West Bengal News: स्कूलों में 'वंदे मातरम्' अनिवार्य करने पर घमासान, हुमायूं कबीर और BJP ने किया समर्थन
पश्चिम बंगाल सरकार ने सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य किया. फैसले पर राजनीति तेज हो गई है. हुमायूं कबीर और BJP नेताओं ने इसका खुलकर समर्थन किया.

"वंदे मातरम" को बाबरी मस्जिद वाले हुमायूं कबीर का समर्थन, कहा किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. पश्चिम बंगाल में स्कूलों की सुबह की प्रार्थना सभा में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य किए जाने के फैसले पर सियासत तेज हो गई है. राज्य सरकार ने सोमवार, 18 मई से सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ गाना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है. स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि सभी छात्र सुबह की सभा में कक्षाएं शुरू होने से पहले राष्ट्रीय गीत गाएंगे और स्कूल प्रमुख इसकी सख्ती से पालन सुनिश्चित करेंगे.
आदेश में कहा गया है, “सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का गायन अनिवार्य किया जाए, ताकि राज्य के सभी स्कूलों में सभी छात्र इसे गाएं.” शिक्षा विभाग ने स्कूलों से इस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग रखने को भी कहा है, ताकि आदेश के पालन का प्रमाण मौजूद रहे.
इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं. एजेयूपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं विधायक हुमायूं कबीर ने कहा, “‘वंदे मातरम्’ भारत का नारा और मातृभूमि का राष्ट्रीय गीत है. इसमें समस्या क्या है? पहले भी स्कूलों, कॉलेजों और कई जगहों पर ‘वंदे मातरम्’ गूंजता था। मुख्यमंत्री ने जो कहा उसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.”
Kolkata, West Bengal: AJUP National President and MLA Humayun Kabir says, "Vande Mataram’ is the slogan of India and the national anthem of the motherland. So what is the issue? Earlier, ‘Vande Mataram’ was heard in schools, colleges, and many places. So what is the problem with… pic.twitter.com/SaNbylh0Jo
— IANS (@ians_india) May 14, 2026
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प्रार्थना सभा के लेकर स्कूलों में असमंजस
वहीं भाजपा विधायक लक्ष्मीकांत साहू ने कहा, “निश्चित रूप से ‘वंदे मातरम्’ होना चाहिए. इसे बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसी धरती पर लिखा था. अगर बंगाल की धरती पर इसे अनिवार्य नहीं बनाया जाएगा, तो फिर कहां बनाया जाएगा? इससे पहले राज्य की पूर्व सरकार ने रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा रचित ‘बांग्लार माटी बांग्लार जल’ को स्कूलों की प्रार्थना सभा में अनिवार्य किया था. स्कूल प्रशासन अब इस बात को लेकर असमंजस में है कि सुबह की सभा में ‘वंदे मातरम्’, ‘बांग्लार माटी’ और राष्ट्रगान—तीनों गीतों को शामिल किया जाए या नहीं. कई प्रधानाचार्यों का कहना है कि तीन-तीन गीत गवाने से समय अधिक लगेगा और इससे कक्षाएं देर से शुरू होंगी.
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