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यहां इस पौधे में होते हैं दिल के आकार के फूल,  दवा बनाने में भी आते हैं काम

धरती पर लाखों तरह के पेड़-पौधे मौजूद हैं.सभी पौधों के फलों-फूलों के अपने गुण और इस्तेमाल करने का तरीका होता है.लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने वाले हैं, जिसका फूल दिल के आकार का होता है

दुनियाभर में लाखों प्रजाति के पेड़-पौधे पाए जाते हैं. सभी पौधों और उनके फलों-फूलों की अपनी खूबियां होती हैं. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने वाले हैं, जिसके फूल दिल के आकार के होते हैं. जी हां इस पौधे के फूल दिल के आकार के होते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि ये पेड़ कहां पर पाए जाते हैं और इन फूलों का इस्तेमाल किन-किन कामों में होता है. 

ब्लीडिंग हार्ट

बता दें कि जिस पेड़ से दिल के आकार के फूल होते हैं, इन्हें ब्लीडिंग हार्ट पौधा कहते हैं. ये पौधा बारहमासी होता है. दरअसल इस पौधे की खासियत इसके दिल के आकार के फूल हैं. इन्हें देख कर लगता है कि इनके नीचे से "खून" निकल रहा है. यही कारण है कि इस पेड़ का नाम ब्लीडिंग हार्ट साइबेरिया पड़ा है. खासकर ये पौधे जापान और चीन में देखने को मिलते हैं. इसके अलावा ब्लीडिंग हार्ट को वैज्ञानिक रूप से लैम्प्रोकैप्नोस स्पेक्टेबिलिस के नाम से जाना जाता है. यह पौधा देर से वसंत और गर्मियों की शुरुआत में खिलता है. लेकिन कई जगह इसके फूल हर मौसम में खिलते देखे जाते हैं.

सबसे अलग हैं ये फूल

ब्लीडिंग हार्ट फूल का आकार और कलर कॉम्बिनेशन दुनिया में सबसे अनोखा माना जाता है. इसके दिल के आकार के फूल हर किसी का ध्यान आकर्षित करते हैं. ये पेड़ धनुषाकार तनों से सुंदर ढंग से लटकते हैं और गुलाबी रंग के चमकीले शेड के होते हैं और नीचे की तरफ एक बूंद लटकती सी दिखती है, जिसे देख कर लगता है कि दिल से खून बह रहा है. ब्लीडिंग हार्ट को सदियों से भावनाओं और गहरे स्नेह से जोड़ा जाता रहा है.

दवाई में इस फूल का काम

ब्लीडिंग हार्ट का इस्तेमाल कुछ पारंपरिक उपचारों में इसके औषधीय गुणों के लिए भी किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि इसमें सूजन-रोधी और दर्द निवारक गुण होते हैं और कई जगहों पर इस पौधे का इस्तेमाल दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है. वहीं यदि आप ब्लीडिंग हार्ट के पौधों की संख्या बढ़ाना चाहते हैं, तो इसे हिस्सों में बांट कर किया जा सकता है. 

जानकारी के मुताबिक ब्लीडिंग हार्ट छायादार जगहों में पनप सकते हैं. वे कई तरह की जलवायु के अनुकूल ढल भी सकते हैं. यही कारण है कि गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोगों के लिए ये पौधा खास पसंद बन जाता है. हालांकि ये पौधे और फूल खाने के लिहाज से जहरीले माने जाते हैं. इसमें ऐसे पदार्थ होते हैं, जो खाने से पेट में तकलीफ पैदा कर सकते हैं. लेकिन इसके फूलों का इस्तेमाल दवा बनाने के लिए किया जाता है. 

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गिरिजांश गोपालन को मीडिया इंडस्ट्री में चार साल से ज्यादा का अनुभव है. फिलहाल वह डिजिटल में सक्रिय हैं, लेकिन इनके पास प्रिंट मीडिया में भी काम करने का तजुर्बा है. दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद गिरिजांश ने नवभारत टाइम्स अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. उन्हें घूमना बेहद पसंद है. पहाड़ों पर चढ़ना, कैंपिंग-हाइकिंग करना और नई जगहों को एक्सप्लोर करना उनकी हॉबी में शुमार है। यही कारण है कि वह तीन साल से पहाड़ों में ज्यादा वक्त बिता रहे हैं. अपने अनुभव और दुनियाभर की खूबसूरत जगहों को अपने लेखन-फोटो के जरिए सोशल मीडिया के रास्ते लोगों तक पहुंचाते हैं.
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