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भारत की नागर और द्रविड़ शैली के मंदिर का रहस्य! जानें इनके बीच का अंतर और इतिहास?

Nagara and Dravidian temples: उत्तर भारत और दक्षिण भारत के मंदिर की वास्तुकला एक दूसरे अलग है, जहां उत्तर भारत में मंदिर नागर शैली के हिसाब से बनाए गए हैं, वहीं दक्षिण भारत में द्रविड़ शैली.

Nagara and Dravidian style temples: भारत की आध्यात्मिक आत्मा हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से लेकर तमिलनाडु के तपते मैदानों तक फैले हजारों मंदिरों में वास्तुकला के जरिए प्रकट होती है. हालांकि ये मंदिर अनुष्ठान, भक्ति और आध्यात्मिक सामंजस्य की समान भावना की पूर्ति करते हैं, फिर भी इन्हें दो बेहद अलग-अलग शैलियों के अनुरूप बनाया गया है.

उत्तर भारत की नागर और दक्षिण भारत की द्रविड़ शैली एक-दूसरे के डिजाइन से बेहद अलग है. ये इतिहास, संस्कृति, जलवायु और वैश्विक नजरिए से गहरी विविधता को दर्शाते हैं. आइए जानते हैं कि इन दोनों ही भारतीय मंदिर के वास्तुकला में क्या अंतर है?

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उत्तर भारत के मंदिर नागर शैली पर आधारित

उत्तर भारत में नागर शैली की उत्पत्ति गुप्त काल (करीब 5वीं शताब्दी ईस्वी) में हुई, जिसे भारतीय कला और साहित्य का गोल्डन युग कहा जाता है. यह शैली विशेष रूप से उत्तर भारत के उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और बिहार जैसे राज्यों में खूब फली-फूली.

नागर मंदिर की खास बात उनका घुमावदार शिखर है, जो गर्भगृह के ऊपर तीव्र रूप से ऊपर की उठा रहता है. यह ऊर्ध्वाधर, ऊंचे आकार को भक्त की दृष्टि और आत्मा को ऊपर की ओर आकर्षित करने के लिए बनाया गया था, जो सांसारिक मोक्ष का प्रतीक है. 

गर्भगृह आमतौर पर अंधेरा और ध्यानमग्न वाला होता है, जो आध्यात्मिक अंतर्मुखता के लिए स्थान प्रदान करता है.

नागर मंदिर आमतौर पर छोटे होते हैं, जिनमें न्यूनतम चारदीवारी और द्वार होते हैं, और भव्यता की तुलना में अधिक ऊर्ध्वाधरता पर अधिक जोर दिया जाता है. कुछ सबसे प्रतिष्ठित नागर मंदिरों में खजुराहों का कंदरिया महादेव मंदिर, कोणार्क सूर्य मंदिर और हिमालय में स्थित केदारनाथ मंदिर शामिल है. 

द्रविड़ शैली दक्षिण क्षेत्रों पर आधारित

नागर शैली के विपरीत, द्रविड़ शैली का विकास पल्लव वंश के शासन काल में 6ठीं-7वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास शुरू हुआ, लेकिन चोल, पांड्य और बाद में विजयनगर राजाओं के शासनकाल में यह शैली काफी फली-फूली. ये मंदिर दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में प्रमुख है.

नागर मंदिरों के ऊंचे शिखरों के उलट, द्रविड़ मंदिरों में गर्भगृह के ठीक ऊपर बने पिरामिडानुमा मीनारें होती हैं, जिन्हें विमान कहा जाता है. लेकिन इनसे भी ज्यादा आकर्षण का केंद्र इनके विशाल गोपुरम होते हैं. ये भव्य प्रवेश द्वार मीनारें आमतौर पर गर्भगृह से भी बड़े होते हैं और देवी-देवताओं, राक्षसों, नर्तकियों और जानवारों की मूर्तियों से सजे होते हैं. 

द्रवि़ड़ मंदिर एक किले की तरह निर्मित होते हैं, जिनकी ऊंची दीवारें कई संकेंद्रित प्रांगणों को आपस में घेरे रहती हैं, जो परिक्रमा, धार्मिक गतिविधियों और सामुदायिक उत्सवों को प्रोत्साहित करती हैं.

ये मंदिर कठोर ग्रेनाइट से बने होते हैं, जो आर्द्र और मानसूनी जलवायु वाले दक्षिणी क्षेत्र के लिए आदर्श हैं. प्रसिद्ध उदाहरणों में तंजावुर का वृहदीश्वर मंदिर, मदुरै का मीनाक्षी मंदिर, रामेश्वरम मंदिर और हम्पी का विरुपाक्षा मंदिर शामिल हैं.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
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वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

Personal Interests की बात करें तो अंकुर को अंक शास्त्र, वैदिक ज्योतिष, वास्तु और स्वप्न शास्त्र में रुचि. साथ ही साहित्य और फिल्में देखने का शौक है.

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