किंग कर दी है जिससे कि जो भी लोग सुरक्षाकर्मी तक पहुंचने के लिए लाइन में लगे वह भी एक निश्चित दूरी पर रहे. पहले लाइन में कोई दूरी का पालन नहीं होता था हर यात्री एक दूसरे के साथ में खड़ा रहता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.
सुरक्षाकर्मी भी बरतेंगे पूरी सावधानी
इसके बाद पहले की तरह ही सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे जहां पर यात्रियों का सामान स्कैन होने के बाद और यात्रियों की तलाशी लेने के बाद उनको अंदर जाने की अनुमति मिलेगी. जो सुरक्षाकर्मी यहां पर तैनात होंगे वह पूरी तरह से सावधानियां बरतते नज़र आएंगे. मसलन मुंह पर मास्क, हाथों में ग्लव्स और लगातार सैनिटाइजर का इस्तेमाल करेंगे सुरक्षाकर्मी. सुरक्षाकर्मी जांच के लिए डिटेक्टर मशीन का सहारा लेंगे ना कि हाथ से किसी भी यात्री को छूकर जांच करेंगे.
प्लेटफॉर्म की तरफ जाने पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का होगा पालन
प्लेटफार्म तक जाने के लिए जो इलेक्ट्रॉनिक एंट्री गेट लगा होता है वहां पर भी पहुंचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होगा. सुरक्षाकर्मी गिने चुने लोगों को ही आगे बढ़ने की इजाजत देंगे और जब यात्री एंट्री गेट से अंदर चला जाएगा उसके बाद ही दूसरे यात्री को इलेक्ट्रॉनिक एंट्री गेट पर आने की अनुमति होगी, जहां पर वह अपना स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल कर स्टेशन के अंदर प्लेटफॉर्म की तरफ प्रवेश कर सकते हैं.
लिफ्ट और एस्केलेटर को लगातार किया जाएगा सैनिटाइज
इसके बाद मेट्रो स्टेशन जाने के लिए अगर लिफ्ट किया एस्केलेटर का सहारा लेना है तो वहां पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाएगा. लिफ्ट और एस्केलेटर को लगातार सैनिटाइज भी किया जाएगा जिससे कि कोरोनावायरस के किसी भी संभावित संक्रमण को रोका जा सके.
प्लेटफार्म पर भी जगह-जगह की गई है मार्किंग
प्लेटफॉर्म पर पहुंचने के बाद वहां पर भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा. इस दौरान मेट्रो के कर्मचारी भी प्लेटफॉर्म के आसपास मौजूद रह सकते हैं जो यह सुनिश्चित करेंगे कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. प्लेटफार्म पर जगह-जगह मार्किंग की गई है और लोग उसी के अनुसार वहां पर खड़े हो सकते हैं. जब मेट्रो आएगी तो वहां पर खड़े होने के लिए कुछ कुछ दूरी पर मार्किंग की गई है हर यात्री को उसी मार्किंग के हिसाब से खड़ा होना होगा. मेट्रो के अंदर दाखिल होने से पहले बाहर निकलने वाले यात्रियों के लिए रास्ता खाली रखना. जब एक बार ट्रेन के अंदर के यात्री बाहर निकल आएंगे तो बाहर वाले यात्री अपने नंबर के हिसाब से अंदर दाखिल होंगे.
मेट्रो के अंदर सीट पर भी 6-7 यात्रियों की जगह 2 से 3 यात्री ही बैठ सकेंगे
मेट्रो के अंदर पहुंचने के बाद भी अब पहले की तरह भीड़-भाड़ नहीं मिलेगी. पहले मेट्रो के अंदर दाखिल होना ही एक बड़ी चुनौती भी होता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. मेट्रो के अंदर गिने-चुने लोग ही मौजूद होंगे कोई भी यात्री खड़ा नहीं होगा और जो यात्री अंदर मौजूद होंगे वह एक-एक सीट छोड़कर बैठेंगे. मेट्रो के अंदर बड़ी वाली सीटों पर 6 से 7 यात्री बैठते थे लेकिन अब उस सीट पर 2 से 3 यात्री ही सफर करेंगे वही जो यात्रियों वाली सीट पर एक यात्री ही बैठेगा और इसके लिए सीटों पर भी मार्किंग की गई है जिससे की यात्री उसी मार्किंग का पालन करते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर सकें. मेट्रो तभी स्टेशन से आगे बढ़ेगी जब यात्री अपनी-अपनी सीटों पर बैठ चुके होंगे. सफर के दौरान कोई भी यात्री खड़े होकर सफर नहीं करेगा इससे सोशल डिस्टेंसिंग भी मेंटेन की जाएगी और अमूमन यात्री जो हैंडल या मेट्रो में लगे पोल को सपोर्ट के लिए पकड़ लेते थे वह भी नहीं होगा.
