भारत सरकार ने माना कि डोकलाम में चीन ने बनाए हैं हैलीपैड, सैटेलाइट तस्वीरों से मिले प्रमाण
चीन ने डोकलाम में हैलीपैड बना लिए हैं. देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद इस बात को स्वीकार किया है. माना जा रहा है कि चीन इस क्षेत्र में अपना दबदबा और भारत पर दबाव बनाने के लिए डोकलाम विवाद को थमने नहीं दे रहा है.

नई दिल्ली: चीन ने डोकलाम में हैलीपैड बना लिए हैं. देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने खुद इस बात को स्वीकार किया है. माना जा रहा है कि चीन इस क्षेत्र में अपना दबदबा और भारत पर दबाव बनाने के लिए डोकलाम विवाद को थमने नहीं दे रहा है. कुछ वक्त पहले दोनों ओर से काफी तनातनी हो गई थी जिसके बाद कुछ वक्त के लिए शांति छा गई. लेकिन अब चीन फिर से उकसाने वाले काम कर रहा है. चीन इस इलाके में लगातार निर्माण कार्य कर रहा है जो सैटेलाइट तस्वीरों में भी दिखाई दे रहा है.
सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में साफ दिख रहा है कि चीन ने डोकलाम में भारी निर्माण कार्य किया है और हैलीपैड भी बना लिए हैं. ये तस्वीरें डोकलाम में चीनी साजिश का जीता जागता सबूत है. इन तस्वीरों में चीन के सैनिक दिख रहे हैं, टैंक दिख रहे हैं और यहां तक हैलीपैड भी नजर आ रहे हैं. यानि चीन एक बार फिर डोकलाम में टेढ़ी चाल चलने की तैयारी कर रहा है.
इन तस्वीरों का पूरा सच क्या है इसे लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे. राज्यसभा में कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा ने सीधे सरकार से इन तस्वीरों के सच पर सवाल पूछा जिसके जवाब में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामण ने माना कि चीन ने डोकलाम के पास हैलीपैड का निर्माण किया है.

रक्षामंत्री ने अपने बयान में कहा कि 2017 में गतिरोध के समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने फिर से जवानों को अपनी-अपनी स्थितियों से दूर तैनात किया. हालांकि दोनों पक्षों के सैनिकों की संख्या कम है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के जवान सर्दी के मौसम में भी इलाके में टिके रहें, इसके लिए चीन ने संतरी चौकियों, खंदकों और हैलीपैड समेत कुछ बुनियादी ढांचों का निर्माण किया है.
ये सब कुछ डोकलाम के ट्राई जंक्शन के आस-पास हो रहा है. डोकलाम में पिछले साल दोनों देशों की सेनाएं 73 दिनों तक एक दूसरे के आमने-सामने खड़ी थीं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले साल डोकलाम पर पीछे हटने के बाद चीन फिर से भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.
ये पहला मौका नहीं है जब भारत सरकार की तरफ से चीन की साजिश का पर्दाफाश किया गया है. इससे पहले भी खुद रक्षा राज्यमंत्री सुभाष भामरे ने एक बयान में कहा था कि भारत-चीन सीमा पर स्थिति बेहद संवेदनशील है और पूर्वी सीमा पर स्थिति कभी भी खराब हो सकती है.
पिछले साल जून में शुरु हुई तनातनी के 73 दिन बाद चीन ने अगस्त में डोकलाम से अपने पैर पीछे खींच लिए थे. उसको मालूम था सर्दी का मौसम शुरु होते ही पीएलए के सैनिक वहां बिना किसी तैयारी के टिक नहीं सकते. लिहाजा इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता कि चीन पूर्वी सरहद पर फिर से विवाद को हवा दे.
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