The Mehta Boys Review: बोमन ईरानी वो 'वायरस' हैं जिन्हें इंडस्ट्री में और फैलना चाहिए, अविनाश तिवारी दिल जीत लेंगे, अपने पापा के साथ देखिए
The Mehta Boys Review: अमेजन प्राइम पर एक और बेहतरीन फिल्म 'द मेहता बॉयज' स्ट्रीम हो चुकी है. बाप-बेटे के रिश्ते पर बनी ये फिल्म देखना चाहते हैं तो पहले पढ़ लीजिए ये रिव्यू
बोमन ईरानी
बोमन ईरानी, अविनाश तिवारी
अमेजन प्राइम
The Mehta Boys Review: बेटा अपने पापा के साथ महंगे रेस्टोरेंट में डिनर करने जाता है और चुपके से वेटर को अपना क्रेडिट कार्ड दे देता है कि पापा को अगर पता चलेगा ये रेस्टोरेंट इतना महंगा है तो उनको अच्छा नहीं लगेगा, तो तुम मेरे कार्ड से पैसे काट लेना और बिल कम पैसों का बनाना.
हम लोग भी अक्सर ऐसा करते हैं ना? कोई महंगी चीज लाते हैं और मम्मी-पापा को सस्ती बताते हैं कि उन्हें ऐसा ना लगे हम पैसे बर्बाद कर रहे हैं. ये फिल्म एक बाप-बेटे के रिश्ते को तराशने का काम करती है. बोमन ईरानी इस फिल्म के डायरेक्टर भी हैं. वो थ्री इडियट्स के बाद से वायरस नाम से मशहूर हैं और ये फिल्म देखकर लगा कि ये वायरस फिल्म इंडस्ट्री में और फैलना चाहिए.
कहानी
ये कहानी के बाप बेटे यानी बोमन ईरानी और अविनाश तिवारी की है. दोनों में कुछ जमती नहीं है, क्यों? ये बात कहानी में समझ नहीं आती लेकिन बाप बेटे को कुछ समझाना चाहता है. ये बाप गाड़ी की हैंड ब्रेक पर हाथ रखकर गाड़ी चला रहे बेटे बगल वाली सीट पर बैठता है और बेटे को समझ नहीं आता कि पापा ऐसा क्यों करते हैं.
बेटा आर्किटेक्ट है लेकिन वहां भी कुछ कर नहीं पा रहा. कुछ तो है जो जिंदगी में अटका हुआ है. मां की मौत के बाद हालात ऐसे बनते हैं कि बाप बेटे को साथ रहना पड़ता है. अब ये दोनों अलग अलग नेचर के बाप बेटे जब साथ रहते हैं तो क्या होता है, ये आपको अमेजन प्राइम पर ये फिल्म देखकर पता चलेगा.
कैसी है फिल्म
ये फिल्म अच्छी है, ये आपको एक पिता और बेटे के रिश्ते के बारे में समझाती है. महसूस कराती है कि हमारे पैरेंट्स भले बूढ़े हो गए हों लेकिन जिंदगी का अनुभव उन्हें काफी है और इस अनुभव से हमें सीखने की कोशिश जरूर करनी चाहिए. फिल्म के कई सीन आपका दिल छू लेते हैं.
हालांकि कई सीन ऐसे भी हैं जो समझने के लिए दिमाग पर थोड़ा जोर लगाना पड़ेगा और कुछ चीजें शायद आपको समझ ना भी आएं लेकिन तब भी ये फिल्म आपको जो महसूस कराना चाहती है उसमें ये कामयाब होती है. हर किसी की एक्टिंग कमाल की है और ये एक बड़ी वजह है कि इस फिल्म की जो कुछ कमियां हैं वो आप दरकिनार कर सकते हैं. इस फिल्म को अपने पापा के साथ बैठकर देखिएगा. यकीनन आप दोनों का रिश्ता और बेहतर होगा.
एक्टिंग
बोमन ईरानी फिल्म की जान हैं. हर फ्रेम में वो कमाल हैं. उन्होंने इतनी कमाल की एक्टिंग की है कि आप फिर से उनके मुरीद हो जाते हैं. अपनी पत्नी से बात करना हो, अपने बेटे की खास दोस्त से मिलना हो,प्यार दिखाना हो, गुस्सा दिखाना हो, हर एक्स्प्रेशन में वो परफेक्ट हैं. उनकी एक्टिंग इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह है.
अविनाश तिवारी एक ऐसे एक्टर के तौर पर उभर रहे हैं जिन्हें बाकी चीजों से ज्यादा एक्टिंग के लिए जाना जाए. उनका काम बहुत कमाल है. बोमन ईरानी के साथ उनकी केमिस्ट्री जबरदस्त है. जो जैसा होना चाहिए, वैसा ही दिखता है.
उनके एक्सप्रेशन, आखिरी में उनका एक मोनोलॉग, सब कुछ शानदार लगता है. श्रैया चौधरी का काम भी काफी अच्छा है. उनकी स्क्रीन प्रेंजेस में एक करिश्मा है. बोमन के साथ उनके सीन बहुत कमाल के हैं. पूजा सरूप का रोल छोटा है लेकिन वो छोटे से रोल में भी इम्प्रेस करती हैं.
डायरेक्शन
बोमन ईरानी ने इस फिल्म को डायरेक्ट भी किया है और ये पहली बार है जब उन्होंने डायरेक्टर की कुर्सी संभाली है. जितने कमाल के वो एक्टर हैं, वो कमाल उनके डायरेक्शन में भी दिखा है.
उनकी अपनी एक्टिंग से इस फिल्म के स्केल को ऊंचा किया है. हालांकि कुछ जगह उन्हें चीजों को और सिंपल कर देना चाहिए क्योंकि इंडियन फैमिलीज में सिंपल इमोशन भी कई बार मुश्किल से ही हम लोग आपस में समझ पाते हैं लेकिन डायरेक्शन में बोमन ने शानदार काम किया है.
कुल मिलाकर ये फिल्म अपने पापा के साथ जरूर देखिए, हर हाल में देखिए.
रेटिंग- 3 स्टार्स

























