भारत में आजादी के बाद सबसे बड़ा जन आंदोलन कब हुआ था, कितनी भीड़ आई थी?
वर्ष 2020 का ऐतिहासिक किसान आंदोलन भारत की आजादी के बाद का सबसे बड़ा जन आंदोलन माना जाता है, जिसमें देशव्यापी हड़ताल के दौरान करीब 25 करोड़ लोगों की ऐतिहासिक भागीदारी दर्ज की गई थी.

दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देशव्यापी राजनीतिक और सामाजिक लड़ाई का केंद्र बन गया है. हाल ही में चुनाव आयोग के खिलाफ जंतर-मंतर पर व्यापक विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी और खींचा है. मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे हैं.
इस आंदोलन ने स्वतंत्र भारत के उन बड़े जन आंदोलनों की यादें ताजा कर दी हैं, जिन्होंने देश की सत्ता और सियासत को हिलाकर रख दिया था. आइए जानते हैं, भारत के उस आंदोलन के बारे जो देश की आजादी के बाद का सबसे बड़ा जन आंदोलन बन गया.
आजादी के बाद का सबसे बड़ा जन आंदोलन
स्वतंत्र भारत के इतिहास में साल 2020-21 में हुआ किसान आंदोलन सबसे बड़ा और व्यापक जन आंदोलन माना जाता है. तीन कृषि कानूनों के विरोध में शुरू हुआ यह आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर करीब एक साल से अधिक समय तक चला था. राष्ट्रिय और अंतर्राष्ट्रिय स्तर पर इस आंदोलन ने इतिहास रच दिया, क्योंकि यह मानव इतिहास के सबसे अनुशासित और बड़े प्रदर्शनों में से एक था.
कितनी भीड़ उमड़ी थी आंदोलन में?
इस आंदोलन के दौरान भीड़ और भागीदारी का आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवंबर-दिसंबर 2020 में देशव्यापी हड़ताल के दौरान एक ही दिन में करीब 25 करोड़ से अधिक लोगों नें हिस्सा लिया था. दिल्ली की सीमाओं पर महीनों तक रुके किसानों की तादाद रोजाना लाखों में थी. इसके अलावा, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान से लाखों लोग बारी-बारी से इस भीड़ का हिस्सा बनते रहे, जिसके कारण सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जनसैलाब दिखाई देता था.
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जेपी आंदोलन और अन्ना आंदोलन भी रहे ऐतिहासिक
किसान आंदोलन से पहले भी देश ने कई बड़े जन आंदोलन देखे हैं. साल 1974 में जयप्रकाश नारायण का संपूर्म क्रांति आंदोलन हुआ था, जिसने इंदिरा गांधी सरकार की नींव हिला दी थी. उस दौरान दिल्ली के रामलीला मैदान में लाखों की भीड़ जुटी थी, जिसे आजादी के बाद का पहला सबसे बड़ा जनसैलाब कहा गया.
इसके बाद साल 2011 में अन्ना हजारे के नेतृत्व में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शुरू हुआ था. इस आंदोलन में देश के कोने-कोने से लाखों युवा और नागरिक सड़कों पर उतर आए थे, जिसने देश के एक बड़े राजनीतिक बदलाव का रास्ता साफ किया था.
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