नकदी में चंदा लेने वाली पार्टियों में अव्वल है बीजेपी

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को कैशलेश बनाने की मुहिम छेड़ रखी है और इसके लिए कानून के साथ-साथ स्कीम भी ला रहे हैं, ताकि कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा मिल सके. उन्होंने लोगों से अपील की है कि कैशलेस लेनदेन को जीवनशैली का अंग बनाए. लेकिन दिलचस्प बात ये है कि इस मुहिम में राजनीतिक पार्टियां सबसे पीछे दिख रही हैं और मोदी की पार्टी बीजेपी तो इस कतार में सबसे पीछे है.
नकदी में चंदा लेने वाली पार्टियों में मोदी की पार्टी अव्वल है.
किस पार्टी ने कितना चंदा लिया
इसी साल एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक 20 हज़ार से कम चंदा दिखाने में बीजेपी नंबर एक पर है. इस साल बीजेपी को चंदे से 872 करोड़ रुपए मिले, जिसमें उसने 434 करोड़ 67 लाख रुपए का चंदा 20 हजार से कम चंदे की शक्ल में बताया है. आपको बता दें कि 20 हज़ार रुपये से कम का चंदा कैश में लिया जाता है और इसका हिसाब-किताब चुनाव आयोग को नहीं देना पड़ता है.
कांग्रेस को इस साल करीब 207 करोड़ रुपए मिले. कांग्रेस ने बताया है कि इसमें से 65 करोड़ 58 लाख रुपए उसे 20 हजार से कम चंदे की शक्ल में मिले हैं. बीएसपी ने तो पार्टी को 92 करोड़ 80 लाख के पूरे चंदे को ही बता दिया कि वो 20 हज़ार से कम चंदे के रूप के तौर पर मिला है.
यही वजह है कि एडीआर के रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाली 75 फीसदी रकम का स्त्रोत अज्ञात है. लोकसभा चुनाव 2004 और लोकसभा चुनाव 2014 के बीच राजनीतिक दलों को मिले चंदे में 478 फीसदी का इजाफा हुआ है.
भले ही नोटबंदी के बाद सरकार डिजिटल ट्रांजेक्शन पर जोर दे रही है लेकिन साल 2004 से 2015 के बीच हुए विधानसभा चुनावों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को 2,100 करोड़ रुपये चंदा मिला, जिसका 63 फीसदी हिस्सा कैश से आया था.
फिलहाल चुनाव आयोग अपनी सिफारिश कानून मंत्रालय को भेज चुका है और उसने सरकार को इस संबंध में कानून में ज़रूरी बदलाव करने की सलाह दी है. अब ये देखऩा दिलचस्प होगा कि मोदी सरकार चुनाव आयोग के इस प्रस्ताव पर क्या करती है और क्या इस पर सभी राजनीतिक दलों की एक राय हो सकती है.
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