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643 KM तक मारक क्षमता और 50 KG विस्फोटक के साथ उड़ान... SMART मिसाइल से ऐसे मजबूत होगी इंडियन नेवी

SMART के साथ, भारत अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादों के क्षेत्र में अग्रणी बनने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा, अन्य देश भी इस प्रौद्योगिकी को अपने रक्षा क्षेत्र में अपना रहे हैं.

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो प्रणाली का ओडिशा तट से सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण कर लिया है. बीते एक मई को ही ओडिशा के तट पर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सुपरसोनिक मिसाइल असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया. स्मार्ट अगली पीढ़ी की मिसाइल आधारित हल्के टारपीडो वितरण प्रणाली है, जिसे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को हल्के टारपीडो की पारंपरिक सीमा से कहीं अधिक बढ़ाने के लिए डीआरडीओ की ओर से डिजाइन और विकसित किया गया है.

सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम ने उड़ान भरने और सफलतापूर्वक परीक्षण के बाद  रक्षा मंत्रालय की ओर से भी कहा गया कि यह अगली पीढ़ी का मिसाइल सिस्टम है, जो लाइटवेट टॉरपीडो डिलीवरी सिस्टम पर आधारित है. जिसे डीआरडीओ की टीम ने ही डिजाइन और विकसित किया है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो प्रणाली के सफल उड़ान-परीक्षण पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और रक्षा उद्योग जगत के अन्य भागीदारों को बधाई देते हुए भारत के लिए भविष्य की नई परिकल्पना की संज्ञा दी है. इस प्रणाली के विकास से भारतीय नौसेना की घातकता में और भी वृद्धि हुई है. SMART के साथ, भारत अपने स्वदेशी रक्षा उत्पादों के क्षेत्र में अग्रणी बनने की कोशिश कर रहा है. इसके अलावा, अन्य देश भी इस प्रौद्योगिकी को अपने रक्षा क्षेत्र में अपना रहे हैं.

क्या है मिसाइल की विशेषता 

सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो (स्मार्ट)  नई पीढ़ी की मिसाइल-आधारित कम भार वाली एक आयुध प्रणाली है, जिसमें एक हल्का टॉरपीडो लगाया जाता है और इस टॉरपीडो का इस्तेमाल पेलोड की तरह होता है. इसे भारतीय नौसेना की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमता को सामान्य टॉरपीडो की पारंपरिक सीमा से कहीं और अधिक बढ़ाने के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी की डीआरडीओ की ओर से तैयार तथा विकसित किया गया है. इस कनस्तर-आधारित मिसाइल प्रणाली में कई उन्नत उप-प्रणालियां समायोजित की गई हैं, जिनमें दो-चरण वाली ठोस प्रपल्शन प्रणाली, इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्चुएटर प्रणाली, सटीकता के साथ इनर्शियल नेविगेशन प्रणाली शामिल की गई हैं.

सुपरसोनिक मिसाइल-असिस्टेड रिलीज ऑफ टॉरपीडो पैराशूट-आधारित रिलीज सुविधा के साथ पेलोड के रूप में उन्नत हल्के भार वाले टारपीडो को भी ले जा सकता है. इस मिसाइल को ग्राउंड मोबाइल लॉन्चर से प्रक्षेपित किया गया. इस परीक्षण में संतुलित पृथक्करण, निष्कासन और वेग नियंत्रण जैसे कई अत्याधुनिक सुविधाओं को परख की गई. स्मार्ट एक कनस्तरीकृत हाइब्रिड सिस्टम है, जो लंबी दूरी की मिसाइल वाहक से बना है जो सुपरसोनिक गति से यात्रा कर सकता है और पनडुब्बी रोधी युद्ध (एएसडब्ल्यू) भूमिका के लिए पेलोड के रूप में एक हल्के टारपीडो से बनाया गया है. इस परियोजना के पीछे का उद्देश्य एक त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना है जो गतिरोध दूरी से टारपीडो लॉन्च कर सकने में सक्षम हो.

इस मिसाइल की मारक क्षमता 643 किमी (400 मील) है, जो 50 किलोग्राम उच्च विस्फोटक वारहेड के साथ 20 किमी (12.5 मील) की दूरी के हल्के वजन वाले टॉरपीडो को ले जाती है. स्मार्ट हवाई या जहाज आधारित पनडुब्बी पहचान और पहचान प्रणालियों से जुड़े दो-तरफ़ा डेटा लिंक का उपयोग करता है. स्मार्ट को सतही जहाज या ट्रक-आधारित तटीय बैटरी से लॉन्च किया जा सकता है. स्मार्ट मिसाइल भूमि और नौसेना आधारित हथियारों से निपटने वाले संस्थानों की प्रौद्योगिकियों को संयोजित करने के लिए संलयन परियोजना का हिस्सा है.

अभी तक तीन बार हुआ है परीक्षण

मिसाइल एक दोहरे चरण के ठोस-प्रणोदक रॉकेट द्वारा संचालित है और पाठ्यक्रम सुधार के लिए इलेक्ट्रो-मैकेनिकल एक्चुएटर्स का उपयोग करती है. उड़ान में मार्गदर्शन के लिए, स्मार्ट एक जड़त्वीय नेविगेशन प्रणाली (आईएनएस) का उपयोग करता है और डेटालिंक के माध्यम से वास्तविक समय पाठ्यक्रम सुधार और लक्ष्य अद्यतन करने की अनुमति देता है. मिसाइल का पता लगाने की सीमा को कम करने के लिए समुद्री स्किमिंग का उपयोग किया जाता है.

स्मार्ट मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 5 अक्टूबर 2020 को अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया था. ये अधिकतम सीमा और ऊंचाई के लिए मिसाइल की उड़ान की जांच करने, नाक शंकु को अलग करने, टारपीडो को छोड़ने और वेग कटौती तंत्र की तैनाती के लिए प्रदर्शन परीक्षण का हिस्सा था. 13 दिसंबर 2021 को स्मार्ट मिसाइल का दूसरा परीक्षण इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR), ओडिशा से सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था. पूरे प्रक्षेप पथ की निगरानी इलेक्ट्रो-ऑप्टिक टेलीमेट्री सिस्टम, डाउनरेंज इंस्ट्रूमेंटेशन और डाउनरेंज जहाजों सहित विभिन्न रेंज रडार द्वारा की गई थी.

मिसाइल में एक टारपीडो, पैराशूट वितरण प्रणाली और रिलीज तंत्र था. तीसरा परीक्षण डीआरडीओ ने  एक मई 2024 को आईटीआर, बालासोर, ओडिशा से हल्के वजन वाले टॉरपीडो को हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हुए तीसरा स्मार्ट मिसाइल परीक्षण सफलतापूर्वक किया है. परीक्षण के दौरान संपूर्ण रेंज क्षमता का प्रदर्शन किया गया, जिसे ग्राउंड-आधारित कनस्तर लॉन्चर सिस्टम का उपयोग करके किया गया था. परीक्षण में वेग नियंत्रण, इजेक्शन और सममित पृथक्करण की पुष्टि की गई है. इस कदम से नौसेना को एक और मजबूती मिलेगी.  

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