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Nuclear Power India: भारत में कब खुला था पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट, जानें कैसे हुई थी इसकी शुरुआत

Nuclear Power India: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच आइए जानते हैं भारत में पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट कब शुरू हुआ था. जानें क्या है इसका इतिहास.

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  • भारत की परमाणु ऊर्जा यात्रा तारापुर से शुरू हुई।
  • होमी भाभा ने शांतिपूर्ण ऊर्जा उपयोग का सपना देखा।
  • 1969 में तारापुर पहला वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा केंद्र बना।
  • अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से बॉयलिंग वॉटर रिएक्टर तकनीक आई।

Nuclear Power India: मिडिल ईस्ट में तनाव अभी भी जारी है. इसी बीच लोगों का ध्यान दुनिया की न्यूक्लियर उर्जा शक्ति पर जा रहा है. भारत में भी परमाणु ऊर्जा की यात्रा एक काफी साहसी सोच के साथ शुरू हुई थी. यह सोच थी एडवांस्ड तकनीक के जरिए ऊर्जा के मामले में  आत्मनिर्भरता को हासिल करना. यह सोच तब साकार हुई जब तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र चालू हुआ. यह देश का पहला कमर्शियल न्यूक्लियर पावर प्लांट था. 

भारत में परमाणु ऊर्जा की शुरुआत 

भारत के परमाणु कार्यक्रम की नींव होमी जहांगीर भाभा ने रखी थी. इन्हें अक्सर भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का जनक कहा जाता है. सरकार के सहयोग से उनकी सोच का मकसद परमाणु तकनीक का इस्तेमाल शांतिपूर्ण कामों के लिए करना था. इसमें सबसे जरूरी बिजली बनाने का प्लान था. एक लंबी अवधि की रणनीति के चलते ही आखिरकार तारापुर पावर प्लांट की स्थापना हुई. 

1969 में तारापुर का चालू होना 

तारापुर परमाणु ऊर्जा केंद्र का निर्माण 1960 के दशक में शुरू हुआ और यह 28 अक्टूबर 1969 को चालू हो गया. इसके साथ ही भारत ने कमर्शियल परमाणु ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा. उस समय यह एशिया के ऐसे शुरुआती केंद्रों में से एक था जो उस दौर में भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा को दर्शाता था.

अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और तकनीक 

इस संयंत्र के शुरुआती विकास में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की बड़ी भूमिका रही. अमेरिकी कंपनियां जनरल इलेक्ट्रिक और बेकटेल ने इसकी पहली दो यूनिट बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. यह प्रोजेक्ट भारत, अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के बीच हुए एक समझौते के तहत पूरा किया गया था. इस प्लांट में बॉयलिंग वॉटर रिएक्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया था. यह उस समय के हिसाब से काफी एडवांस्ड थी और इससे कुशलतापूर्वक बिजली बनाई जा सकती थी.

शुरुआती क्षमता और विस्तार 

जब यह प्लांट चालू हुआ तब इसकी पहली दो यूनिटों में से हर एक की क्षमता लगभग 210 मेगावाट थी. बाद में परिचालन से जुड़ी जरूरतों को देखते हुए इसे घटाकर लगभग 160 मेगावाट कर दिया गया. इसके बावजूद यह प्लांट भारत के ऊर्जा बुनियादी ढांचे का एक मजबूत स्तंभ बन गया. 

समय के साथ भारत ने इस केंद्र का विस्तार करते हुए इसमें दो और स्वदेशी यूनिट जोड़ी. इनमें से हर एक की क्षमता 540 मेगावाट थी. इससे बिजली का कुल उत्पादन काफी बढ़ गया.

एशिया के लिए एक मील का पत्थर 

सोवियत संघ को छोड़कर तारापुर एशिया का पहला कमर्शियल  न्यूक्लियर पावर प्लांट था.  इस उपलब्धि ने भारत को परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे देश की कतार में लाख खड़ा किया. आज इस प्लांट का संचालन न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड द्वारा किया जाता है. यह भारत के ऊर्जा मिश्रण में एक बड़ी भूमिका निभाने जारी रखे हुए है.

यह भी पढ़ें:  वियतनाम से अफगानिस्तान तक, जानें किन छोटे देशों में हार मानकर उल्टे पांव लौट चुका है अमेरिका?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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