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एटीएस ने मुंबई से सात संदिग्ध माओवादियों को गिरफ्तार किया
एक अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार देर रात शहर के पूर्वी उपनगरों में की गयी छापेमारी के बाद गिरफ्तारियां की गयीं. सूत्रों ने बताया कि दो आरोपियों के पास से भीमा कोरेगांव से संबंधित बैनर मिले हैं जहां हाल में हिंसा भड़की थी.

मुंबई: महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने महाराष्ट्र और गुजरात में माओवादी विचारधारा के प्रसार के लिए गठित गोल्डन कॉरिडोर कमेटी के लिए काम करने वाले सात संदिग्ध माओवादियों को गिरफ्तार किया है.
एक अधिकारी के मुताबिक, शुक्रवार देर रात शहर के पूर्वी उपनगरों में की गयी छापेमारी के बाद गिरफ्तारियां की गयीं. सूत्रों ने बताया कि दो आरोपियों के पास से भीमा कोरेगांव से संबंधित बैनर मिले हैं जहां हाल में हिंसा भड़की थी.
सूत्रों के मुताबिक, एटीएस इस बात की जांच करेगी कि कहीं ये आरोपी मुंबई और उपनगरों में हुई हिंसा में तो शामिल नहीं थे.
क्या है कोरेगांव से जुड़ा मामला?
महाराष्ट्र में 200 साल पुराने एक युद्ध को लेकर संग्राम हो गया था. 1 जनवरी 1818 को पुणे में राज करने वाले ब्राह्मण शासक पेशवाओं को अंग्रेजों ने दलितों के साथ मिलकर हराया. इस लड़ाई में बाजीराव पेशवा द्वितीय की हार हुई थी. इसी जीत पर दलितों ने शौर्य दिवस मनाया तो हिंदुत्ववादी संगठनों ने विरोध किया. भीमा कोरेगांव में दलित इस जीत को शौर्य दिवस की तरह मनाते आ रहे हैं. 1 जनवरी 2018 को इसी कार्यक्रम के लिए जा रहे दलितों की कुछ हिन्दुत्ववादी संगठनों के साथ झड़प हुई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई, जिसके बाद वहां जबरदस्त हिंसा हुई. पुणे, मुंबई और औरंगाबाद समेत कई शहरों में दलितों और हिन्दुत्ववादी संगठनों के लोग आमने-सामने हैं. बता दें कि दलितों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच जमकर संघर्ष हुआ. दोनों तरफ से पत्थरबाजी हुई. जिसमें राहुल नाम के एक युवक की जान चली गई. गुस्साई भीड़ ने बसों, कारों और मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया, 40 से ज्यादा वाहन जला दिए गए और एटीएम और सरकारी संस्थानों में जमकर तोड़फोड़ की. दलित संगठनों का आरोप है कि कल कोरेगावं भीमा जा रही भीड़ को भगवा झंडा लिए लोगों की भीड़ ने निशाना बनाया, जिसमें एक युवक की मौत हुई थी.और पढ़ें
Source: IOCL























