UP में भ्रष्टाचार पर CBI का बड़ा प्रहार, बड़ौदा ग्रामीण बैंक में मारा छापा, मैनेजर गिरफ्तार
CBI Raid in UP: परशुरामपुर के निवासी सचिन मौर्या ने मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत लोन की दूसरी किस्त के भुगतान के लिए बैंक कर्मचारी और मैनेजर की ओर से रिश्वत की मांग पर CBI से शिकायत की थी.

उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के परशुरामपुर क्षेत्र स्थित बड़ौदा यूपी ग्रामीण बैंक के मखौड़ा शाखा में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब लखनऊ से आई CBI की एंटी-करप्शन विंग (ACW) ने अचानक छापेमारी कर दी. सीबीआई की यह कार्रवाई मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत स्वीकृत लोन की दूसरी किस्त जारी करने के नाम पर मांगी गई रिश्वत के विरोध में की गई. CBI ने घंटों की कड़ी पूछताछ और बैंक के दस्तावेजों को खंगालने के बाद ब्रांच मैनेजर नवीन सिंह को गिरफ्तार कर लिया और अपने साथ लखनऊ ले गई.
जानकारी के मुताबिक, परशुरामपुर क्षेत्र के निवासी और स्थानीय दुकानदार सचिन मौर्या ने स्वरोजगार के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत लोन आवेदन किया था. लोन स्वीकृत होने के बाद पहली किस्त मिल चुकी थी, लेकिन दूसरी किस्त लंबे समय से रुकी हुई थी. आरोप है कि बैंक कर्मचारी अनिल और ब्रांच मैनेजर नवीन सिंह ने इस किस्त को जारी करने के बदले 15,000 रुपये की रिश्वत की मांग की थी. भ्रष्टाचार से तंग आकर सचिन ने इसकी शिकायत CBI लखनऊ से कर दी.
लाभुक की शिकायत के बाद CBI ने की कार्रवाई
जब बैंक में सामान्य रूप से कामकाज चल रहा था, तभी CBI अधिकारी वीके सिंह के नेतृत्व में करीब आधा दर्जन अधिकारियों की टीम बैंक परिसर में पहुंची. टीम ने पहुंचते ही सबसे पहले बैंक के गेट अंदर से बंद कर दिया और मैनेजर के केबिन को अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद सीबीआई की टीम ने मैनेजर से पूछताछ करने के बाद फाइलों को खंगाला और पुष्टि होने के बाद मैनेजर को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई.
सीबीआई ने सरकारी योजनाओं से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला
सूत्रों के मुताबिक, CBI ने मैनेजर से उनकी निजी आय और वर्तमान संपत्तियों के बारे में भी पूछताछ की. पिछले एक साल में मुख्यमंत्री उद्यमी योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत जितने भी लोन बांटे गए, उन सभी की फाइलों को कब्जे में लेकर जांच की गई. बैंक के कंप्यूटर सिस्टम और मैनेजर के मोबाइल फोन के रिकॉर्ड्स की भी जांच की गई ताकि रिश्वतखोरी के सिंडिकेट का पता लगाया जा सके.
इस पूरी कार्रवाई के दौरान गोपनीयता का स्तर इतना ऊंचा था कि स्थानीय परशुरामपुर थाने को इसकी कानों-कान खबर नहीं हुई. अमूमन किसी भी छापेमारी में स्थानीय पुलिस का सहयोग लिया जाता है, लेकिन CBI ने इस मामले में खुद ही मोर्चा संभाला. शाम को जब टीम मैनेजर को लेकर रवाना हुई, तब जाकर क्षेत्र में खबर फैली.
सीबीआई रेड के बारे में क्या बोले स्थानीय थाना प्रभारी
सरकारी योजनाओं में कमीशनखोरी का यह मामला केवल एक बैंक मैनेजर तक सीमित नहीं माना जा रहा है. मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, जिसका उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है, उसमें इस तरह की कमीशनखोरी ने शासन-प्रशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंक में बिना सुविधा शुल्क के सरकारी लोन मिलना नामुमकिन हो गया है. परशुरामपुर थाने के प्रभारी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि सीबीआई की टीम आई थी, इसके अलावा उन्हें सीबीआई के किसी कार्यवाही के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
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Source: IOCL






















