महाराष्ट्र चुनाव: क्या उद्धव ठाकरे को सता रहा है बागी नेताओं और कार्यकर्ताओं का डर?
क्या उद्धव ठाकरे को बाग़ी नेताओं और कार्यकर्ताओं का डर सता रहा है? गठबंधन होने के बाद बीजेपी के कोटे की सीट पर से शिवसेना के इच्छुक उम्मीदवार पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी से टिकट ले सकते हैं या निर्दलीय चुनाव लड़कर शिवसेना को नुक़सान पहुँचा सकते हैं.

मुंबई: क्या उद्धव ठाकरे को बाग़ी नेताओं और कार्यकर्ताओं का डर सता रहा है? गठबंधन होने के बाद बीजेपी के कोटे की सीट पर से शिवसेना के इच्छुक उम्मीदवार पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी से टिकट ले सकते हैं या निर्दलीय चुनाव लड़कर शिवसेना को नुक़सान पहुँचा सकते हैं. इस डर को उद्धव ठाकरे ने अपनी मीटिंग में भी ज़ाहिर किया. मुंबई में हुई बैठक में उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं से ग़द्दारी नहीं करने का वचन माँगा.
उद्धव ठाकरे ने कहा- गठबंधन होने के बाद ग़द्दारी करनी नहीं है, ना बग़ावत करना है. सभी को सरकार बनने की दिशा में काम करना है. आप सभी हाथ उपर करते मुझे वचन दें कि आप सब जो भी पार्टी का निर्णय होगा उसके साथ खड़े रहेंगे.
उद्धव ठाकरे के इन शब्दों से साफ़ पता चलता है कि गठबंधन होने पर पार्टी को भावी उम्मीदवारों की नाराज़गी का डर सता रहा है. तभी गठबंधन की घोषणा होने से पहले ही उद्धव ठाकरे नाराज़गी के सुरों को कम करने के लिए अपने कार्यकर्ताओं को वचनबद्ध कर रहे हैं.
दरअसल बीजेपी-शिवसेना दोनों पार्टियों ने गठबंधन ना होने पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी. दोनों ने सभी 288 इच्छुक उम्मीदवारों को तैयारी करने के लिए कहा था. अब जिस नेता उम्मीदवार ने टिकट मिलने की आस में अपने क्षेत्र में पैसा खर्च कर तैयारी कर रखी थी उसका गठबंधन होने से नाराज़ होना स्वाभाविक है. ऐसे में यही है कि उम्मीदवार पार्टी छोड़कर बग़ावत कर पार्टी को नुक़सान पहुँचा सकते हैं.
कहा जाता है कि इन्हीं कारणों की वजह से बीजेपी-शिवसेना गठबंधन का ऐलान देरी से कर रही है. बागी उम्मीदवारों का नुक़सान बीजेपी को भी होने के आसार हैं ऐसे में बीजेपी इन उम्मीदवारों को तैयारी के लिए तैयार कम से कम समय देना चाहती है और इसीलिए टिकट घोषित करने में देरी की जा रही है.
वहीं इन बाग़ी उम्मीदवारों का फ़ायदा अपनी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे राज ठाकरे जैसे नेताओं को हो सकता है. राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के नेताओं की मानें तो गठबंधन के संकेत मिलते ही बीजेपी-शिवसेना के कई नेता उनके संपर्क में आए हैं और पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए टिकट माँग रहे हैं.
आज नासिक से शिवसेना के पार्षद दिलीप दातीर ने एमएनएस में प्रवेश किया और मंत्रालय में आत्महत्या करनेवाले किसान धर्मा पाटिल के बेटे नरेंद्र पाटिल ने भी एमएनएस में प्रवेश किया. राज ठाकरे ने इस मौक़े पर संकेत दिए कि आनेवाले दिनों में और भी लोग पार्टी में शामिल होंगे. एमएनएस अध्यक्ष राज ठाकरे ने कहा ‘हमारी पार्टी में दूसरी पार्टी से लोग आ रहे है. हम उनका स्वागत कर रहे हैं. इसी तरह मैं हर रोज़ 4-5 नाम आपको देते रहुंगा.
इस तरह और उम्मीदवार दूसरी पार्टी में ना जाएं इसलिए बीजेपी-शिवसेना ने गठबंधन की घोषणा होने से पहले ही चुनाव अर्ज़ी का AB फ़ॉर्म उम्मीदवारों को देना शुरु कर दिया. वहीं जिनको टिकट दिया जाना है उन्हें मेसेज भी भेजे गए हैं. ये सब इसलिए किया जा रहा ताकि ऐसे उम्मीदवारों को तैयारी करने का मौक़ा ना मिल सके.



















