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2019 से पहले किसानों पर मेहरबान मोदी, धान का MSP 200 रुपये बढ़ेगा

सूत्रों के मुताबिक़ कैबिनेट ख़रीफ़ मौसम की जिन 14 फ़सलों के लिए जिस समर्थन मूल्य का ऐलान करेगी वो इन फ़सलों को पैदा करने में लगे ख़र्चे का कम से कम डेढ़ गुना ज़रूर होगा

नई दिल्ली: मोदी सरकार धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 200 रूपए प्रति क्विंटल की ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी कर सकती है. कल होने वाली कैबिनेट की बैठक में 2018 -19 के लिए धान समेत अन्य ख़रीफ़ फ़सलों के समर्थन मूल्य पर मुहर लग सकती है. इस साल के बजट में मोदी सरकार ने सभी फ़सलों के समर्थन मूल्य को उसकी लागत से डेढ़ गुना करने का ऐलान किया था. समर्थन मूल्य बढ़ाने से सरकार के ख़ज़ाने पर 12,000 करोड़ रूपए का ख़र्च पड़ेगा. सूत्रों के मुताबिक़ कैबिनेट ख़रीफ़ मौसम की जिन 14 फ़सलों के लिए जिस समर्थन मूल्य का ऐलान करेगी वो इन फ़सलों को पैदा करने में लगे ख़र्चे का कम से कम डेढ़ गुना ज़रूर होगा. धान के दाम में सबसे ज़्यादा बढ़ोत्तरी सूत्रों के मुताबिक धान का समर्थन मूल्य उसके मौजूदा दाम 1550 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1750 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया जाएगा .... यानि इसमें 200 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की जाएगी. सरकार ने फसलों की लागत का जो फार्मूला लगाया है इसके मुताबिक़ धान का वर्तमान समर्थन मूल्य उसकी लागत मूल्य से केवल 38 फ़ीसदी ही ज़्यादा है. ये बढ़ोत्तरी एक साल में सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी मानी जा रही है. इसके पहले यूपीए सरकार के दौरान 2008 -09 में धान के समर्थन मूल्य में 155 रूपए प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तरी की गई थी. जानें, विश्लेषण- बुधवार का दिन देश के 12 करोड़ किसानों के लिए क्यों है खास? हर साल घोषित होता है समर्थन मूल्य ख़रीफ़ मौसम में 14 फ़सलों के लिए सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है. ख़रीफ़ फ़सलों की बुवाई से पहले हर साल जून के महीने में इसका ऐलान किया जाता है ताकि किसान उसी अनुसार फ़सल उगा सकें. इनमें धान के अलावा , जोवार , बाजरा, अरहर , उड़द , मूंग , सोयाबीन ,मूंगफली और कपास जैसी फ़सलें शामिल हैं. एबीपी न्यूज़ को मिली जानकारी के मुताबिक़ इन फ़सलों में बाजरा , अरहर और उड़द को छोड़कर सभी फ़सलों का समर्थन मूल्य उनके लागत मूल्य के डेढ़ गुना से कम है. सभी फ़सलों के बढ़ेंगे न्यूनतम समर्थन मूल्य हालांकि सूत्रों के मुताबिक़ जिन फ़सलों का वर्तमान समर्थन मूल्य उसके लागत के डेढ़ गुना से ज़्यादा भी है उसके समर्थन मूल्य में भी बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव है. मूंग का समर्थन मूल्य फ़िलहाल 5575 रुपये क्विंटल है जो बढकर 6975 रुपये प्रति क्विंटल हो सकता है. वहीं उड़द का एमएसपी फिलहाल 5400 रुपये है जिसके 5600 रुपये प्रति क्विंटल होने के आसार हैं. अरहर दाल की क़ीमत फ़िलहाल 5450 रुपये प्रति क्विंटल है जो बढ़कर 5675 रुपये प्रति क्विंटल तक जा सकता है. नीति आयोग में कृषि मामलों के सदस्य रमेश चंद के मुताबिक़ , '' प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद हमारी नीति रही है कि किसानों को उनकी लागत का कम से कम डेढ़ गुना दाम ज़रूर मिले ''. कृषि लागत और मूल्य आयोग तय करती है दाम मौजूदा व्यवस्था के मुताबिक़ सरकार की संस्था कृषि लागत एवं मूल्य आयोग हर साल ख़रीफ़ और रबी फ़सलों का लागत मूल्य तय कर उनके न्यूनतम समर्थन मूल्य का प्रस्ताव सरकार को भेजती है. लागत मूल्य तय करने के लिए आयोग अलग अलग फॉर्मूले की मदद लेता है. इस साल A2 + FL के फॉर्मूले से लागत मूल्य तय किया गया है. इस फॉर्मूले के तहत बीज़, फ़र्टिलाइजर, किटनाशक , खेतों में लगने वाले लेबर और हर तरह की मशीन ( अपना या किराए का ) पर होने वाले ख़र्चे को लागत मूल्य तय करने में शामिल किया जाता है. हालांकि लागत मूल्य तय करने को लेकर एक राय नहीं रही है. कई किसान संगठन लागत मूल्य तय करने के लिए ज़मीन के दाम या रेंट को भी शामिल करने की मांग करते रहे हैं जबकि सरकार इसे व्यावहारिक नहीं मानती है. इस मामले में अहम भूमिका निभाले वाली नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा - '' देश के अलग अलग इलाक़ों में ज़मीन की क़ीमत और रेंट अलग अलग है तो फिर ये कैसे संभव हो सकता है ". कृषि संकट पर सरकार है निशाने पर चुनावी साल होने के चलते अंदाज़ा लगाना आसान नहीं है कि मोदी सरकार की इस पहल के पीछे मंशा क्या है .... ख़ासकर ऐसे समय में जब किसानों की समस्याओं को लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर और घिरती नज़र आयी है.

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