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Bipolar Disorder: जानें, क्या होता है बाइपोलर डिसऑर्डर और मौसम बदलने के दौरान आती हैं कैसी समस्याएं

Mental Health: बाइपोलर डिसऑर्डर दो अलग-अलग मानसिक समस्याओं का संयुक्त रूप होता है. यानी जब एक ही व्यक्ति को दो खास मानसिक समस्याएं एक ही समय पर होती हैं तो इसे बाइपोलर डिसऑर्डर कहा जाता है.

What is Bipolar Disorder: कई तरह की मानसिक समस्याओं (Mental Disease) में बाइपोलर डिसऑर्डर भी हाइली सेंसेटिव बीमारियों में शामिल है. इस बीमारी में पेशंट को डिप्रेशन और मेनिया दोनों होते हैं. डिप्रेशन (Depression) यानी अवसाद और मेनिया (Menia) यानी परिस्थितिवश मूड में हुए कुछ खास परिवर्तन. बाइपोलर डिसऑर्डर (Bipolar Disorder) से ग्रसित मरीज को इन दोनों बीमारियों के एपिसोड्स आते हैं. यानी एक समय पर यदि डिप्रेशन हावी है तो मेनिया शांत रह सकता है और यदि मेनिया ट्रिगर हो रहा है तो डिप्रेशन के लक्षण सेकंडरी हो जाते हैं.

हैरान करने वाली बात
बाइपोलर डिसऑर्डर डिसऑर्डर वाले व्यक्ति के साथ सबसे हैरान करने वाली बात यह होती है कि मेनिया और डिप्रेशन दोनों एक-दूसरे से एकदम विपरीत बीमारियां हैं. मेनिया में व्यक्ति बहुत बड़ी-बड़ी बातें करता है. एकदम असंभव-सी लगने वाली बातें ऐसे बताता है जैसे कि ये सब कितना आसान है. जबकि डिप्रेशन में व्यक्ति जो वास्तव में होता है, उसे भी कमतर करके आंकता है और असुरक्षित महसूस करता है, असहाय महसूस करता है और उसे लगने लगता है कि अब लाइफ में उसके पास कुछ बचा नहीं है.

दो महीने का होता है एपिसोड 

बाइपोलर डिसऑर्डर में मेनिया और डिप्रेशन का एपिसोड करीब दो महीने का होता है. यानी इन दो महीनों में कोई एक ही बीमारी हावी होती है. अगर डिप्रेशन हावी है तो अगले दो महीने मेनिया के लक्षण बिल्कुल नहीं दिखेंगे और यदि मेनिया हावी है तो पूरे दो महीने डिप्रेशन का पता भी नहीं चलेगा.

कब बढ़ जाती है समस्या?
दवाओं, काउंसलिंग और थेरपी के जरिए बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीज को काफी हद तक नॉर्मल रखा जा सकता है और वह सामान्य जीवन जीने का अभ्यस्त होने लगता है. लेकिन बदलते मौसम में इस बीमारी से ग्रसित लोगों का विशेष ध्यान रखना होता है.

सर्दी के मौसम में आमतौर पर डिप्रेशन की समस्या अधिक बढ़ जाती है. ऐसा उन लोगों के साथ भी होता है, जिन्हें सिर्फ डिप्रेशन है और उन लोगों के साथ भी होता है, जिन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर है. इसलिए व्यक्ति उदास, निराश और तनाव में रहता है. कई बार उसके मन में आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं. इसलिए इन मरीजों का खास ध्यान रखना होता है. सितंबर से मौसम बदलने लगता है और अक्टूबर से हल्दी सर्दी शुरू हो जाती है, मौसम में इस बदलाव का असर इन मरीजों में डिप्रेशन के रूप में सामने आता है. जबकि सर्दी से गर्मी की तरफ जाते समय इनमें मेनिया के लक्षण अधिक देखने को मिलते हैं.

क्या है इलाज?
बाइपोलर डिसऑर्डर के मरीजों के इलाज की बात हो या उन्हें सीजन एपिसोड्स में नॉर्मल रखने की. इस काम में सायकाइट्रिस्ट और क्लीनिकल सायकोलजिस्ट ही आपकी मदद कर सकते हैं. इन मरीजों को प्रॉपर दवा और थेरपी की जरूरत होती है. जबकि कुछ केसेज में काउंसलिंग चाहिए होती है.

 

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों को केवल सुझाव के रूप में लें, एबीपी न्यूज़ इनकी पुष्टि नहीं करता है. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें. 

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