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Aditya-L1 Solar Mission: चंद्रयान-3 की तरह क्‍या आदित्‍य एल-1 में भी विक्रम और प्रज्ञान जैसे लैंडर रोवर? जानें इस स्‍पेक्राफ्ट के बारे में सबकुछ

Aditya-L1 Mission: भारत के पहला सौर मिशन आदित्य-एल1 धरती से 15 लाख किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में लैंग्रेंज 1 प्वाइंट पर स्थापित किया जाएगा. ये करीब 4 महीने में अपना सफर पूरा करेगा.

Aditya-L1 Mission Launch: अब तक भारतीय वैज्ञानिक सूर्य के अध्ययन के लिए जमीन से टेलीस्कोप का सहारा लिया करते थे या फिर नासा, यूरोपीय स्पेस एजेंसियों के मिशन से मिले आंकड़ों पर भरोसा करते थे, लेकिन अब भारत खुद सूरज की ओर छलांग लगाने जा रहा है. इसरो का आदित्य एल1 मिशन भारत को उन खास देशों के क्लब में शामिल कर देगा, जिन्होंने सूर्य के अध्ययन के लिए अपने मिशन अंतरिक्ष में भेजे हैं. 

आदित्य एल1 को धरती से 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर लैग्रेंज प्वाइंट पर स्थापित किया जाएगा. ये सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी के 1 प्रतिशतवें हिस्से पर है. इसरो के मुताबिक आदित्य एल1 को निर्धारित दूरी तय करने में करीब 4 महीने का समय लगेगा.

क्या लैंडर और रोवर भी होंगे?

आदित्य एल1 की लॉन्चिंग जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे ही सभी की उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है. इसके साथ ही आदित्य-एल1 स्पेसक्राफ्ट के बारे में भी लोग जानना चाह रहे हैं. हाल ही में चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक मून लैंडिंग अभी भी लोगों के दिमाग में ज्यादा है, ऐसे में लोगों के मन में एक सवाल ये भी है कि क्या आदित्य-एल1 में भी चंद्रयान-3 की तरह विक्रम की तरह लैंडर और प्रज्ञान की तरह से रोवर हैं.

इस सवाल का सीधा जवाब है नहीं. आदित्य एल1 में कोई लैंडर और रोवर नहीं है. किसी स्पेसक्राफ्ट में लैंडर और रोवर तब भेजे जाते हैं, जब उन्हें किसी दूसरे ग्रह या उपग्रह पर लैंडिंग करानी हो. यहां ये समझना जरूरी है कि आदित्य-एल1 सूर्य पर नहीं जा रहा, बल्कि इसे पृथ्वी की तुलना में सूर्य के करीब भेजा जा रहा है.

अंतरिक्ष में एल1 प्वाइंट पर होगी स्पेसक्राफ्ट की 'पार्किंग'

आदित्य एल1 को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंजियन प्वाइंट के चारों ओर कक्षा में स्थापित किया जाना है. इस प्वाइंट पर स्थापित करने की भी खास वजह है. ये सौरमंडल में ऐसा बिंदु है, जहां पर सूर्य और पृथ्वी एक दूसरे के गुरुत्वाकर्षण को बेअसर कर देते हैं. यानी यहां अगर किसी वस्तु को पहुंचा दिया जाए, तो न वह पृथ्वी की तरफ गिरेगी और न ही सूर्य की तरफ जाएगी. इसे पृथ्वी और सूर्य के बीच पार्किंग प्वाइंट भी कहा जाता है.

एक बार जब आदित्य-एल1 इस पार्किंग स्थान पर पहुंच जाएगा, तो यह पृथ्वी के समान गति से सूर्य की परिक्रमा करने में सक्षम होगा. इसका मतलब यह भी है कि उपग्रह को संचालित करने के लिए बहुत कम ईंधन की आवश्यकता होगी. एल1 प्वाइंट पर स्थापित होने के बाद आदित्य-एल1 सूर्य का अध्ययन शुरू करेगा. 

आदित्य-एल1 स्पेसक्राफ्ट में क्या है?

आदित्य-एल1 को पीएसएलवी-सी57 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. 44.4 मीटर लंबे इस रॉकेट की भार उठाने की क्षमता 421 टन है. इसके मुहाने पर आदित्य-एल1 अंतरिक्षयान को रखा गया है, जिसका वजन 1480.7 किलोग्राम है. आदित्य-एल1 में सात पेलोड लगे हैं, जिनमें 4 सीधे सूर्य पर नजर रखेंगे, जबकि तीन अन्य एल1 बिंदु और उसके आसपास कणों व चुंबकीय क्षेत्रों का इन सीटू (साइट पर) अध्ययन करेंगे. मिशन से सूर्य के अंदर होने वाले विस्फोटों की उत्पत्ति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सकती है.

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