शरीर में स्टेप-बाय-स्टेप कैसे घुलती है दवा, सबकुछ देख सकेंगे डॉक्टर्स
अमेरिका के स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने vCATCH नाम की एक नई इमेजिंग तकनीक विकसित की है. इस तकनीक की मदद से शरीर में दवा के सफर को एक-एक कोशिका के स्तर पर देखा जा सकता है.

शरीर में दवा लेने के बाद वह कहां जाती है, किन अंगों और किन कोशिकाओं पर असर करती है. यह अबतक मेडिकल साइंस के लिए एक बड़ी बड़ी चुनौती रही है. आमतौर पर वैज्ञानिक यह तो पता लगा लेते थे कि दवा किस अंग तक पहुंची, लेकिन यह साफ नहीं हो पता कि वह दवा उस अंग के अंदर किन-किन कोशिकाओं से जुड़ रही है. अब इस ब्लैक बॉक्स को खोलने वाली एक नई तकनीक सामने आई है. ऐसे में चलिए अब हम आपको बताते हैं कि दवाएं शरीर में स्टेप बाय स्टेप कैसे खुलती है और अब डॉक्टर दवाओं का स्टेप बाय स्टेप घुलना कैसे देख सकेंगे.
सिंगल सेल लेवल पर दिखेगा दवा का असर
अमेरिका के स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने vCATCH नाम की एक नई इमेजिंग तकनीक विकसित की है. इस तकनीक की मदद से शरीर में दवा के सफर को एक-एक कोशिका के स्तर पर देखा जा सकता है. यानी दवा कहां चिपक रही है और किसी सेल पर असर डाल रही है यह पहले से कहीं ज्यादा साफ नजर आएगा. वहीं अब तक इस्तेमाल होने वाले तरीकों में दवा की मात्रा तो मापी जा सकती थी, लेकिन यह पता लगाना मुश्किल था कि दवा किन खास कोशिकाओं से जुड़ रही है. कई बार दवाएं उन जगहों पर असर कर देती है, जहां उसका असर नहीं होना चाहिए. पुराने तरीके इन अनचाहे प्रभावों को पकड़ने में कमजोर थे.
कैसे काम करता है vCATCH?
vCATCH में दावों को एक खास केमिकल टैग से जोड़ा जाता है. इसके बाद क्लिक केमिस्ट्री नाम की तकनीक से उन जगहों को फ्लोरोसेंट मार्कर से रोशन किया जाता है, जहां दवा जुड़ती है. इससे पूरे अंग के अंदर दवा का रास्ता और उसका असर साफ-साफ देखा जा सकता है.वहीं इस तकनीक को चूहों पर दो कैंसर दवाओं इब्रुटिनिब और अफाटिनिब के साथ टेस्ट किया गया. जिसके बाद रिसर्च में सामने आया कि इब्रुटिनिब सिर्फ अपने तय टारगेट पर नहीं बल्कि दिल और ब्लड वेसल्स की कोशिकाओं से भी जुड़ रही थी. वहीं वैज्ञानिकों का मानना है कि यही वजह हो सकती है कि इस दवा से कुछ मरीजों में दिल से जुड़ी दिक्कतें देखी जाती है.
दवाओं का साइड इफेक्ट समझने में मिलेगी मदद
vCATCH की मदद से अब यह समझना आसान होगा कि किसी दवा के साइड इफेक्ट क्यों होते हैं. डॉक्टर और रिसर्चर्स यह देख सकेंगे की दवा कहां-कहां अनचाहे तरीके से असर कर रही है और उसी हिसाब से दवाओं को ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा.वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तकनीक से नई दवाओं की टेस्टिंग और ज्यादा सटीक होगी. खासकर लास्ट स्टेज में मौजूद दवाओं को बाजार में लाने से पहले यह देखा जा सकेगा कि वह सही टारगेट पर असर कर रही है या नहीं. इससे इलाज ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
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Source: IOCL