सफर के दौरान लगातार कोरोना से सावधानी और बचाव को लेकर होगा अनाउंसमेंट
मेट्रो में सफर के दौरान लगातार अराउसमेंट होता रहेगा. पहले जो अनाउंसमेंट रेलवे स्टेशन आने को लेकर और बाकी सुरक्षा को लेकर किये जाते थे अब उसी में सोशल डिस्टेंसिंग मेंटेन करने और कोरोना से कैसे लड़ना है इसको लेकर भी जानकारी दी जाएगी. इस दौरान हर एक यात्री को मास्क लगाए रहना अनिवार्य होगा.
बाहर निकलने के दौरान भी करना होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन
यात्री मेट्रो स्टेशन आने के बाद भी भीड़ लगाकर नहीं उतरेंगे क्योंकि मेट्रो में गिने-चुने लोग ही सफर कर रहे होंगे लिहाजा हर एक यात्री सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए एक-एक कर मेट्रो से बाहर निकलेगा. इस दौरान भी यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी कि यात्री कम से कम लोगों के संपर्क में आए.बाहर निकलने के दौरान भी लगातार सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना जरूरी होगा. एक यात्री दूसरे यात्री से एक निश्चित दूरी बनाकर ही चलेगा और जो एग्जिट गेट होगा वहां पर भी एक-एक कर यात्री एक निश्चित दूरी पर लाइन बनाकर खड़े होंगे और जब एक यात्री एग्जिट गेट के बाहर निकल जाएगा तब दूसरा शख्स एग्जिट गेट पर पहुंचेगा.
मेट्रो स्टेशन पर लगातार चलता रहेगा सैनिटाइजेशन का काम
इस सब के दौरान मेट्रो स्टेशन पर लगातार सैनिटाइजेशन का काम चलता रहेगा. लगातार घोषणा की जाती रहेंगी जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने, आरोग्य सेतु का इस्तेमाल करने, मास्क लगातार पहने रहने और खुद को सतर्क और सैनिटाइजर रखने को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा.
मेट्रो में गिने-चुने यात्री ही कर सकेंगे सफर
जानकारी ऐसी भी सामने आ रही है कि शुरुआत में एक मेट्रो में औसतन 60 से 70 लोग ही सफर कर पाएंगे अमूमन पहले जो संख्या 250 से 300 यात्रियों तक की होती थी. इसके साथ ही जो मेट्रो स्टेशन कंटेनमेंट ज़ोन के आसपास के इलाकों में होंगे वहां पर मेट्रो स्टेशन फिलहाल शुरुआती तौर पर नहीं खोले जाएंगे. शुरुआती जानकारी के मुताबिक तो एमरजेंसी सर्विसेज का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए ही मेट्रो चलाई जाएगी और अभी इस पर विचार चल रहा है कि कि मेट्रो की सेवा क्या पूरे दिन चलानी है या फिर सुबह और शाम कुछ कुछ घंटों के लिए. इस पूरी कवायद का मकसद यही है कि लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग के साथ ही थोड़ी सहूलियत प्रदान की जा सके. जिससे कि कामकाज भी शुरू हो सके लेकिन इस सबके बीच कोरोना संक्रमण को फैलने से भी रोका जा सके.
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Source: IOCL


























