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निजी कंपनी द्वारा चंद्रमा पर पहली लैंडिंग, क्या अब आम इंसान भी कर सकेंगे चांद पर सैर?

ऐसा लग रहा है मानो आम इंसान का चांद पर जाने का सपना जल्द ही पूरा हो सकेगा. क्योंकि अमेरिका की एक प्राइवेट कम्पनी ने सफलता पूर्वक अपना विमान चांद पर उतार दिया है.

Moon Landing: आपने अब तक कई गानों में या फिल्मी डायलॉग में प्रेमी को प्रेमिका से ये वादा करते हुए सुना होगा कि वो उसे चांद की सैर कराने ले जाएगा या फिर चांद पर घर बनाएगा. पहले तो ये महज एक खयाली बातें लगा करती थीं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि जल्द ये वादे सच भी हुआ करेंगे. जी हां, हम ऐसा इसीलिए कह रहे हैं क्योंकि बावन साल बाद, एक अमेरिका निर्मित अंतरिक्ष यान शुक्रवार (23 फरवरी) को चंद्रमा पर उतरा और यह एक प्राइवेट अंतरिक्ष कंपनी का विमान है, जिससे यह भी साफ होता है कि अब जल्द ही कई कम्पनियां चांद पर अपने विमान भेजने के होड़ में जुट जाएंगी. दूसरे शब्द में कहें, तो अब चांद पर भी टूरिज्म तेज हो सकता है. इससे अपोलो मिशन के तहत एक विमान को चांद पर भेजा गया था.

कौन सी है वो प्राइवेट कम्पनी जिसने चांद पर विमान को भेजा?

ह्यूस्टन स्थित दस साल पुरानी कंपनी इंटुएटिव मशीन्स द्वारा निर्मित अंतरिक्ष यान ओडीसियस ने 15 फरवरी को पृथ्वी से उड़ान भरी थी. इसके लिए उसने स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट का इस्तेमाल किया. अंतरिक्ष यान छह नासा पेलोड्स को चंद्रमा पर ले गए थे. इसी के साथ ओडीसियस का लैंडर मॉड्यूल, जिसे नोवा-सी कहा जाता है, पिछले साल चंद्रयान-3 के बाद चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरने वाला दूसरा मॉड्यूल बन गया है. वहीं, चंद्रयान-3 और जापान के एसएलआईएम (चंद्रमा की जांच के लिए स्मार्ट लैंडर) के बाद, एक साल के भीतर यह तीसरी चंद्रमा-लैंडिंग घटना है.

क्या होगी नई शुरुआत?

ओडीसियस की लैंडिंग चंद्रमा की खोज में एक नई शुरुआत का प्रतीक है जिसका उद्देश्य चांद पर लंबे समय के लिए मानव उपस्थिति को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे को तैयार करना है. यह अमेरिका और तत्कालीन सोवियत संघ द्वारा 1960 और 1970 के दशक की चंद्रमा लैंडिंग से बहुत अलग है, जिसमें अपोलो मिशन द्वारा मानव लैंडिंग भी शामिल है. वे अपने आप में ऐतिहासिक वैज्ञानिक घटनाएँ थीं.

ये लेटेस्ट लैंडिंग केवल चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान या मनुष्यों को उतारने के बारे में नहीं है, बल्कि बुनियादी ढांचे और अर्थव्यवस्था के निर्माण के बारे में भी है, जो चंद्रमा की अधिक सार्थक खोज को बढ़ावा देगा, यहां तक कि इसके उपयोग को अंतरिक्ष में बहुत आगे तक ले जाने की अनुमति देगा.

परेशानी भरी रही शुरुआत

सीएलपीएस पहल के हिस्से के रूप में पहला प्रक्षेपण पिछले महीने एस्ट्रोबोटिक नामक कंपनी द्वारा किया गया था, लेकिन प्रक्षेपण के तुरंत बाद इसमें समस्याएं आ गईं, जिसकी वजह से ये चंद्रमा तक नहीं पहुंच सका। ओडीसियस की तरह, उस मिशन पर अंतरिक्ष यान और रॉकेट दोनों निजी कंपनियों से आए थे. हालांकि, वे असफल रहे.

नासा ने ऐसे मिशनों के लिए पहले ही 14 अंतरिक्ष कंपनियों से कॉन्ट्रैक्ट कर लिया. इन कंपनियों द्वारा 2026 तक कम से कम छह और चंद्र लैंडिंग निर्धारित की गई है. वैज्ञानिकों की इन लगातार प्रयासों को देखते हुए तो ऐसा ही लगता है कि अब वो दिन दूर नहीं, जब चांद पर इंसानों की आवाजाही शुरू हो जाएगी.

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