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जानवर भी तो बूढ़े होते हैं तो इनके दांत क्यों नहीं टूटते, जबकि इंसानों के लग जाती है बत्तीसी?

जानवरों के मजबूत दांत किसी चमत्कार का नहीं, बल्कि प्रकृति और प्राकृतिक भोजन का नतीजा हैं. इंसान अगर अपनी आदतों पर ध्यान दें, तो दांतों की सेहत को लंबे समय तक बचाया जा सकता है.

क्या आपने कभी गौर किया है कि जंगल में रहने वाले जानवर बिना ब्रश, बिना टूथपेस्ट और बिना डेंटिस्ट के भी मजबूत दांतों के साथ पूरी जिंदगी निकाल देते हैं, जबकि इंसानों को कम उम्र में ही कैविटी, दर्द और दांत टूटने की समस्या घेर लेती है? आखिर ऐसा क्यों है कि शेर, गाय, घोड़ा या शार्क के दांत दशकों तक साथ निभाते हैं, लेकिन इंसानों के दांत जल्दी जवाब दे देते हैं? इस सवाल का जवाब छुपा है प्रकृति, खान-पान और विकास के नियमों में.

जानवरों और इंसानों के दांतों का फर्क

प्रकृति ने हर जीव को उसके जीवन और भोजन के हिसाब से बनाया है. जानवरों के दांत उनके प्राकृतिक भोजन के अनुसार मजबूत, मोटे और टिकाऊ होते हैं. वहीं इंसानों के दांत धीरे-धीरे बदलती जीवनशैली और खाने की आदतों के कारण कमजोर पड़ते जा रहे हैं. यह फर्क केवल बनावट का नहीं, बल्कि आदतों और पर्यावरण का भी है.

प्राकृतिक भोजन का असर

ज्यादातर जानवर कच्चा और प्राकृतिक भोजन खाते हैं. घास, पत्ते, कच्चा मांस या सख्त फल-बीज उनके भोजन का हिस्सा होते हैं, जिनमें चीनी लगभग नहीं होती. यही वजह है कि उनके दांतों में सड़न यानी कैविटी बहुत कम होती है. दूसरी तरफ इंसान पका हुआ, प्रोसेस्ड और मीठा खाना ज्यादा खाते हैं. मिठास और सॉफ्ट फूड दांतों पर चिपककर बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका देते हैं, जिससे दांत कमजोर होने लगते हैं.

चबाने से होती है स्वाभाविक सफाई

जानवरों का भोजन आमतौर पर सख्त और रेशेदार होता है. इसे चबाने से दांतों पर जमी गंदगी अपने-आप साफ हो जाती है. इसे दांतों की प्राकृतिक सफाई कहा जा सकता है. इंसान अक्सर नरम खाना खाते हैं, जिसे ज्यादा चबाने की जरूरत नहीं पड़ती है. इससे दांतों को वह प्राकृतिक एक्सरसाइज नहीं मिल पाती, जो जानवरों को रोज मिलती है.

लार और एंजाइम की भूमिका

जानवरों की लार में मौजूद एंजाइम उनके भोजन को तोड़ने के साथ-साथ बैक्टीरिया को भी नियंत्रित रखते हैं. यह लार दांतों की सतह को सुरक्षित रखने में मदद करती है. इंसानों में भी लार होती है, लेकिन अत्यधिक मीठा, चिपचिपा और एसिडिक भोजन लार के इस सुरक्षा तंत्र को कमजोर कर देता है. 

नए दांत उगाने की खासियत

कुछ जानवरों में दांतों का टूटना कोई बड़ी समस्या नहीं होती है. शार्क और मगरमच्छ जैसे जानवर जीवन भर नए दांत उगाते रहते हैं. हाथियों में भी दांत धीरे-धीरे आगे की ओर खिसकते रहते हैं. इंसानों में यह क्षमता नहीं होती, इसलिए एक बार स्थायी दांत खराब हो जाएं तो उनकी जगह नए दांत नहीं आते हैं.

प्रकृति का सख्त नियम

जंगली जानवरों के लिए दांत जीवन और मृत्यु का सवाल होते हैं. अगर उनके दांत खराब हो जाएं तो वे भोजन नहीं कर पाएंगे और जीवित नहीं रहेंगे, इसलिए प्रकृति ने केवल मजबूत दांत वाले जानवरों को ही आगे बढ़ने दिया. इंसानों के पास आधुनिक इलाज, दवाइयां और विकल्प हैं, इसलिए कमजोर दांतों के बावजूद जीवन चलता रहता है, लेकिन इसका असर धीरे-धीरे सामने आता है. 

इंसानों के दांत क्यों जल्दी टूटते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार इंसानों में दांतों की समस्या का मुख्य कारण खराब खान-पान, ज्यादा शक्कर, कोल्ड ड्रिंक्स, जंक फूड और आधुनिक जीवनशैली है. इसके अलावा सही तरीके से चबाने की आदत कम होना भी दांतों को कमजोर बनाता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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