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DETAIL: ब्राह्मण पेशवा शासक के खिलाफ आखिर दलितों ने क्यों दिया अंग्रेजों का साथ?
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महाराष्ट्र में कई जगहों पर दलित समुदाय इस दिन(1 जनवरी) को शौर्य दिवस के रुप में मनाते हैं. इस लड़ाई को पिछड़ी जातियों की उच्च जातियों की दलित विरोधी व्यवस्था को खत्म करने के तौर पर देखा जाता है.
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इसी तरह एक और क्रूर नियम दलितों पर थोपा गया था. दलितों को सड़क पर चलते वक्त अपने पीछे एक झाडू बांध कर चलना होता था ताकि वे जिस रास्ते से गुजर रहे हों उसे साफ करते चलें. इन सभी बातों को आप बी आर अंबेडकर की किताब "एनहिलेशन ऑफ कास्ट" में पढ़ सकते हैं.
Published at : 02 Jan 2018 05:52 PM (IST)
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